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अर्थशास्त्री बोले- यह बजट अर्थव्यवस्था को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

Tue, 01 Feb 2022 11:52 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 11:52 PM IST
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Economist said - this budget will play an important role in improving the economy
चंडीगढ़। बजट सरकार और हर नागरिक की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। केंद्रीय बजट 2022-23 कोरोना महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह बजट रोजगार पैदा करने और कृषि अर्थव्यवस्था को सुधारने की ओर एक अच्छा कदम माना जा सकता है। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने से आम आदमी को मायूसी जरूर हुई है। व्यक्तिगत करदाताओं को उम्मीद थी कि महामारी व महंगाई के दौर में शायद उन्हें कोई राहत मिलेगी।
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बजट में पीएम आवास योजना के तहत 80 लाख घरों के निर्माण, हर घर नल योजना का विस्तार, 60 लाख नए रोजगार का सृजन, लघु उद्योगों को छह हजार करोड़ देने की योजना, एमएसपी का भुगतान सीधे किसानों के खाते में देने की योजना, जैविक खेती को बढ़ावा देने, खेतों के कागजात का डिजिटलीकरण आदि सराहनीय कदम हैं। कुल मिलाकर यह बजट कृषि व रोजगार पर आधारित है। यहां आत्मनिर्भर भारत से 16 लाख नौकरियां देने की बात कही गई है। किसानों को एमएसपी के लिए 2.7 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गेहूं व धान की खरीद के लिए भी 2.37 लाख करोड़ रुपये का भी भुगतान करेगी। बजट का फोकस ग्रोथ व इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करने, रोजगार सृजन करना है। बजट में रोजगार, मकान, लघु उद्योग और शिक्षा आदि में बड़ी घोषणाएं आत्मनिर्भर भारत अभियान को और सशक्त करेगा।
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-डॉ. तिलक राज, अर्थशास्त्री, पीयू
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जानिए बजट पर क्या है राजनेताओं और व्यापारियों की राय
प्रौद्योगिकी में पहचान बना रहा भारत
पहली बार संसद में पेश पेपरलेस बजट उस देश की विचार प्रक्रिया का संकेत देता है, जो दुनिया भर में प्रौद्योगिकी में अपनी पहचान बना रहा है। डिजिटल रुपया का परिचय, ई-विश्वविद्यालय, ई-पासपोर्ट आदि भविष्य के भारत की दिशा में बड़े कदम हैं। बजट का मुख्य आधार देश के आत्मनिर्भर भारत और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इसका समर्थन है।
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-अरुण सूद, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
लोगों पर बोझ डाले बिना लाया गया बजट
केंद्र सरकार ने जो बजट बनाया है, उसमें कोई बोझ नहीं डाला गया है। नगर निगम के बजट में भी शहर के विकास कार्यों को ध्यान में रखा गया है। राजस्व को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। लोगों को मिलने वाली सुविधा भी ध्यान में रखी गई है। इससे लोगों को कहीं कोई कमी नहीं आएगी।
-सरबजीत कौर, मेयर
चंडीगढ़ के लोगों के लिए निराशाजनक बजट
सरकार ने मान लिया है कि उसके पास फंड नहीं है और भाजपा रोजगार देने में पूरी तरह असफल रही है। इसलिए 60 लाख रोजगार देने का प्रावधान किया है। गांव के लिए कोई फंड नहीं है। अर्थव्यवस्था खराब है। शहर के मुख्य मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसका भुगतान शहर की जनता को करना पड़ेगा।
-सुभाष चावला, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
अमीरों की हितैषी है भाजपा, उसके अनुरूप आया बजट
भाजपा सिर्फ अमीरों की हितैषी है। आम जनविरोधी बजट है यह। पिछले कई साल से मध्यम वर्गीय आयकरदाता कर मुक्त आय की सीमा बढ़ने की आस में बैठे हैं। पिछले दो साल में कोरोना काल ने सबसे ज्यादा इसी वर्ग को प्रभावित किया है, फिर भी मध्यम वर्गीय परिवार की कोई चिंता नहीं की गई।
-प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश सह प्रभारी, आम आदमी पार्टी
गंभीर बीमारी के बावजूद नहीं हुई कोई बढ़ोतरी
करोना महामारी के बावजूद किसी प्रकार के कर में वृद्धि नहीं की गई है। देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बजट है। इसमें हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। आयकर रिटर्न को 2 वर्षों तक सुधारने की व्यवस्था की गई है, जो ऐतिहासिक कदम है। सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के लिए एएमटी को घटाया गया है।
-कैलाश जैन, अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल
रसहीन बजट आया इस बार
पांच राज्यों में हो रहे चुनाव को देखते हुए लगा था कि कोई लॉलीपाप दिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वास्तविकता में यह रसहीन बजट था। पुराने बजट का कोई रिव्यू ही नहीं करता है कि उसके कितने काम पूरे हुए। इस कारण पैदा होने वाले हर बच्चे पर कर्ज बढ़ रहा है। दूरगामी परिणामों को देखते हुए बजट बनना चाहिए था।
प्रेम गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी
चंडीगढ़ को 200 करोड़ अधिक मिले
यह बजट चंडीगढ़ के लिए काफी अच्छा रहा है। पिछले साल से 200 करोड़ अधिक मिले हैं। महामारी के बावजूद कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। सभी वर्गों को ध्यान में रखकर इस बार का बजट लाया गया है। कृषि और शिक्षा में कोई बोझ नहीं डाला गया है।
-सत्यपाल जैन, पूर्व सांसद, भाजपा
भाजपा ने पेश किया लालीपॉप बजट
प्रशासन ने वित्त मंत्रालय से 5836 करोड़ की मांग की थी, जबकि उन्हें 454 करोड़ कम मिले हैं। ऐसे में विकास कार्य कैसे होंगे। अब फंड की आपूर्ति के लिए लोगों पर नया कर लगाकर वसूला जाएगा। सरकार ने लालीपॉप दिया है। नौजवान, मजदूर सहित आम लोगों को काफी निराशा हुई है।
-हरमेल केसरी, महासचिव, कांग्रेस
बस दस्तावेज दे दिए सरकार ने
बजट के नाम पर सरकार ने बस दस्तावेज दे दिए हैं। बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों को राहत दी गई है, लेकिन छोटे व्यापारियों के नाम पर कुछ नहीं दिया गया है। वास्तविकता में सरकार ने मान लिया है कि अर्थव्यवस्था गड़बड़ है। रोजगार के साथ आम आदमी को राहत देने में विफल हैं।
-नरेंद्र सिंह रिंकू, व्यापारी
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बजट पर यह है डॉक्टरों की राय
ज्यादा बजट आवंटित होने की उम्मीद रह गई अधूरी
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में भारत विश्व में 189वें स्थान पर है। इस बार बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मेंटल हेल्थ के अलावा और कोई भी ऐसी बड़ी घोषणा नहीं की गई है जो इस महामारी के दौर में जरूरी हो। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम तीन प्रतिशत स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया जाना चाहिए था।
-डॉ. संदीप धवन, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष
आयुष्मान योजना का होना चाहिए था विस्तार
महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य के बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद थी। उद्योग जगत की ही तरह स्वास्थ्य क्षेत्र को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए था। कर में रियायत, चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात शुल्क में कमी, आयुष्मान योजना के लिए बजट आवंटन में वृद्धि व अन्य दरों में संशोधन की उम्मीद थी। ऐसा करके ज्यादा निजी अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा सकता था, लेकिन इनमें से एक भी उम्मीद पूरी नहीं हुई।
-डॉ. वी कप्पल, आईएमए अध्यक्ष
मेंटल हेल्थ को लेकर की गई घोषणा स्वागत योग्य
महामारी के इस दौर में हमें इस बार के बजट में कुछ विशेष घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुछ खास नजर नहीं आया। मेंटल हेल्थ पर की गई घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन स्वास्थ्य को सर्व सुलभ बनाए जाने के लिए छोटे नर्सिंग होम और डॉक्टरों के लिए भी रियायत के लिए घोषणा की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया है। -डॉ. गुरप्रीत सिंह, चेयरमैन इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव
प्राइमरी और प्रिवेंटिव हेल्थ पर नहीं दिया ध्यान
महामारी के कारण तनाव झेल रही देश की जनता के लिए नेशनल टेलीमेंटल हेल्थ प्रोग्राम को शुरू करने की घोषणा सभी के लिए राहत भरी है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र की नई चुनौतियों को देखते हुए और भी ज्यादा मिलने की उम्मीद थी। प्राइमरी और प्रिवेंटिव हेल्थ पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था। जो इस बार के बजट में नहीं किया गया है।
-डॉ. ममता सिंगला, कैंसर रोग विशेषज्ञ
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बजट पर यह है युवाओं की प्रतिक्रियाएं
पहले युवाओं को केवल नौकरियों की ओर ले जाया जाता था, लेकिन इस बजट में नए व्यवसाय के लिए अवसर देने की बात कही है। महामारी में कई लोग बेरोजगार हो गए थे। उनके लिए भी नौकरी/रोजगार के अवसर बनेंगे। सभी क्षेत्रों में अधिक नौकरियों के सृजन से अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार में मदद मिलने की उम्मीद है।
-महक सिंह, छात्रा
कई युवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की इच्छा रखते हैं। ई-पासपोर्ट उन युवाओं के लिए सुविधाजनक साबित होगा। यह बजट डिजिटल विश्वविद्यालयों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जो छात्रों को विश्व स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद करते हैं।
- विधि गांधी, छात्रा
शिक्षा पर पिछले 2 साल से काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। छात्रों का भी बहुत नुकसान हुआ है। यह बजट शिक्षा और कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई करेगा। नए रोजगार के अवसर के साथ युवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
- वैष्णवी गौर, छात्रा
नए बजट में 60 लाख रोजगार देने की बात की गई है। साठ लाख युवाओं को नौकरियां अगर मिलती हैं तो ही इस बजट का फायदा है। जिस देश में युवा बेरोजगार होगा, उस देश की आर्थिक स्थिति कभी नहीं सुधर सकती। इस बजट में युवाओं को नौकरियां देने से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
-इंदर दिवाकर, छात्र
बजट में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देकर, बैंकों को पोस्ट ऑफिस से जोड़कर विकास की गति को बढ़ाया है, लेकिन कोरोना की मार झेलने के बाद आयकर में राहत की उम्मीद थी। उस क्षेत्र में भी कुछ राहत मिलनी चाहिए थी।
-प्रिंस टॉक, छात्र
बजट में कई अच्छी योजनाएं सामने आई हैं। 5जी सेवा को शुरू करना और गांव-गांव में ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाना एक अच्छी योजना है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में तेजी लाना भी जनता के लिए फायदेमंद साबित होगा।

-रजत, छात्र
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बजट से शेयर मार्केट को मिला बल
बजट काफी अच्छा था। शेयर मार्केट 848 अंक उछलकर बंद हुआ। सरकार ने हर क्षेत्र को इस बजट में कुछ न कुछ दिया है। जो मार्केट को आगे बढ़ाने में मददगार होगा। यह एक प्रगतिशील बजट है। सरकार ने एक संतुलित बजट पेश किया है, जो हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
-राजीव कथूरिया, म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर
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