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नगर निगम चंडीगढ़ में ईपीएफ घोटाला, फर्जी दस्तावेज पेश करके पास कराए करोड़ों, नोटिस जारी

Sat, 10 Aug 2019 10:36 AM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 10 Aug 2019 10:36 AM IST
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epf scam in nagar nigam chandigarh via fake documents
फाइल फोटो
सनराइज कंपनी के बाद नगर निगम चंडीगढ़ में एक और ईपीएफ फर्जीवाड़ा सामने आया है। शगुन इंटरप्राइजेज कंपनी ने एक तो कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं कराया, वहीं फर्जी दस्तावेज लगाकर निगम से करोड़ों रुपये भी पास करा लिए। हॉर्टिकल्चर विंग के सब डिवीजन नंबर 6 के एसडीओ की जांच में यह पूरा प्रकरण सामने आया है। कमिश्नर ने बड़ा घोटला सामने आने के बाद संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही 10 दिन में जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद संबंधित कंपनी केखिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सूत्रों के अनुसार, साल 2018 में शगुन इंटरप्राइजेज कंपनी को आउटसोर्स पर 105 कर्मचारी रखने के लिए टेंडर दिया गया था। यह कर्मचारी सब डिवीजन नंबर 3 और 6 में तैनात होने थे। यह अनुबंध एक साल के लिए 2 करोड़ 2 लाख 52 हजार 683 रुपये में हुआ था। इसमें माली, हेड माली, चौकीदार और चपरासी की पोस्ट पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी थी। कंपनी ने कुछ दिन तो कर्मचारियों का ईपीएफ जमा किया, उसके बाद कर्मचारियों का ईपीएफ जमा करना बंद कर दिया।
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वहीं, कंपनी ने फर्जी दस्तावेज लगाकर करोड़ों रुपये का भुगतान भी करा लिया। जब इस संबंध में जांच हुई तो पता चला कि कई माह से कंपनी कर्मचारियों का ईपीएफ ही जमा नहीं कराया जा रहा। वहीं, कर्मचारियों के नाम पर कंपनी ने जो भुगतान कराया है, उसमें भी फर्जी बिल लगाए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों के जनवरी 2019 और अप्रैल 2019 के ईएसआई चालान भी जमा नहीं कराए हैं। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गलती करने वाली प्रत्येक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही कंपनी के सभी दस्तावेज जो कि निगम में लगाए गए हैं, उनकी भी जांच होगी।
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नवंबर 2018 में फर्जीवाड़े की जानकारी, फिर भी कंपनी लेती रही पेमेंट

नवंबर 2018 में ही कंपनी के फर्जीवाड़े की जानकारी निगम के अधिकारियों को हो गई थी। कंपनी के बिलों के नंबर उस समय मैच न होने पर कंपनी को हिदायत दी गई थी। साथ ही इस मामले में जांच भी शुरू हो गई थी। अधिकारियों ने कंपनी को कई बार हिदायत दी कि कर्मचारियों का ईपीएफ जमा कराएं, लेकिन कंपनी ने एक नहीं सुनी।

वहीं इस मामले की सूचना कमिश्नर तक नहीं पहुंची और हॉर्टिकल्चर विंग लगातार कंपनी को अपने स्तर पर ही पेमेंट करता रहा। हाल ही में जब मामला कमिश्नर के संज्ञान में आया तो डिपार्टमेंट के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कमिश्नर ने कहा कि जब फर्जीवाड़ा सामने आया था तो फिर क्यों नहीं उसी समय कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया गया।

कर्मचारियों और निगम दोनों केसाथ फर्जीवाड़ा
सूत्रों की मानें तो कमिश्नर मामले को लेकर काफी सख्त हैं। कमिश्नर का कहना है कि यह न केवल कर्मचारियों बल्कि नगर निगम के साथ भी फर्जीवाड़ा है। नियमानुसार कंपनी को कर्मचारियों का ईपीएफ व ईएसआई जमा करना होता है। इसमें गड़बड़ करने पर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने का प्रावधान है। इस तरह दोनों के साथ धोखा किया गया है। इस संबंध में कार्रवाई तय है।

हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारी भी संदेह के घेरे में
वर्ष 2018 में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भी कमिश्नर तक मामले का न पहुंचना और कंपनी को लगातार पेमेंट देना हॉर्टिकल्चर विंग के अधिकारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है। कमिश्नर ने अधिकारियों से भी जवाब मांगा है कि आखिर बिना बताए अपने स्तर पर कैसे पेमेंट की गई। कंपनी केअधिकारियों का जवाब आने के बाद मामले में कमिश्नर जांच भी बैठा सकते हैं।

चीफ अकाउंट ऑफिसर व लॉ ऑफिसर सभी दस्तावेजों की करेंगे जांच

कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि आगे से किसी भी आउटसोर्स कंपनी के दस्तावेजों की जांच चीफ अकाउंट ऑफिसर और लॉ आफिसर भी करेंगे। किसी भी स्तर पर कोई कमी मिलती है तो इसकी तत्काल जानकारी कमिश्नर को देंगे। साथ ही इस प्रकार के प्रकरणों की जानकारी भी प्रत्येक विभाग दोनों अफसरों को देंगे।

सनराइज कंपनी भी हो चुकी है ब्लैक लिस्टेड
कुछ दिन पूर्व ही 135 कर्मचारियों के पीएफ का सात लाख रुपये जमा न कराने पर सनराइज कंपनी को नगर निगम ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। टैक्स ब्रांच और इनफोर्समेंट विंग में कंपनी केसभी कर्मचारी लगे हुए थे। साथ ही निगम ने कंपनी केसभी अन्य ठेके भी निरस्त करा दिए थे। कंपनी आउटसोर्स पर कर्मचारी उपलब्ध करवाती थी।

जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। कंपनी को जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है। कई दस्तावेज फर्जी मिले हैं। इनकी फिर से जांच कराई जा रही है। हॉर्टिकल्चर विंग की भी भूमिका की जांच की जा रही है।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
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