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अपने फैसले पर तीसरी बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी 'आप' को, जानिए कब-कब?

Thu, 29 Dec 2016 09:45 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 29 Dec 2016 09:45 AM IST
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due to lack of experience, aam admi party and arvind kejriwal feels guilty on third decision
केजरीवाल ने मांगी माफी - फोटो : facebook
इसे आम आदमी पार्टी में सियासी तजुर्बे की कमी ही कहा जा सकता है कि पार्टी को अपने फैसले पर तीसरी बार शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। पंजाब विधानसभा चुनाव में दिल्ली जैसी जीत का सपना देख रही पार्टी अपने ही फैसलों को लेकर धुरंधर विपक्षियों के निशाने पर आ जाती है। हालांकि पार्टी के नेता शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं चूक रहे,
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लेकिन चुनाव में यह तजुर्बेकार प्रतिद्वंद्वी भी आप के हर बयान और हर कदम को निरंतर तोल रहे हैं और आप पर हमले का कोई मौका खाली नहीं जाने दे रहे। इसे सभी पार्टियों की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है लेकिन इस पूरे साल के दौरान आप ने कई फैसले ऐसे भी लिए, जिनके कारण उसे शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ी और सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगनी पड़ी।
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ताजा मामला, दिव्यांग दलित नेता बंत सिंह झब्बर का है। गत रविवार को आम आदमी पार्टी ने बंत सिंह झब्बर को तो पार्टी में शामिल करने के साथ ही उन दो अपराधियों को भी पार्टी में ले लिया, जिनके कारण बंत सिंह झब्बर अपने हाथ-पैर गंवा चुका है। आप के इस फैसले को शिअद और कांग्रेस ने हाथोंहाथ लिया और आप को अपराधियों को संरक्षण देने वाली पार्टी करार देते हुए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।
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चौतरफा हमलों से घिरी आप ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए तुरंत दोनों अपराधियों को तो पार्टी से बाहर किया, मंगलवार को आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्वयं पहल करते हुए बंत सिंह से मिलकर उनसे पूरे प्रकरण के लिए माफी मांगी। अब पार्टी इस विवेचना में जुटी है कि आखिर यह गलती कैसे हुई?

तीसरी बार सार्वजनिक तौर पर मांगनी पड़ी माफी

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केजरीवाल ने मांगी माफी - फोटो : facebook
आम आदमी पार्टी के साथ ऐसा तीसरी बार हुआ है जब उसे अपना फैसला वापस लेकर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी है। जुलाई, 2016 में आप संयोजक केजरीवाल ने पंजाब में अपना मेनिफेस्टो जारी किया तो मेनिफेस्टो पर श्री दरबार साहिब के चित्र पर ही पार्टी का चुनाव चिह्न झाड़ू भी प्रकाशित कर दिया।

इस पर, सिखों की धार्मिक भावना से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस दोनों ने आप के खिलाफ मोरचा खोल दिया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी आप के इस कृत्य पर कड़ा ऐतराज जताया।

तीखे शब्द बाणों और बयानों के बीच आखिरकार केजरीवाल को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी। वे श्री दरबार साहिब में कार सेवा करने भी गए और आप ने अपने मैनिफेस्टो पर दरबार साहिब के चित्र से चुनाव चिह्न हटा लिया।

डोडा को लेकर भी मांगनी पड़ी थी माफी

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केजरीवाल ने मांगी माफी - फोटो : facebook
दूसरी बार, आम आदमी पार्टी उस समय प्रतिद्वंद्वी दलों के निशाने पर आई जब इस साल नवंबर में पार्टी ने अबोहर से ओम प्रकाश कौशिक को सदस्य बनाया। तब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने खुलासा किया कि ओम प्रकाश कौशिक शराब कारोबारी व शिअद के पूर्व हलका इंचार्ज शिव लाल डोडा का राजनीतिक सलाहकार है।

डोडा पर दिसंबर, 2015 में दलित युवा भीम टांक का कत्ल करने का इल्जाम भी है। विवाद गहराते ही आप को अपना यह फैसला भी वापस लेना पड़ा था। पंजाब में आम आदमी पार्टी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतर रही है। अब तक राज्य में शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच ही चुनावी जंग होती रही है।

खास बात यह भी है कि अब तक गठबंधन और कांग्रेस के बीच जो चुनावी बयानबाजी चरम सीमा तक पहुंच जाया करती थी, लगता है उसे भुलाकर दोनों प्रतिद्वंद्वी ज्यादा ध्यान आम आदमी पार्टी पर निशाना साधने पर लगा रहे हैं। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप की बयानबाजी भी रोचक होती जा रही है।

 
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