पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता, हाईकोर्ट का बड़ा झटका
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पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक योग्यता तय किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार करते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्तूबर को होगी। यानी उस समय तक प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका होगा।
राज्य सरकार की ओर से सरपंच पद के लिए दसवीं पास की शर्त पर पक्के तौर पर मुहर लगाने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर पंचायती राज एक्ट में किए संशोधन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इससे पहले अध्यादेश को चुनौती दी गई थी और हाईकोर्ट ने शैक्षिक योग्यता पर रोक लगाई थी।
इस मामले में सोमवार को बहस होनी है। इसी बीच अध्यादेश खत्म कर एक्ट बना दिया गया है और अब इसे भी चुनौती दी गई है। हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया गया है। इस मामले की सुनवाई भी सोमवार को पहले से चल रही याचिका के साथ ही होगी।
याचिका में शैक्षणिक योग्यता निर्धारण पर उठे थे सवाल
हिसार के गांव मुल्कान की वेदवंती ने एडवोकेट मनजीत सिंह के माध्यम से याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि सरकार ने पंचायती राज एक्ट 1994 में संशोधन के लिए एक्ट बना कर उसके जैसे कई लोगों को सरपंच का चुनाव करने से अयोग्य बना दिया है।
एक्ट में पुरुष वर्ग के लिए 10वीं और महिला एवं अनुसूचित जाति के लिए आठवीं की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करना गलत है। रिप्रेजेंटेटिव ऑफ पब्लिक सर्विस एक्ट में चुनाव लड़ने की कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है और पिछले लंबे समय से पंचायती राज एक्ट के तहत भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
यह भी कहा गया कि पंचायती राज एक्ट सभी वर्गों में समानता लाने और पंचायतों को मजबूत करने के लिए बना है, लेकिन अभी तक महिलाओं व अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व उतना सशक्त नहीं हो सका है।
शौचालय की शर्त को भी चुनौती दी गई थी
उधर, शैक्षणिक योग्यता निर्धारण करने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि पहले से ही कई शर्तों के तहत जन प्रतिनिधियों को अयोग्य करार देने का प्रावधान मौजूद है। शैक्षिक योग्यता के साथ ही शौचालय होने की शर्त को भी चुनौती दी गई है। कहा है कि अभी तक गांवों में मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं।
कई गरीबों के पास शौचालय निर्माण को पैसे तक नहीं हैं, ऐसे में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए यह शर्त रखना गलत है। यह भी कहा था कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव या नगर निकाय चुनावों के लिए शैक्षणिक योग्यता का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में पंचायत, ब्लॉक समिति व जिला परिषद में ऐसी शर्त निर्धारित करना गलत है।
वैसे भी वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से हरियाणा में साक्षरता दर 67 प्रतिशत है, लेकिन इसमें वह व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्हें केवल हस्ताक्षर करना ही आता है, क्योंकि साक्षरता दर के मापदंड में केवल हस्ताक्षर करना होना ही साक्षर होने के लिए अनिवार्य है।