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विश्व पार्किंसन दिवस: दिख रहे लक्षणों के साथ छिपे मर्ज का भी इलाज जरूरी, PGI ने शोध में किया साबित

Tue, 11 Apr 2023 05:08 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 11 Apr 2023 05:08 PM IST
सार

पार्किंसन के मरीजों में दो तरह के लक्षण होते हैं। एक मोटल और दूसरा नॉन मोटल। मोटल वाले लक्षणों में मरीज की धीमी रफ्तार, हाथ पर काबू न होना, काम करने की गति धीमी जैसे लक्षण शामिल हैं जबकि नॉन मोटल में अवसाद, घबराहट, चिड़चिड़ापन, कब्ज और याददाश्त कम होना है।

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During Parkinson treatment hidden disease is important along with visible symptoms of patient
pgi chandigarh

विस्तार

पार्किंसन के इलाज के दौरान मरीज के दिखने वाले लक्षणों के साथ छिपे मर्ज का भी उपचार बेहद जरूरी है। क्योंकि छिपे मर्ज को नजरअंदाज करने से दिमाग के सर्किट तेजी से प्रभावित होते हैं। इसके प्रभाव से इलाज का असर भी धीमा हो जाता है जबकि मरीज की छिपी हुई परेशानियों को कम कर उसे तेजी से राहत पहुंचाई जा सकती है। पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. साहिल मेहता ने इसे शोध से साबित किया है। इस शोध को न्यूरोलॉजी इंडिया जर्नल ने स्वीकृति दी है।
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डॉ. साहिल ने बताया कि पार्किंसन के मरीजों में दो तरह के लक्षण होते हैं। एक मोटल और दूसरा नॉन मोटल। मोटल वाले लक्षणों में मरीज की धीमी रफ्तार, हाथ पर काबू न होना, काम करने की गति धीमी जैसे लक्षण शामिल हैं जबकि नॉन मोटल में अवसाद, घबराहट, चिड़चिड़ापन, कब्ज और याददाश्त कम होना है। ऐसे में जब हम दिखने वाली परेशानी का इलाज शुरू कर देते हैं तब न दिखने वाले लक्षण मरीज पर तेजी से हावी होने लगते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त 100 मरीजों पर शोध किया गया। इसमें 62 पुरुष 38 महिलाएं शामिल थीं। उनकी उम्र 50 से 60 साल के बीच थी। उनमें मर्ज की समायावधि सात साल की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि उन सभी में कोई न कोई नॉन मोटल परेशानी पाई गई। 95 प्रतिशत को नींद संबंधी परेशानी थी, जबकि 75 प्रतिशत को यूरिन, 76 प्रतिशत को गैस्ट्रो से संबंधित, 62 प्रतिशत को अवसाद था। 
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बुजुर्ग के साथ अब युवा भी आ रहे चपेट में
डॉ. साहिल ने बताया कि चिंता की बात यह है कि बुजुर्गावस्था का मर्ज जाने जाने वाले पार्किंसन से अब युवा भी ग्रस्त हो रहे हैं। 60 साल के पार के बजाय अब 40 साल के व्यक्ति भी इसकी शिकायत लेकर आ रहे हैं। डॉ. साहिल के अनुसार इसका एक मुख्य कारण हमारी अनियमित जीवनचर्या भी है। क्योंकि हमारे क्रिया-कलाप का असर सीधे तौर पर दिमाग और उससे निकलने वाले हारमोन पर पड़ता है। यह दिमाग के संपर्क को मजबूत करता है। ऐसे में इस मर्ज से बचाव के लिए योग, आसन, एरोबिक्स, साइकिल चलाना या फिर ट्रेडमिल का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि इसे न्यूरोप्रोटेक्टिव एक्टिविटी माना जाता है।
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पार्किंसन ऐसे लेता है चपेट में
पार्किंसन मूवमेंट संबंधी एक विकार है, जिसमें हाथ या पैर से दिमाग तक पहुंचाने वाली नसें या तंत्रिका काम करने में असमर्थ हो जाती है। इसमें व्यक्ति का हाथ पैर से नियंत्रण बहुत कम हो जाता है। आमतौर पर जब दिमाग को संदेश देने वाला डोपामाइन का स्तर कम हो जाता है तब यह बीमारी होती है। वैसे इसके अन्य भी कारक जिम्मेदार हैं।


पार्किंसन के कुछ सामान्य लक्षण
- इसके बढ़ने की दर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है।
- हथेली, बाजू, पैर, जबड़े या सिर का कांपना
- मांसपेशियों में अकड़न, जहां मांसपेशियां लंबे समय तक सिकुड़ी रहती हैं
- गतिविधि में धीमापन
- बिगड़ा हुआ संतुलन, जो कभी-कभी व्यक्ति के गिरने का कारण बनता है
- अवसाद और भावनात्मक बदलाव

ये भी जानें
पार्किंसंन डिसीज के लक्षण अक्सर शरीर के एक तरफ या एक अंग से शुरू होते हैं। जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता है वैसे-वैसे यह शरीर के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को प्रभावित करने लगता है। जकड़न और कंपकंपी का अनुभव करने से पहले, रोगी को नींद की समस्या, कब्ज, सूंघने की क्षमता में कमी और पैरों में बेचैनी की समस्या भी हो सकती है। 

ये मरीज को देता है राहत
-चलने और बोलने में कठिनाई के लिए कुछ थैरेपी, जिसकी मदद से चलने और आवाज निकलने जैसी समस्या में राहत मिल सकती है।
-शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए पोषक आहार
-मांसपेशियों को मजबूत, संतुलित और लचीला बनाने के लिए व्यायाम
-तनाव कम करने के लिए मसाज थैरेपी

मर्ज का खतरा इन्हें ज्यादा
- 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग
- महिलाओं की तुलना में पुरुषों को
- पार्किंसन रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोग
- पोस्टमेनोपॉज महिलाएं जिनमें एस्ट्रोजन का स्तर बहुत कम हो
- विटामिन बी की कमी से पीड़ित
- जिन लोगों को सिर में चोट लगी है

 
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