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पुटा का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कार्यकारी सदस्यों ने की बैठक.. खड़ा हुआ बखेड़ा
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव को लेकर घमासान और तेज हो गया। कार्यकाल पूरा होने के बाद विदा हुए पदाधिकारियों ने कार्यकारी सदस्यों की बैठक बुलाई। साथ ही उसमें पुटा चुनाव 25 व 26 सितंबर को कराने का ऐलान कर दिया। इस प्रक्रिया का शिक्षकों ने विरोध करते हुए कहा कि विदाई ले चुके पदाधिकारी संविधान के मुताबिक चुनाव कार्यक्रम तय नहीं कर सकते। साथ ही कार्यकाल कार्यकारी सदस्यों का भी पूरा हो गया है। ऐसे में वह सदस्य नहीं रह जाते। ऐसी स्थिति में लिया गया निर्णय गलत है। शिक्षकों ने कहा कि संविधान का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। अब जल्द ही इसको लेकर निर्णय लेंगे।
नए शिक्षकों का वोटर बनाने का प्रस्ताव पास
पूर्व कार्यकारी सदस्यों की बैठक में कहा गया कि मौजूदा मतदाताओं से किसी प्रकार का इस बार कोई सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाएगा। जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए वह मतदाता नहीं माने जाएंगे। इसके अलावा जो शिक्षक पिछले साल मतदाता बनने से रह गए या फिर नए शिक्षक बने हों तो उन्हें वोट देने का अधिकार मिलेगा। इसके लिए चुनाव अधिकारी को सदस्यता शुल्क ऑनलाइन भेजना होगा। साथ ही चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र भी मेल के जरिये चुनाव अधिकारी को भेजने होंगे। कोरोना के चलते चुनाव अधिकारी स्वच्छता और सामाजिक दूरी का पालन करवाएंगे। मालूम हो कि चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल को बदलने को लेकर शिक्षकों का एक पक्ष ताकत लगा रहा था, लेकिन चुनाव अधिकारी नहीं बदले गए। सदस्यों की बैठक करके चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया।
क्या कहते हैं शिक्षक..
पुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद खालिद भी कार्यकारी सदस्य रहे हैं। उन्हें भी बैठक में बुलाया गया, लेकिन वह नहीं गए। उनका कहना है कि पूर्व सदस्य होने के नाते उन्हें बैठक में बुलाया जाता तो वह जाते, लेकिन उन्होंने वर्तमान कार्यकारी सदस्य के नाते बैठक में बुलाया था जबकि सभी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त से पहले ही पदाधिकारियों को यह सभी निर्णय लेने चाहिए थे, लेकिन अब विदा होने के बाद बैठक की गई जो गलत है। पुटा संविधान का खुलेआम उल्लंघन है। चुनाव अधिकारी को बदला जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया। अब जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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पुटा के पूर्व सचिव प्रो. एमसी सिद्धू ने कहा कि पुटा चुनाव की प्रक्रिया पुटा के संविधान के अनुरूप होनी चाहिए। इनके अलावा कई अन्य शिक्षकों ने भी इस बैठक पर आपत्तियां दायर की हैं। एक से दो दिन में वह भी बैठक करके निर्णय लेंगे।
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नए शिक्षकों का वोटर बनाने का प्रस्ताव पास
पूर्व कार्यकारी सदस्यों की बैठक में कहा गया कि मौजूदा मतदाताओं से किसी प्रकार का इस बार कोई सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाएगा। जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए वह मतदाता नहीं माने जाएंगे। इसके अलावा जो शिक्षक पिछले साल मतदाता बनने से रह गए या फिर नए शिक्षक बने हों तो उन्हें वोट देने का अधिकार मिलेगा। इसके लिए चुनाव अधिकारी को सदस्यता शुल्क ऑनलाइन भेजना होगा। साथ ही चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र भी मेल के जरिये चुनाव अधिकारी को भेजने होंगे। कोरोना के चलते चुनाव अधिकारी स्वच्छता और सामाजिक दूरी का पालन करवाएंगे। मालूम हो कि चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल को बदलने को लेकर शिक्षकों का एक पक्ष ताकत लगा रहा था, लेकिन चुनाव अधिकारी नहीं बदले गए। सदस्यों की बैठक करके चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया।
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क्या कहते हैं शिक्षक..
पुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद खालिद भी कार्यकारी सदस्य रहे हैं। उन्हें भी बैठक में बुलाया गया, लेकिन वह नहीं गए। उनका कहना है कि पूर्व सदस्य होने के नाते उन्हें बैठक में बुलाया जाता तो वह जाते, लेकिन उन्होंने वर्तमान कार्यकारी सदस्य के नाते बैठक में बुलाया था जबकि सभी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त से पहले ही पदाधिकारियों को यह सभी निर्णय लेने चाहिए थे, लेकिन अब विदा होने के बाद बैठक की गई जो गलत है। पुटा संविधान का खुलेआम उल्लंघन है। चुनाव अधिकारी को बदला जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया। अब जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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पुटा के पूर्व सचिव प्रो. एमसी सिद्धू ने कहा कि पुटा चुनाव की प्रक्रिया पुटा के संविधान के अनुरूप होनी चाहिए। इनके अलावा कई अन्य शिक्षकों ने भी इस बैठक पर आपत्तियां दायर की हैं। एक से दो दिन में वह भी बैठक करके निर्णय लेंगे।