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Chandigarh News: मनमाने तरीके से कर्मचारी का अनुबंध रद्द, पीजीआई रोहतक पर 75 हजार जुर्माना

Fri, 26 Jul 2024 05:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 05:26 AM IST
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Employees contract arbitrarily cancelled PGI Rohtak fined Rs 75000
हाईकोर्ट ने कहा- अच्छा प्रदर्शन और दस साल की सेवा के बावजूद ऐसे निर्णय की निंदा जरूरी
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2012 में हुई थी अनुबंध के आधार पर नियुक्ति, 2022 में रद्द कर दिया अनुबंध

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। जूनियर फिजियोथेरेपिस्ट का अनुबंध अच्छे प्रदर्शन और 10 साल की सेवा के बावजूद रद्द करने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गलत करार देते हुए पीजीआई रोहतक पर 75 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय की यह दलील की याची अनुबंध विस्तार की मांग का कोई अधिकार नहीं है, उनकी मनमानी तथा निरंकुशता दर्शाता है, जिसकी निंदा की जानी चाहिए।


याचिका दाखिल करते हुए जूनियर फिजियोथेरपिस्ट रितु ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसकी नियुक्ति 2012 में छह माह या नियमित नियुक्ति होने तक की गई थी। इसके बाद लगातार उसके अनुबंध को बढ़ाया गया, लेकिन 2022 में इसे रद्द करने का निर्णय लिया गया। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एक वैधानिक निकाय है। इसके अधिकारी कानून के अनुसार निष्पक्ष और उचित तरीके से कार्य करने के लिए बाध्य हैं। कर्मचारी को जिसका कार्य और आचरण दोनो अच्छा है लगभग दस वर्षों तक पद पर काम करने की अनुमति दिए जाने के बाद सेवा के अनुबंध को समाप्त करने के लिए मनमाने ढंग से काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता को छह महीने की अवधि के लिए या नियमित पदधारी के पद पर आने तक अनुबंध के आधार पर जूनियर फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में नियुक्त किया गया था। उसका अनुबंध समय-समय पर बढ़ाया गया था और विश्वविद्यालय ने नियमित चयन द्वारा पद को भरने का प्रयास भी किया, लेकिन अंतत: वह विफल रहा। अनुबंध बढ़ाने से इनकार करते हुए, कुलपति ने अपनी टिप्पणियों में स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार के निर्देश के कारण नियमित नियुक्तियां नहीं की जा सकती हैं और विभागाध्यक्ष से यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया कि क्या विभाग के सुचारू संचालन के लिए जूनियर फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाओं की आवश्यकता है। जवाब में, उन्होंने यह नहीं कहा कि उसकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं थी। इसके बजाय, केवल यह टिप्पणी की कि अनिश्चित अवधि के लिए विस्तार वांछनीय नहीं था और पद को नियमित आधार पर भरा जाना चाहिए।
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