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ईडी की कार्रवाई: टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री आशू के करीबी राजदीप सिंह नागरा की 22.78 करोड़ की संपत्ति जब्त
Sat, 28 Sep 2024 08:29 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 28 Sep 2024 08:29 AM IST
सार
ईडी द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि घोटाले के वक्त भारत भूषण शर्मा उर्फ आशु पंजाब सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री थे।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
पंजाब में दो हजार करोड़ के टेंडर घोटाला मामले में ईडी जालंधर की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने शुक्रवार को कांग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के करीबी राजदीप सिंह नागरा की 22.78 करोड़ रुपये की अच-अचल संपत्ति जब्त की।
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने लुधियाना, मोहाली और खन्ना में एक घर, शॉपिंग काम्पलेक्स और अन्य अचल संपत्तियां अटैच की। अचल संपत्तियों में ईडी ने एफडीआर, सोने के गहने, बूलियंस और बैंक अकाउंट की संपत्ति अटैच की है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 22.78 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जोकि टेंडर घोटाले की रकम से तैयार की गई थी। ईडी की टीम पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू और राजदीप सिंह नागरा के करीबीयों और उन कॉन्ट्रैक्टरों की कुंडली खंगाल रही है, जिनके जरिए टेंडर के घोटाले की रकम को ब्लैक से व्हाइट किया गया।
बता दें राजदीप सिंह नागरा को ईडी की टीम ने बीते पांच सितंबर को लुधियाना से दबोचा था, रिमांड के दौरान टीम को घोटाले के पैसे से तैयार की संपत्तियों के बारे में पता चला।
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ईडी द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि घोटाले के वक्त भारत भूषण शर्मा उर्फ आशु पंजाब सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री थे। ईडी ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग में टेंडर घोटाले से संबंधित आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत सतर्कता ब्यूरो, पंजाब द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला है कि तत्कालीन मंत्री भारत भूषण आशु ने टेंडर आवंटन में चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और उन्हें अधिक लाभ का वादा किया। जिससे राजदीप सिंह नागरा, राकेश कुमार सिंगला और पंजाब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कुछ सरकारी अधिकारियों सहित अन्य व्यक्तियों के माध्यम से उनसे रिश्वत ली गई। रिश्वत के पैसे को फर्जी संस्थाओं के नेटवर्क का उपयोग करके चल और अचल संपत्तियां खरीदने के लिए आगे बढ़ाया गया।
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प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने लुधियाना, मोहाली और खन्ना में एक घर, शॉपिंग काम्पलेक्स और अन्य अचल संपत्तियां अटैच की। अचल संपत्तियों में ईडी ने एफडीआर, सोने के गहने, बूलियंस और बैंक अकाउंट की संपत्ति अटैच की है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 22.78 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जोकि टेंडर घोटाले की रकम से तैयार की गई थी। ईडी की टीम पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू और राजदीप सिंह नागरा के करीबीयों और उन कॉन्ट्रैक्टरों की कुंडली खंगाल रही है, जिनके जरिए टेंडर के घोटाले की रकम को ब्लैक से व्हाइट किया गया।
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बता दें राजदीप सिंह नागरा को ईडी की टीम ने बीते पांच सितंबर को लुधियाना से दबोचा था, रिमांड के दौरान टीम को घोटाले के पैसे से तैयार की संपत्तियों के बारे में पता चला।
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ईडी द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि घोटाले के वक्त भारत भूषण शर्मा उर्फ आशु पंजाब सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री थे। ईडी ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग में टेंडर घोटाले से संबंधित आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत सतर्कता ब्यूरो, पंजाब द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला है कि तत्कालीन मंत्री भारत भूषण आशु ने टेंडर आवंटन में चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और उन्हें अधिक लाभ का वादा किया। जिससे राजदीप सिंह नागरा, राकेश कुमार सिंगला और पंजाब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कुछ सरकारी अधिकारियों सहित अन्य व्यक्तियों के माध्यम से उनसे रिश्वत ली गई। रिश्वत के पैसे को फर्जी संस्थाओं के नेटवर्क का उपयोग करके चल और अचल संपत्तियां खरीदने के लिए आगे बढ़ाया गया।