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क्या केवल नेताओं के फोन उठाना ही जानते हैं अफसर: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 16 Dec 2016 11:30 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब में ईटीटी शिक्षकों की भर्ती में देरी के चलते शिक्षकों के टावर पर चढ़ने के मामले में शुक्रवार को पंजाब सरकार को एक बार फिर हाईकोर्ट की फटकार पड़ी। भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पाने वालों से पहले हलफनामा न लेने और अब हलफनामे में समय लगने की बात पर हाईकोर्ट ने पूछा कि नेताओं के फोन उठाकर जी हजूरी करने के अलावा क्या अधिकारियों को और कुछ नहीं आता। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 588 शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर शनिवार को रिकॉर्ड पेश करने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में अमिकस क्यूरी तनु बेदी ने बताया कि टावर पर चढ़े दूसरे शिक्षक को समझाने का बहुत प्रयास किया गया, लेकिन वह नीचे नहीं आया। शिक्षक ने कहा कि नौकरी नहीं होगी तो परिवार वापस नहीं आएगा, ऐसे में किसके लिए मैं उतर कर नीचे आऊं। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार से पूछा कि नियुक्ति प्रक्रिया की क्या स्थिति है। इस पर पंजाब सरकार की ओर से मौजूद एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीषा गांधी ने कोर्ट को बताया कि सरकार 4500 और 2005 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में रिक्त बचे 588 पदों के लिए 17 दिसंबर से नियुक्ति पत्र देेना आरंभ कर चुकी है।
इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि इन पदों को किस आधार पर भरा जा रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि 4500 शिक्षकों की भर्ती में से समान्य के 293, बीसी के 75 और एससी के 144 पद पर नियुक्ति देनी है। वहीं 2005 शिक्षकों की भर्ती में सामान्य के132, बीसी के 37 और एससी के 77 पदों पर नियुक्ति दी जानी है। हालांकि कोर्ट केस के चलते कुछ पदों को अभी रिक्त छोड़ने का निर्णय लिया गया है।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में अमिकस क्यूरी तनु बेदी ने बताया कि टावर पर चढ़े दूसरे शिक्षक को समझाने का बहुत प्रयास किया गया, लेकिन वह नीचे नहीं आया। शिक्षक ने कहा कि नौकरी नहीं होगी तो परिवार वापस नहीं आएगा, ऐसे में किसके लिए मैं उतर कर नीचे आऊं। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार से पूछा कि नियुक्ति प्रक्रिया की क्या स्थिति है। इस पर पंजाब सरकार की ओर से मौजूद एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीषा गांधी ने कोर्ट को बताया कि सरकार 4500 और 2005 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में रिक्त बचे 588 पदों के लिए 17 दिसंबर से नियुक्ति पत्र देेना आरंभ कर चुकी है।
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इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि इन पदों को किस आधार पर भरा जा रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि 4500 शिक्षकों की भर्ती में से समान्य के 293, बीसी के 75 और एससी के 144 पद पर नियुक्ति देनी है। वहीं 2005 शिक्षकों की भर्ती में सामान्य के132, बीसी के 37 और एससी के 77 पदों पर नियुक्ति दी जानी है। हालांकि कोर्ट केस के चलते कुछ पदों को अभी रिक्त छोड़ने का निर्णय लिया गया है।
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‘सरकार नहीं कर पा रही तो हम काम करवा देंगे’
highcourt
112 पदों के लिए आवेदक नहीं
पंजाब सरकार ने बताया कि एससी वर्ग में दोनों भर्तियों को यदि जोड़ दिया जाए तो 221 रिक्त पद हैं जिनमें से 7 को कोर्ट केस के चलते खाली छोड़ा गया है और 112 पदों के लिए आवेदक ही नहीं बचे हैं। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार और याचिकाकर्ता को आदेश दिए कि वे अगली सुनवाई पर यह बताएं कि क्या एससी वर्ग की उन सीटों को डिरिजर्व कर सकते हैं जिनके लिए कोई आवेदक मौजूद नहीं है। इसी बीच अमिकस क्यूरी ने बताया कि सरकार 4500 शिक्षकों की भर्ती के लिए नियुक्ति पत्र देते समय अंडरटेकिंग ले रही है लेकिन 2005 पदों की नियुक्ति के लिए ऐसा नहीं कर रही है।
इसके साथ ही पदों के लिए नियुक्ति लेने वालों को ऑप्शन लेने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा रहा है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि एक नियुक्ति में चयनित होने के बाद भी आवेदक एक स्थान छोड़कर दूसरी नियुक्ति के लिए आवेदन कर चयनित हो रहे हैं और वहां भी नियुक्ति ले रहे हैं। ऐसे में डबलिंग हो रही है और इसको रोका जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा। पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि वे इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं।
‘सरकार नहीं कर पा रही तो हम काम करवा देंगे’
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जिस प्रकार से एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग काम कर रहा है उसे देखकर लगता है कि वे भर्ती को संभाल नहीं सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो पंजाब सरकार कोर्ट में यह बोल दे हम यह काम हरियाणा से या हाईकोर्ट के रिक्रूटमेंट सेल से करवा लेंगे। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार का रवैया नौकरशाह अपना रहे हैं उसने नाउम्मीदी जगा दी है। पंजाब सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई को शनिवार तक के लिए टालते हुए पंजाब सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।
पंजाब सरकार ने बताया कि एससी वर्ग में दोनों भर्तियों को यदि जोड़ दिया जाए तो 221 रिक्त पद हैं जिनमें से 7 को कोर्ट केस के चलते खाली छोड़ा गया है और 112 पदों के लिए आवेदक ही नहीं बचे हैं। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार और याचिकाकर्ता को आदेश दिए कि वे अगली सुनवाई पर यह बताएं कि क्या एससी वर्ग की उन सीटों को डिरिजर्व कर सकते हैं जिनके लिए कोई आवेदक मौजूद नहीं है। इसी बीच अमिकस क्यूरी ने बताया कि सरकार 4500 शिक्षकों की भर्ती के लिए नियुक्ति पत्र देते समय अंडरटेकिंग ले रही है लेकिन 2005 पदों की नियुक्ति के लिए ऐसा नहीं कर रही है।
इसके साथ ही पदों के लिए नियुक्ति लेने वालों को ऑप्शन लेने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा रहा है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि एक नियुक्ति में चयनित होने के बाद भी आवेदक एक स्थान छोड़कर दूसरी नियुक्ति के लिए आवेदन कर चयनित हो रहे हैं और वहां भी नियुक्ति ले रहे हैं। ऐसे में डबलिंग हो रही है और इसको रोका जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा। पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि वे इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं।
‘सरकार नहीं कर पा रही तो हम काम करवा देंगे’
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जिस प्रकार से एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग काम कर रहा है उसे देखकर लगता है कि वे भर्ती को संभाल नहीं सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो पंजाब सरकार कोर्ट में यह बोल दे हम यह काम हरियाणा से या हाईकोर्ट के रिक्रूटमेंट सेल से करवा लेंगे। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार का रवैया नौकरशाह अपना रहे हैं उसने नाउम्मीदी जगा दी है। पंजाब सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई को शनिवार तक के लिए टालते हुए पंजाब सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।