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संसद में गूंजा बिजली निजीकरण का मुद्दा मनीष तिवारी बोले- पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी, लगे रोक
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा बुधवार को लोकसभा में गूंजा। श्री आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ में देशभर से सबसे सस्ती बिजली मिलती है, लेकिन सरकार यहां बिजली विभाग को बरकरार रखने के बजाय गलत तरीके से निजी हाथों में दे रही है। उन्होंने विभाग के निजीकरण की पूरी प्रक्रिया को गैरकानूनी बताया और इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
मनीष तिवारी बुधवार को करीब डेढ़ बजे लोकसभा में खड़े हुए और चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर सवाल उठाया। कहा कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, विभाग का निजीकरण इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के सेक्शन-63 के तहत पारदर्शी तरीके से ओपन बिडिंग के तहत ही किया जा सकता है लेकिन चंडीगढ़ बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए सभी नियमों का पालन नहीं किया गया। कहा कि 20 सितंबर 2020 को निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट जारी किया गया था तो उसमें एक खंडन था और लिखा गया था कि स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट में जो प्रावधान हैं, वो मंत्रालय के विचारों को व्यक्त नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के लिए जिस तरह टेंडर किया गया और कंपनी का चुनाव हुआ, वह पूरी तरह से तरीके गैरकानूनी है। ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से तुरंत बिजली निजीकरण की इस प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। उन्होंने संसद में बैठे संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वो लोगों को इस बात को ऊर्जा मंत्री तक पहुंचाएं कि वो गैरकानूनी काम कर रहे हैं।
23 फरवरी को पैदा हुए बिजली संकट पर भी गृह मंत्री से लगाई थी गुहार
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से 23 फरवरी को बिजली का संकट पैदा हो गया था, तब भी मनीष तिवारी ने सवाल उठाया था। तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने ट्विटर पर अमित शाह को टैग कर लिखा है कि चंडीगढ़ में पिछले 36 घंटे से बिजली नहीं है। अराजकता फैली हुई है। सभी आवश्यक सेवाएं ठप हैं। चंडीगढ़ प्रशासन स्थिति से निपटने में बुरी तरह विफल रहा है। चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है इसलिए मंत्रालय को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
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मार्च 2021 में पूछा था- करोड़ों के लाभ में विभाग, फिर भी निजीकरण क्यों
मार्च 2021 में मनीष तिवारी ने लोकसभा में पूछा था कि जब चंडीगढ़ का बिजली विभाग लाभ में है तो इसे क्यों बेचा जा रहा है। इस पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने लिखित में जवाब दिया था कि निजी कंपनी शहरवासियों को बेहतर सुविधा देगी। यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। सरकार ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के तीन साल के राजस्व व पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण लॉस के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि विभाग अधिशेष (सरप्लस) में है। तीन साल में लाभ करीब चार गुना हो गया है।
फिलहाल ये है स्थिति
निजीकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने 870 करोड़ रुपये में एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी की बोली को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने विभाग को अपने अधीन लेना शुरू करना था तो विभाग के कर्मचारियों ने 22 फरवरी से तीन दिन की हड़ताल कर दी। इस दौरान शहर भर में बिजली चली गई और संकट पैदा हो गया। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत हुई और फैसला हुआ कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लंबित रहते निजीकरण नहीं होगा।
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मनीष तिवारी बुधवार को करीब डेढ़ बजे लोकसभा में खड़े हुए और चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर सवाल उठाया। कहा कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, विभाग का निजीकरण इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के सेक्शन-63 के तहत पारदर्शी तरीके से ओपन बिडिंग के तहत ही किया जा सकता है लेकिन चंडीगढ़ बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए सभी नियमों का पालन नहीं किया गया। कहा कि 20 सितंबर 2020 को निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट जारी किया गया था तो उसमें एक खंडन था और लिखा गया था कि स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट में जो प्रावधान हैं, वो मंत्रालय के विचारों को व्यक्त नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के लिए जिस तरह टेंडर किया गया और कंपनी का चुनाव हुआ, वह पूरी तरह से तरीके गैरकानूनी है। ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से तुरंत बिजली निजीकरण की इस प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। उन्होंने संसद में बैठे संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वो लोगों को इस बात को ऊर्जा मंत्री तक पहुंचाएं कि वो गैरकानूनी काम कर रहे हैं।
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23 फरवरी को पैदा हुए बिजली संकट पर भी गृह मंत्री से लगाई थी गुहार
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से 23 फरवरी को बिजली का संकट पैदा हो गया था, तब भी मनीष तिवारी ने सवाल उठाया था। तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने ट्विटर पर अमित शाह को टैग कर लिखा है कि चंडीगढ़ में पिछले 36 घंटे से बिजली नहीं है। अराजकता फैली हुई है। सभी आवश्यक सेवाएं ठप हैं। चंडीगढ़ प्रशासन स्थिति से निपटने में बुरी तरह विफल रहा है। चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है इसलिए मंत्रालय को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
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मार्च 2021 में पूछा था- करोड़ों के लाभ में विभाग, फिर भी निजीकरण क्यों
मार्च 2021 में मनीष तिवारी ने लोकसभा में पूछा था कि जब चंडीगढ़ का बिजली विभाग लाभ में है तो इसे क्यों बेचा जा रहा है। इस पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने लिखित में जवाब दिया था कि निजी कंपनी शहरवासियों को बेहतर सुविधा देगी। यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। सरकार ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के तीन साल के राजस्व व पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण लॉस के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि विभाग अधिशेष (सरप्लस) में है। तीन साल में लाभ करीब चार गुना हो गया है।
फिलहाल ये है स्थिति
निजीकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने 870 करोड़ रुपये में एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी की बोली को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने विभाग को अपने अधीन लेना शुरू करना था तो विभाग के कर्मचारियों ने 22 फरवरी से तीन दिन की हड़ताल कर दी। इस दौरान शहर भर में बिजली चली गई और संकट पैदा हो गया। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत हुई और फैसला हुआ कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लंबित रहते निजीकरण नहीं होगा।