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'दोस्ती' बनेगी दिव्यांग विद्यार्थियों का सहारा, सिखाया जाएगा- कैसे रखें अपने मित्र का ख्याल

Fri, 31 Jan 2020 11:49 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 31 Jan 2020 11:49 AM IST
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Education Department Haryana Special Project for Disable Students
प्रतीकात्मक तस्वीर
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे.. ये गीत तो सभी ने सुना ही होगा, लेकिन अब इस गीत के शब्दों की तरह दोस्ती निभाने वाले दोस्त अपने दिव्यांग मित्र का सहारा बनेंगे। दिव्यांग दोस्त की मदद के लिए सहपाठियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि किस तरह से उनकी शारीरिक और मानसिक रूप से मदद करें और प्रतिभा को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएं। शिक्षा विभाग द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत यह पहल की जा रही है।
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7 फरवरी से प्रदेश में ये कार्यक्रम शुरू होगा, जिसमें शिक्षा और विस्तार, सरकार की ओर से दी गईं सुविधाओं, विभिन्न प्रमुख दिव्यांग लोगों के बारे में संक्षिप्त जानकारी, उनके अधिकार, कक्षा और समाज में सहकर्मी छात्रों की भूमिका, नाटिका के माध्यम से भेदभाव के बारे में जागरूकता के बारे में बताया जाएगा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब डेढ़ लाख दिव्यांग विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
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यह है उद्देश्य
अक्सर देखा जाता है कि दिव्यांगता के कारण छात्र खुलकर परेशानी बता नहीं पाते और न ही छुपी प्रतिभा को उभार पाते हैं। ऐसे में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों की मदद के लिए सम्रग शिक्षा अभियान(एसएसए) के तहत ‘दिव्यांग छात्रों के साथी’ कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसमें दिव्यांग छात्रों के 2 से 3 साथियों को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
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करनाल समेत 119 खंडों में कार्यक्रम

सात फरवरी को प्रॉजेक्ट के तहत करनाल समेत प्रदेश के 119 खंडों में दिव्यांग छात्रों के सहपाठियों के लिए सुबह 10 से शाम 4 बजे तक कार्यक्रम होगा। इसके लिए विभाग की ओर से फंड भी जारी किया गया है। एक दिन के कार्यक्रम के लिए 119 ब्लॉक में 7.95 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। यानी 6700 रुपये प्रत्येक खंड में खर्च होंगे।

दिव्यांग छात्रों को मिलेगी मदद
-शैक्षणिक, सामाजिक, मनोरंजन क्षेत्र और प्रतिभा निखरेगी।
-सरकारी योजनाओं व अन्य गतिविधियों के बारे में जान सकेंगे।
-घर की समस्याओं को शेयर कर पाएंगे और शिक्षा विभाग मदद कर पाएगा।
-स्कूल से घर के सफर के दौरान की समस्याओं से छात्र उभर पाएंगे।
-दिव्यांग छात्रों को उनकी रूची के अनुसार प्लैटफॉर्म मिल पाएगा।

स्पेशल बच्चों के लिए यह एक नई शुरुआत है। इससे वे खुद को समाज का हिस्सा समझेंगे और प्रतिभा का बेहतर आकलन हो सकेगा। पहली से 12वीं तक के छात्रों के लिए शुरुआत की जा रही है।
- सपना जैन, जिला परियोजना अधिकारी, सम्रग शिक्षा अभियान, करनाल
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