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ईडी डिप्टी डायरेक्टर के ट्रांसफर रोक मामले में प्रशासन ने दाखिल किया जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:45 AM IST
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Central Administrative Tribunal
- फोटो : File Photo
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प्रवर्तन निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर गुरनाम सिंह की ट्रांसफर के आदेश पर रोक संबंधी याचिका पर सोमवार को यूटी काउंसिल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में जवाब दाखिल किया। ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता को इस पर जवाब के लिए 20 जनवरी तक का समय दिया है। साथ ही उनके ट्रांसफर पर यथास्थिति को उक्त तिथि तक बरकरार बनाए रखा है।
यूटी काउंसिल की ओर से दाखिल जवाब में कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं और न ही यह मेंटेनेबल है। क्योंकि याचिकाकर्ता का पांच साल का कार्यकाल एक जनवरी 2017 को पूरा हो चुका है। वहीं, मिनिस्ट्री ऑफ पर्सोनल की ओर से 17 फरवरी 2016 को जारी आदेश के तहत किसी भी विभाग में अधिकतम डेपुटेशन पांच साल के लिए दी जा सकती है। इसके बाद एक्सटेंशन नहीं दी जा सकती। सिर्फ पब्लिक हित में एक्सटेंशन दी जा सकती है। उसके लिए भी मंत्रालय के मिनिस्टर की मंजूरी जरूरी है।
वहीं, इस मामले में पांच साल की सर्विस के बाद इसमें एक्सटेंशन देने का ऐसा कोई पब्लिक हित नजर नहीं आता। याचिकाकर्ता की ओर से उनके ट्रांसफर से पंजाब में हजारों करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट की जांच प्रभावित होने की बात कही गई थी। इस पर यूटी काउंसिल की ओर कहा गया कि याचिकाकर्ता के पास ऐसे किसी मामले की जांच नहीं है। जवाब में कहा गया कि विभाग की ओर से याचिकाकर्ता को उनकी प्रेजेंटेशन और उनके काम की परफार्मेंस के बाद चुना गया था। वहीं विभाग ने 06 जनवरी 2017 को तय किया कि याचिकाकर्ता की एक्सटेंशन याचिका को प्रोसेस नहीं किया जा सकता।
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यूटी काउंसिल की ओर से दाखिल जवाब में कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं और न ही यह मेंटेनेबल है। क्योंकि याचिकाकर्ता का पांच साल का कार्यकाल एक जनवरी 2017 को पूरा हो चुका है। वहीं, मिनिस्ट्री ऑफ पर्सोनल की ओर से 17 फरवरी 2016 को जारी आदेश के तहत किसी भी विभाग में अधिकतम डेपुटेशन पांच साल के लिए दी जा सकती है। इसके बाद एक्सटेंशन नहीं दी जा सकती। सिर्फ पब्लिक हित में एक्सटेंशन दी जा सकती है। उसके लिए भी मंत्रालय के मिनिस्टर की मंजूरी जरूरी है।
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वहीं, इस मामले में पांच साल की सर्विस के बाद इसमें एक्सटेंशन देने का ऐसा कोई पब्लिक हित नजर नहीं आता। याचिकाकर्ता की ओर से उनके ट्रांसफर से पंजाब में हजारों करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट की जांच प्रभावित होने की बात कही गई थी। इस पर यूटी काउंसिल की ओर कहा गया कि याचिकाकर्ता के पास ऐसे किसी मामले की जांच नहीं है। जवाब में कहा गया कि विभाग की ओर से याचिकाकर्ता को उनकी प्रेजेंटेशन और उनके काम की परफार्मेंस के बाद चुना गया था। वहीं विभाग ने 06 जनवरी 2017 को तय किया कि याचिकाकर्ता की एक्सटेंशन याचिका को प्रोसेस नहीं किया जा सकता।
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