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महाराजा के भतीजे ने मांगा मेंटेनेंस अलाउंस
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Nov 2013 10:20 AM IST
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फरीदकोट के पूर्व महाराजा हरिंदर सिंह बराड़ की 22 हजार करोड़ की संपत्ति के मामले में शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके यादव की अदालत में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह के भाई मंजीत इंदर सिंह के बेटे भरत इंदर सिंह ने सीपीसी की धारा 151 के तहत अर्जी दायर कर संपत्ति में से 15 लाख रुपये महीना बतौर मेंटेनेंस अलाउंस देने की मांग की है।
याचिका में उन्होंने कहा कि राजघरानों के वंशज को उसी स्टेटस से जीवन गुजर बसर करने का अधिकार है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तारीख तय की है।
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गौरतलब है कि महरावल खेवाजी ट्रस्ट की ओर से महाराजा की बेटियों को सारी संपत्ति देने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है।
50 लाख निकालने की इजाजत जारी रहेगी
ट्रस्ट के वकील चेतन मित्तल ने बताया कि जब तक मामले में कोई फैसला नहीं आता तब तक निचली अदालत के फैसले पर अंतरिम रोक और ट्रस्ट के खर्चों के लिए 50 लाख रुपये निकालने की इजाजत जारी रहेगी।
ट्रस्ट ने दिया खर्च का ब्योरा
महरावल खेवाजी ट्रस्ट के वकील ने अदालत में ट्रस्ट के खातों से निकाली गई राशि व खर्च का पूरा ब्योरा दिया। इस दौरान एक ही केस में कई अपील पर कोर्ट फीस तय करने पर भी बहस हुई। वहीं निचली अदालत से केस जीत चुकी पूर्व महाराजा की बेटी अमृत कौर की क्रॉस अपील पर भी सुनवाई हुई।
यह है मामला
बाईस जुलाई को सीजेएम की अदालत ने फरीदकोट के महाराजा हरिंदर सिंह की 22 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिकाना हक उनकी बेटियों अमृत कौर और दिपिंदर कौर को दिया था।
निचली अदालत ने हरिंदर सिंह की 1982 में बनाई गई वसीयत को अवैध बताया था। वहीं ट्रस्ट की ओर से निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। ट्रस्ट ने कहा था कि अदालत ने 1952 की वसीयत में उस बात पर गौर नहीं किया, जिसमें राजा ने उन्हें संपत्ति से बेदखल कर दिया था।
अपील में यह भी कहा था अमृत कौर ने अदालत के समक्ष उन तथ्यों को नहीं रखा जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वह अपनी जायदाद का कोई भी भाग अमृत कौर के लिए नहीं छोड़ना चाहते।
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सुनवाई के दौरान फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह के भाई मंजीत इंदर सिंह के बेटे भरत इंदर सिंह ने सीपीसी की धारा 151 के तहत अर्जी दायर कर संपत्ति में से 15 लाख रुपये महीना बतौर मेंटेनेंस अलाउंस देने की मांग की है।
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याचिका में उन्होंने कहा कि राजघरानों के वंशज को उसी स्टेटस से जीवन गुजर बसर करने का अधिकार है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तारीख तय की है।
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गौरतलब है कि महरावल खेवाजी ट्रस्ट की ओर से महाराजा की बेटियों को सारी संपत्ति देने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है।
50 लाख निकालने की इजाजत जारी रहेगी
ट्रस्ट के वकील चेतन मित्तल ने बताया कि जब तक मामले में कोई फैसला नहीं आता तब तक निचली अदालत के फैसले पर अंतरिम रोक और ट्रस्ट के खर्चों के लिए 50 लाख रुपये निकालने की इजाजत जारी रहेगी।
ट्रस्ट ने दिया खर्च का ब्योरा
महरावल खेवाजी ट्रस्ट के वकील ने अदालत में ट्रस्ट के खातों से निकाली गई राशि व खर्च का पूरा ब्योरा दिया। इस दौरान एक ही केस में कई अपील पर कोर्ट फीस तय करने पर भी बहस हुई। वहीं निचली अदालत से केस जीत चुकी पूर्व महाराजा की बेटी अमृत कौर की क्रॉस अपील पर भी सुनवाई हुई।
यह है मामला
बाईस जुलाई को सीजेएम की अदालत ने फरीदकोट के महाराजा हरिंदर सिंह की 22 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिकाना हक उनकी बेटियों अमृत कौर और दिपिंदर कौर को दिया था।
निचली अदालत ने हरिंदर सिंह की 1982 में बनाई गई वसीयत को अवैध बताया था। वहीं ट्रस्ट की ओर से निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। ट्रस्ट ने कहा था कि अदालत ने 1952 की वसीयत में उस बात पर गौर नहीं किया, जिसमें राजा ने उन्हें संपत्ति से बेदखल कर दिया था।
अपील में यह भी कहा था अमृत कौर ने अदालत के समक्ष उन तथ्यों को नहीं रखा जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वह अपनी जायदाद का कोई भी भाग अमृत कौर के लिए नहीं छोड़ना चाहते।