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#हिंदीहैंहमः: शिक्षाविद् बोले- हिंदी भाषा को विकसित करने का सराहनीय कदम
Sun, 16 Aug 2020 04:54 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 16 Aug 2020 04:54 PM IST
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जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी दलीप सिंह, प्रो. पवन गर्ग।
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केंद्र सरकार द्वारा हिंदी भाषा के स्तर को ऊचां उठाने के लिए नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा पर अधिक बल दिया गया है। वहीं हिंदी भाषा के शिक्षाविदों का कहना है कि हिंदी भारत की राजभाषा है। इसको राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए सरकारी कार्यालयों से लेकर प्राइवेट क्षेत्र में हिंदी भाषा का जरूरी होना चाहिए।
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समय समय पर दिए जाते है निर्देश
जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी दलीप सिंह ने बताया कि सरकार ने क्षेत्रीय भाषा पर बल दिया है न कि हिंदी भाषा पर। हिंदी हमारी राजभाषा है सरकार द्वारा हिंदी भाषा को विकसित रूप देने के लिए समय समय पर निर्देश दिया जाता है।
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हिंदी भाषा को विकसित करने का प्रयास
प्रिंसिपल पवन गर्ग ने बताया कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। हम हिंदुस्तानियों को हमारी हिंदी भाषा को ही विकसित करना चाहिए। सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में भी हिंदी भाषा कोविकसित करने का प्रयास किया गया है। प्राथमिक शिक्षा तक बच्चों का हिंदी भाषा में पढ़ाने का बल दिया गया है।
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प्रो. पंकज सेतिया और प्रो. रविंद्र कुमार।
हिंदी भाषा को भूलते जा रहे
प्रो. पंकज सेतिया ने बताया कि हिंदी भाषा हमारी मातृ भाषा है। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी कोर्स में एक विषय हिंदी का जरूर होना चाहिए। वर्तमान समय में हिंदी को भूलते जा रहे है। यदि हमारे देश में हमारी पकड़ हिंदी भाषा पर नहीं है तो हमारे देश की पहचान भी आशंका में है।
जो हम बोलते है वहीं लिखते है
प्रो. रविंद्र कुमार का कहना है कि कुछ विद्यार्थी अपनी मातृ भाषा में पहले ही पिछड़ जाते हैं उनके लिए सबसे अच्छा काम हो गया। उनको अपनी मातृ भाषा में ही काम करने का अवसर मिलेगा। हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है जो हम बोलते हैं वहीं हम लिखते है।