Chandigarh: दो नोटिस के बाद भी 2000 कर्मचारियों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्योरा, अब 28 जुलाई तक है मौका
अब कार्मिक विभाग ने कहा है कि जिन कर्मचारियों ने अब तक ब्योरा नहीं दिया है उन्हें 28 जुलाई तक मौका दिया जा रहा है। 28 जुलाई के बाद संपत्तियों की जानकारी नहीं देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के तहत जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के विभिन्न विभागों में कार्यरत ग्रुप-ए, बी और सी के करीब 2000 कर्मचारियों ने दो नोटिस के बावजूद अब तक अपनी संपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है। इन कर्मचारियों को कार्मिक विभाग ने 28 जुलाई तक का मौका दिया है। इसके बाद इन कर्मचारियों की पहचान की जाएगी और फिर नियम के तहत कार्रवाई होगी।
आदेश के अनुसार यूटी प्रशासन के सभी विभागों में कार्यरत ग्रुप-ए, बी और सी के कर्मचारियों और अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति की पूरी जानकारी देनी है। विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना है। प्रशासन ने इसके लिए पहले 31 दिसंबर 2021 तक का समय तय किया था लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों ने ब्योरा नहीं दिया। इसके बाद तिथि बढ़ाई गई और 25 अप्रैल 2022 तक सभी कर्मचारियों के नाम एक सर्कुलर जारी किया गया और कहा गया कि वो चल-अचल संपत्ति की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करें। इसके बाद भी विभाग ने पाया है कि करीब 2000 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक ब्योरा नहीं दिया।
कार्मिक विभाग ने अब एक बार फिर सभी विभागों के सचिव, बोर्ड, कारपोरेशन के प्रमुख आदि को पत्र लिखा है और कहा है कि जिन कर्मचारियों ने अब तक ब्योरा नहीं दिया है उन्हें 28 जुलाई तक मौका दिया जा रहा है। 28 जुलाई के बाद संपत्तियों की जानकारी नहीं देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के तहत जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विजिलेंस क्लीयरेंस भी रोका जा सकता है।
प्रशासन में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें
प्रशासन के विभागों में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें आ चुकी हैं। हाल ही में 12 जुलाई को प्रशासन के बिजली विभाग के जेई को सीबीआई ने बिजली मीटर कनेक्शन के एवज में 8000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इसके पहले 18 मई को चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीनियर असिस्टेंट शमशेर सिंह को दस हजार रुपये रिश्वत लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी कई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा अधिकारियों पर भी आय से अधिक संपत्ति होने के आरोप लगते रहते हैं इसलिए प्रशासन चाहता है कि विभिन्न विभागों में ग्रुप-ए, बी और सी के जितने भी कर्मचारी और अधिकारी हैं उनकी संपत्तियों का ब्योरा एकत्र कर लिया जाए। नए आदेश के अनुसार ब्योरा न देने या छिपाने की जानकारी मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।