फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Even if the wife is an earning husband, the husband cannot refuse to maintain the child: High Court

पत्नी कमाऊ हो तो भी पति बच्चे के भरण पोषण से नहीं कर सकता इन्कार : हाईकोर्ट

Sat, 02 Nov 2024 02:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Nov 2024 02:53 AM IST
विज्ञापन
Even if the wife is an earning husband, the husband cannot refuse to maintain the child: High Court
-गुरुग्राम निवासी व्यक्ति की फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील खारिज
विज्ञापन

-फैमिली कोर्ट ने याची को बच्चे के लिए 7 हजार रुपये महीना देने का दिया था आदेश
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पत्नी पर्याप्त कमाई कर रही हो तब भी पति बच्चों के लिए गुजारा भत्ता से इन्कार नहीं कर सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम की फैमिली कोर्ट के गुजारा भत्ता आदेश के खिलाफ दाखिल पिता की याचिका को खारिज करते हुए यह अहम आदेश जारी किया है।
गुरुग्राम निवासी व्यक्ति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने याची को आदेश दिया था कि वह अपनी नाबालिग बेटी को 7,000 रुपये महीने अंतरिम गुजारा भत्ता दे। याची ने दलील दी कि उसकी आय केवल 22,000 रुपये है और परिवार के अन्य छह सदस्य उस पर निर्भर हैं। इसके अलावा बच्ची की मां के पास गुजारा करने के लिए पर्याप्त साधन हैं। याची ने दलील दी कि वह अपनी बेटी का गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि वह अपनी मां के पास है। फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता की नाबालिग बेटी है और उसके पास खुद का भरण-पोषण करने के लिए आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, इसलिए पिता का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वह उसका भरण-पोषण करे।
विज्ञापन


बच्चे का भरण पोषण पिता का नैतिक और कानूनी कर्तव्य
पिता होने के नाते याचिकाकर्ता का दायित्व है कि वह उसे एक सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करने के लिए भरण-पोषण करे। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने न केवल याची की वित्तीय क्षमता पर विचार किया, बल्कि बच्ची के पालन-पोषण के लिए आवश्यक व्यापक प्रयासों पर भी विचार किया, जिसे माता-पिता दोनों के बीच समान रूप से साझा किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मां कामकाजी भी है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि पिता बच्चे की जिम्मेदारी लेने से मुक्त हो जाएगा। सीआरपीसी की धारा 125 सामाजिक न्याय का एक साधन है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि महिलाओं और बच्चों को बेसहारा और अभावग्रस्त जीवन से बचाया जाए। यदि पति/पिता के पास पर्याप्त साधन हैं, तो वह अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed