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राहत भरी खबर: पंजाब में इस साल नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम, नियामक आयोग ने जारी किया नया टैरिफ
Fri, 01 Apr 2022 12:31 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:31 AM IST
सार
आयोग इस तथ्य से भी अवगत है कि राज्य और देश कोविड-19 महामारी के दो सालों के प्रभाव से उबर रहा है, जिसके नतीजे के तौर पर काफी आर्थिक संकट पैदा हुआ है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पंजाब में वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान बिजली के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग ने आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की मौजूदा दरों में किसी भी तरह के बदलाव से इंकार कर दिया है। मौजूदा दरों के मुताबिक ही बिजली बिल आएंगे। आयोग ने कहा है कि कोविड काल को देखते हुए टैरिफ के रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जा रही है। आयोग के अनुसार घोषित टैरिफ से पीएसपीएल को 36149.60 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। आमदनी व खर्च में 88.05 करोड़ रुपये का अंतर है, जिसे 2023-24 के लिए समायोजित किया जाएगा।
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हालांकि पीएसपीसीएल ने एक जनवरी 2016 से प्रभावी छठे वेतन आयोग की प्रभाव में अपनी संशोधित प्रस्तुतीकरण में नियामक आयोग से 23607 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व जरूरत का हवाला दिया था, जिसे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए एआरआर में समायोजित रखा गया है। आयोग ने सरप्लस बिजली के उत्पादक उपयोग को बढ़ावा देने की अपनी नीति को जारी रखते हुए सीमा से अधिक बिजली की खपत के लिए 4.86 रुपये किलोवाट की दर से बिजली देने का फैसला किया है।
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आयोग द्वारा नगर निगमों, नगर समितियों जैसे स्थानीय निकायों द्वारा अनुरक्षित सड़कों, पार्कों, चौकों, टोल प्लाजा, राजमार्गों आदि पर सार्वजनिक लाइट की व्यवस्था को समान रूप से सार्वजनिक प्रकाश श्रेणी के अंतर्गत कवर किया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आयोग ने पीएसपीसीएल का एआरआर 36237.65 करोड़ रुपए निर्धारित किया है, जिसमें पीएसटीसीएल का 1492.56 करोड़ रुपये का एआरआर शामिल है। इसकी टैरिफ द्वारा वसूली की जाएगी। आयोग प्रयोग की संचालन कुशलता, प्रतिबद्धताओं और वृद्धि को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं के हितों के प्रति सचेत है, जो इसकी राजस्व जरूरतों के बराबर है।
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आयोग इस तथ्य से भी अवगत है कि राज्य और देश कोविड-19 महामारी के दो सालों के प्रभाव से उबर रहा है, जिसके नतीजे के तौर पर काफी आर्थिक संकट पैदा हुआ है। इस तरह, सभी क्षेत्रों में स्थिरता खास तौर पर आर्थिक तौर पर कमजोर क्षेत्र, कृषि, व्यापारिक उद्यमों और उद्योग जोकि सबसे अधिक रोजगार देने वाला सबसे बड़ा उपभोक्ता क्षेत्र है, को भी प्रयोग संबंधी राजस्व जरूरतों को निर्धारित करते समय ध्यान में रखा गया है। एलान किए गए टैरिफ से नेट सरपल्स नियमित करने के बाद मौजूदा साल तक 36149.60 करोड़ के कुल राजस्व की उम्मीद है। 88.05 करोड़ रुपये के बकाया अंतर को वित्तीय साल 2023-24 के लिए टैरिफ के निर्धारण समय नियमित किया जाएगा।