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शोध में खुलासा: कोविड ठीक होने के बाद फेफड़े और मानसिक स्थिति पर डाल रहा दुष्प्रभाव, 145 मरीजों का हुआ अध्ययन

Wed, 16 Feb 2022 05:33 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 16 Feb 2022 05:33 PM IST
सार

अध्ययन में शामिल 93 पोस्ट कोविड मरीजों की 6 मिनट वॉक टेस्ट की रिपोर्ट निराशाजनक थी। उनमें ऑक्सीजनक का स्तर व फेफड़ों की स्थिति सामान्य से कई गुना कम थी। 

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Effects on lungs and mental health after recovering from covid
फेफड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना ठीक होने के बाद भी शरीर के साथ मन पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। इसकी पुष्टि पीजीआई के विशेषज्ञों द्वारा आईसीयू से ठीक होकर लौटे पोस्ट कोविड मरीजों पर किए गए शोध से पता चला है। शोध में कोरोना के ठीक हो चुके मरीजों के फेफड़े तो प्रभावित मिले ही, साथ ही उनकी मानसिक स्थिति पर भी दुष्प्रभाव दिखने को मिला। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट कोविड मरीजों को अपने फॉलोअप को लेकर बेहद गंभीर रहने की जरूरत है, क्योंकि संक्रमण ठीक होने के बाद भी उनकी स्थिति चिंताजनक ही रहती है। पीजीआई का यह शोध अंतरराष्ट्रीय जरनल क्यूरियस में प्रकाशित हुआ है। 

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शोध में शामिल पीजीआई एनीस्थिसिया विभाग के डॉ. अमर ज्योति हजारिका ने बताया कि दूसरी लहर के बाद मई से जुलाई 2021 के बीच कोविड अस्पताल से डिस्चार्ज हुए 145 मरीजों का तीन महीने बाद फॉलोअप किया गया। उनसे संपर्क किया गया तो 31 की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला। उनमें से 21 की मौत हो चुकी थी। 
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अंत में 93 मरीजों पर शोध किया गया। शोध में शामिल उन 93 पोस्ट कोविड मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर, फेफड़ों की स्थिति के साथ ही तनाव का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। वहीं शोध में शामिल एनीस्थिसिया विभाग के ही डॉ. अजय सिंह ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों का फॉलोअप कर एक बात साफ हो गई कि कोविड ठीक होने के बाद क्वालिटी लाइफ नहीं मिल पाती। ऐसे में पोस्ट कोविड मरीजों को लगातार फॉलोअप करवाना चाहिए।

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छह मिनट वॉक टेस्ट ने बताया फेफड़े का हाल 
डॉ. अजय ने बताया कि ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल कर अपने ऑक्सीजन लेवल को रिकॉर्ड करें। ऑक्सीमीटर को अपनी अंगुली से जोड़कर लगातार 6 मिनट तक कमरे में घूमें और रीडिंग देखते रहें। फिर छह मिनट तक टहलने के तुरंत बाद अपने ऑक्सीजन का स्तर रिकॉर्ड करें। ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से कम आना खराब स्थिति की ओर संकेत करता है।

सर्वे इनडेक्स: मनोदशा भी व्यापक स्तर पर प्रभावित 
ठीक वैसे ही अध्ययन में शामिल उन पोस्ट कोविड मरीजों की मनोदशा का आकलन करने के लिए उनसे एक इनडेक्स भरवाया गया, जिसमें उनके तनाव के स्तर को जांचने के लिए अलग-अलग तरीके से सवाल पूछे गए। उस इनडेक्स की रिपोर्ट भी संतोषजनक नहीं थी, जिससे साफ हो रहा है कि कोविड ठीक होने के बाद भी शरीर और मन को व्यापक स्तर पर प्रभावित करता है। 

डॉ. अजय का कहना है कि इस स्थिति के सामने आने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि पोस्ट कोविड मरीजों का व्यापक स्तर पर फॉलोअप होना जरूरी है, क्योंकि उसके जरिए पोस्ट कोविड होने वाले दुष्प्रभावों का आकलन कर उससे बचाव के उपाय किए जा सकेंगे। 

आईसीयू के गंभीर मरीजों पर कोरोना के दूरगामी प्रभाव का आकलन करने के लिए ठीक हो चुके मरीजों पर अध्ययन किया गया। परिणाम चौंकाने वाले हैं। कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद भी उन पर उसका व्यापक दुष्प्रभाव देखने को मिला। उनके फेफड़े पहले जैसे नहीं हो सके, वहीं उनकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी। -प्रो. जीडी पुरी, डीन एकेडमिक पीजीआई 

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