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कैबिनेट का फैसला: मेयर और नप अध्यक्ष के चुनाव सीधे ही होंगे, अविश्वास प्रस्ताव का खतरा नहीं

Thu, 13 Aug 2020 11:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 13 Aug 2020 11:44 PM IST
सार

  • हरियाणा कैबिनेट की बैठक में नगर पालिका अधिनियम की धाराओं में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने को मंजूरी
  • ग्राम पंचायत चुनाव में पहली बार बीसीए ग्रुप को आठ प्रतिशत आरक्षण सरपंच चुनाव में मिलेगा
  • 6821.13 करोड़ से गुरुग्राम में हुडा सिटी सेंटर से विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों तक मेट्रो रेल कनेक्शन की डीपीआर को स्वीकृति

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Elections of Municipal Corporation Mayor and Municipality President will be held directly in Haryana
हरियाणा कैबिनेट बैठक। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा में नगर निगम के मेयर व नगर परिषद व पालिका अध्यक्षों के चुनाव सीधे ही करवाएं जाएंगे। इस संदर्भ में हरियाणा नगर पालिका अधिनियम की जिन धाराओं में जो संशोधन की जरूरत है, उसे अध्यादेश लाकर किया जाएगा। तमाम अटकलों के बाद गुरुवार को हरियाणा कैबिनेट की बैठक में इसे स्वीकृति दे दी गई है। जबकि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने सीधे चुनाव की बजाए इनके चयन की पहले जैसी व्यवस्था ही रहने की वकालत की थी। इसके सीधे चुनाव के बाद इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का खतरा भी नहीं रहेगा। वहीं गुरुग्राम पूरा अब मेट्रो की जद में होगा। इस संदर्भ में भी प्रस्ताव पारित किया गया है।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में गुरुवार शाम हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सितंबर 2019 के चौथे दिन से पहले चुने गए अध्यक्षों की नियुक्ति, हटाने या निलंबन को नियंत्रित करने वाली शर्तों के संबंध में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा-279 में संशोधन के लिए अध्यादेश या विधेयक लाने की स्वीकृति प्रदान की गई। यह संशोधन सितंबर 2019 के चौथे दिन से लागू माना जाएगा।
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संशोधन के अनुसार, ‘हरियाणा नगरपालिका (दूसरे संशोधन) अधिनियम, 2019 में कुछ भी शामिल होने के बावजूद, हरियाणा नगरपालिका (दूसरे संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से पहले नगर पालिकाओं के अध्यक्ष के रूप में चुने गए व्यक्तियों की नियुक्ति, हटाने या निलंबन के लिए या ऐसे व्यक्तियों द्वारा खाली किए गए किसी भी पद को भरना हरियाणा नगर पालिका अधिनियम, 1973 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होना जारी रहेगा। जो हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

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इसके अलावा इस संशोधन से पहले नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में चुने गए व्यक्ति में से किसी के खिलाफ किए गए या शुरू की गई या शुरू की जा सकने वाली या शुरू की जाने वाली सभी कार्रवाइयां हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होंगी, जो हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने से तुरंत पहले अस्तित्व में था।

इस संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि नगरपालिका हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के तहत अध्यक्ष सहित सभी सीटें प्रत्यक्ष चुनाव में चुने गए व्यक्ति द्वारा भरी जाएंगी। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए, जो अधिनियम प्रदान किया गया था, उसमें भी संशोधन किया गया है। अध्यक्ष को अब नगर पालिकाओं के अन्य सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया नहीं जा सकता। इस संशोधन अधिनियम के माध्यम से नगर पालिकाओं के अध्यक्ष के कार्यालय के संबंध में परिणामी संशोधन किए गए हैं।

अब एक अध्यादेश या विधेयक लाकर हरियाणा नगर पालिका अधिनियम,1973 की धारा-279 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया ताकि अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित व्यक्तियों के निलंबन, हटाने या उनके द्वारा रिक्त पदों को भरने के संबंध में हरियाणा नगरपालिका (दूसरे संशोधन) अधिनियम  2019 से पहले चुने गए लोगों को नियंत्रित किया जा सके।

उधर, मंत्रिमंडल की बैठक में अक्तूबर, 2018 के चौथे दिन से पहले चुने गए मेयर की नियुक्ति, हटाने या निलंबन को नियंत्रित करने वाली शर्तों के संबंध में हरियाणा नगर पालिका अधिनियम,1994 की धारा-421 में संशोधन के लिए अध्यादेश या विधेयक लाने की स्वीकृति प्रदान की गई। यह संशोधन अध्यादेश अक्तूबर, 2018 के चौथे दिन से लागू माना जाएगा।

संशोधन के अनुसार ‘हरियाणा नगर निगम (दूसरे संशोधन) अधिनियम, 2018 में कुछ भी शामिल होने के बावजूद, हरियाणा नगर निगम (दूसरे संशोधन) अधिनियम 2018 के लागू होने से पहले नगर निगम के मेयर के रूप में चुने गए व्यक्तियों की नियुक्ति, हटाने या निलंबन के लिए या ऐसे व्यक्तियों द्वारा खाली किए गए किसी भी पद को भरना हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के संबंधित प्रावधानों द्वारा शासित होना जारी रहेगा।

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