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पंजाब में गहरा सकता है बिजली संकट, रेलवे ट्रैक जाम होने से प्लांटों में कोयले की सप्लाई बंद

Sat, 10 Oct 2020 11:27 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, पटियाला
अमर उजाला, पटियाला Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 10 Oct 2020 11:27 AM IST
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Electricity Crisis May Occur in Punjab due to Farmers Protest
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के कारण पंजाब में बड़ा बिजली संकट गहराने के संकेत हैं। दरअसल किसानों की ओर से रेलवे ट्रैक जाम किए जाने के बाद थर्मल प्लांटों को आने वाली कोयले की सप्लाई बंद हो गई है। इस कारण पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) को अपने सरकारी थर्मल पूरी तरह से बंद करने पड़े हैं, जबकि प्राइवेट थर्मल प्लांट आधी क्षमता पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं।
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फिलहाल पावरकॉम किसी तरह से बिजली की मांग को पूरा कर रहा है। माना जा रहा है कि अगर हफ्ता भर और यह आंदोलन खिंचा तो प्रदेश में बिजली संकट गहराएगा और हालात काफी नाजुक बन सकते हैं। पंजाब में इस समय बिजली की मांग रोजाना करीब 7200 मेगावाट चल रही है। दिन का तापमान अधिक होने के कारण इस बार अभी तक लोगों के घरों में एसी चल रहे हैं। उधर, इस बार धान का सीजन भी लेट है।
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किसानों को वर्तमान में भी पावरकॉम चार घंटे रोजाना निर्विघ्न बिजली की सप्लाई दे रहा है। संभावना है कि आने वाले कुछ दिनों तक बिजली की मांग ऐसी ही बनी रहेगी। वहीं थर्मलों में कोयले की सप्लाई न होने के कारण बाधा आनी शुरू हो गई है। कोयले की कमी रेलवे ट्रैक बंद होने कारण हो रही है।
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चार दिन का कोयला ही बचा है

आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में छह और लहरां मोहब्बत में चार दिन का कोयला ही बचा है। जबकि तय नियमों के मुताबिक प्लांट में कम से कम सात दिनों का कोयला होना जरूरी है। ऐसे में इन दोनों थर्मलों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। वहीं प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा व तलवंडी साबो में तीन-तीन दिन का और गोइंदवाल में मात्र एक दिन का कोयला शेष है। हालांकि इन थर्मलों को आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है।

तलवंडी साबो व गोइंदवाल दोनों थर्मलों की एक-एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। राजपुरा में बिजली उत्पादन क्षमता कम कर दी है। पावरकॉम के डायरेक्टर (जनरेशन) जतिंदर गोयल का कहना है कि प्राइवेट प्लांटों में बिजली उत्पादन सरकारी के मुकाबले सस्ता पड़ता है। इसलिए प्राइवेट को फिलहाल आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है। सेंटर पूल से पावरकॉम को इस समय करीब 5000 मेगावाट बिजली मिल रही है, जबकि सोलर, हाईडल व हाइड्रो प्रोजेक्टों से 500 मेगावाट बिजली और मिल रही है।

वहीं बाकी की बिजली सप्लाई के लिए पावरकॉम को थर्मल प्लांटों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। फिलहाल पावरकॉम को अपने प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली मिल पा रही है। अगर किसानों का रेलवे ट्रैक पर आंदोलन और लंबा चला तो पंजाब में भयंकर बिजली संकट पैदा हो सकता है। इस संबंध में पावरकॉम के डायरेक्टर (जनरेशन) जतिंदर गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों से रेलवे ट्रैक खाली कराने के लिए बातचीत कर रही है। उन्होंने माना है कि कोयले की कमी तो है, लेकिन पावरकॉम किसी भी तरह से अपने उपभोक्ताओं को बिजली की कमी से दिक्कत नहीं आने देगा।
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