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भूकंप पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी : बादल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 28 Apr 2015 03:58 PM IST
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भूकंप से नेपाल, बिहार और प. बंगाल में भारी नुकसान के मद्देनजर पंजाब सरकार पीड़ितों की हर संभव मदद करेगी। प्रदेश सरकार खाद्य एवं राहत सामग्री के साथ लोगों को संकट से निकालने के लिए भी प्रयास करेगी।
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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सोमवार को उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि संकट की घड़ी में भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आना प्रत्येक पंजाबी का कर्तव्य है।
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राज्य सरकार इस भयानक प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भेजेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत व पुनर्वास प्रक्रिया में पर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने इस मामले में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करने के निर्देश भी दिए। बैठक में खाद्य एवं सिविल आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों, मुख्य सचिव सर्वेश कौशल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसके संधू, एसजीपीसी के सचिव दलमेघ सिंह भी उपस्थित थे।
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कंट्रोल रूम स्थापित
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने चंडीगढ़ में पंजाब के उन लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो कि भूकंप प्रभावित नेपाल में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली आने वाले पंजाबियों को प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि हवाई अड्डे और वहां स्थित पंजाब भवन में सहायता प्रदान कर रहे हैं। चंडीगढ़ स्थित कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0172-2740397 व 2740859 और फैक्स नंबर 2740936 है।
सुखबीर ने नेपाल के लिए लंगर की पहली खेप भेजी
चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार को नेपाल भूकंप पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की पहली खेप रवाना की। गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब, नई दिल्ली से राहत सामग्री व डिब्बा बंद भोजनके दस हजार पैकेट को रवाना करते हुए उन्होंने दोनों सिख संस्थाओं से अपील की है कि वह नेपाल में आपदा केशिकार लोगों के लिए लंगर की सेवा जारी रखें। उन्होंने कहा कि डीएसजीएमसी और एसजीपीसी की ओर से रोजाना 25-25 हजार पैकेट हवाई जहाज के जरिए नेपाल भेजे जाएंगे।
यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक नेपाल में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि डीएसजीएमसी की एक टीम पहले ही नेपाल के लिए रवाना कर दी गई है, जो वहां पर ताजा भोजन तैयार करने की संभावना के अलावा व्यवस्था की देखरेख करेगी। फिलहाल, हर रोज दस हजार से अधिक पीड़ितों के लिए लंगर डीएसजीएमसी और एसजीपीसी की ओर से तैयार किए जा रहे हैं।