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कोरोना संकट : सब्जी बेच रहे बैंड-बाजा के कारोबारी, पिछले साल भी बुकिंग रद्द हुई, इस बार भी जीरो कमाई
Mon, 17 May 2021 06:02 PM IST
निवेदिता वर्मा
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 17 May 2021 06:02 PM IST
सार
चंडीगढ़ में करीब 50 बैंडवाले हैं। लॉकडाउन के कारण हर बैंड मालिक को करीब पांच से 15 लाख रुपये तक का घाटा हो चुका है।
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सब्जी बेचते बैंड मालिक।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
कोरोना संकटकाल में लागू लॉकडाउन में शादियां तो कई हुईं, लेकिन बैंड-बाजा कहीं नजर नहीं आया। जो बुकिंग हुई थी, वो भी रद्द हो गई। इस सीजन भी कमाई न के बराबर हुई है। इतनी विपदाओं के बावजूद जिंदगी कभी नहीं रुकती। पेट पालने के लिए कुछ तो करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ इस समय बैंड-बाजे वाले कर रहे हैं। वे कारोबार बंद होने के कारण सब्जी बेचने को मजबूर हो गए हैं। कुछ मजदूरी कर रहे हैं तो कुछ किराए पर गाड़ी लेकर ड्राइवर बने हुए हैं।
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ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था
शादियों के सीजन में कमाई काफी होती थी। हमारा तो दो सालों में कुल मिलाकर करीब 15 लाख रुपये का घाटा है। इसे कैसे पूरा किया जाएगा। सोचकर परेशान होता हूं। घर का खर्च नहीं चलने पर सब्जी की रेहड़ी लगा ली है। बच्चे तो पालने हैं। बहुत ही कठिन समय आ गया है। ऐसा समय तो सपने में भी नहीं सोचा था। सरकार हमारे लिए भी कुछ सोचे। -संत ताल डबाला, मालिक कैपिटल ब्रास बैंड
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जल्द ही कोई दूसरा काम देखना पड़ेगा
पिछले वर्ष भी काम नहीं हुआ। गर्मी के दिनों में शादियां होती हैं। कोविड के कारण कई प्रतिबंध हैं। ऐसे में लोगों ने बुक कराया बैंड रद्द कर दिया है। समझ में नहीं आ रहा कि क्या किया जाएगा। पूरे साल परिवार का खर्च कैसे चलेगा। दुकान का किराया भी देना है। रात की नींद और दिन का चैन गायब हो गया है। एक सप्ताह और देखते हैं, वरना हमें भी कुछ और काम करना होगा। -विजय गोदियाल, मालिक, मिलन बैंड
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भाड़े की गाड़ी चला रहा हूं
बैंड की बुकिंग रद्द होने पर आर्थिक परेशानी हो गई। परिवार को चलाने के लिए कुछ न कुछ तो करना था। इसलिए अब भाड़े की गाड़ी चला रहा हूं। इससे परिवार तो पल जाएगा। बैंडवालों के लिए बहुत ही मुश्किल का समय आ गया है। सरकार की ओर से आस भी उम्मीद लगाना बेकार है। प्रशासन की ओर से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्हें कम से कम यह तो सोचना चाहिए था कि जिनके काम धंधे बंद हैं, उनका गुजारा कैसे चल रहा है। -मदन लाल, मालिक, सरस्वती बैंड
थ्री-व्हीलर पर सब्जी बेचना शुरू किया
घाटा इतना कि पूछो मत। इसे पूरा करना बहुत ही कठिन काम है। बैंड छोड़कर सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष सीजन से पहले बैंड के सामान खरीदने में काफी पैसा खर्च कर दिया था। इसके तुरंत बाद लॉकडाउन लग गया। पिछले साल की सभी बुकिंग रद्द हो गई। इस साल भी यही हाल है। सब कुछ बर्बादी के कगार पर है। यदि कुछ हल नहीं निकला तो काफी लोग आर्थिक नुकसान से ही मर जाएंगे। -कृष्ण कुमार, मालिक कृष्णा बैंड