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डक ट्रेजडीः लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Tue, 16 Dec 2014 12:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 16 Dec 2014 12:57 PM IST
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Duck Tragedy on Sukhna Lake Chandigarh

सुखना लेक पर डक ट्रेजडी मामले में लैब रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में बतखों की मौत पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सुखना लेक पर डक ट्रेजडी रोकने के लिए अफसरों की आंख खुलने में एक सप्ताह लग गया। इस बीच 20 बतखों की मौत हो चुकी है।

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सोमवार को बतखों को बचाने के लिए 10 किलो बाजरा खरीद कर डाला गया। साथ ही उन्हें ठंड से बचाने के लिए टापू पर शैड तैयार किया जा रहा है। बतखों की मौत के संबंध में जालंधर स्थित रीजनल डिजीज डाइग्नोस्टिक लैबोरेटरी से आई रिपोर्ट को सोमवार को सार्वजनिक कर दिया गया।
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इसमें बताया गया है कि मरी हुई बतखों का पेट खाली था और ठंड की वजह से उनके लंग्स में इन्फेक्शन था। अमर उजाला ने 13 जनवरी को प्रकाशित खबर में यह खुलासा कर दिया था कि बतखों की मौत भूख और ठंड से हो रही है। अफसरों ने भी सोमवार को इसकी पुष्टि कर दी।

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मरी बतखों के सैंपल भेजे भोपाल

Duck Tragedy on Sukhna Lake Chandigarh

मौत के पीछे कोई वायरल इन्फेक्शन या अन्य कारण तो नहीं है, इसकी विस्तार की जांच के लिए अब मृत बतखों के सैंपल भोपाल लैब भेजे गए हैं। भोपाल भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट हफ्ते के आखिरी में आ जाएगी।

एक और बतख ने दम तोड़ा
सोमवार को एक और बतख ने दम तोड़ दिया था। ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी बड़ी संख्या मेंडोमेस्टिक बतखों की मौत हुई हो।

दाना डालने पर आम लोगों के लिए थी रोक
जब से माइग्रेट बर्ड्स ने सुखना लेक पर बसेरा बनाया था, तब से वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारियों ने कुछ भी खाना खिलाने पर रोक लगा दी थी।

विशेषज्ञों ने बताया कि सर्दियों में बतखों का मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है। इसलिए उन्हें ज्यादा खाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन विभाग की ओर से रोक लगाने के बाद उन्हें कम खाना मिल रहा था।

हालांकि, वाइल्ड लाइफ के कर्मचारी दाना खिलाते हैं, लेकिन वह इतना ज्यादा नहीं होता। इसलिए आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं विभाग के उठाए गए कदम से तो बतखों की जान नहीं गई?

10 मिनट में 10 किलो बाजरा चट कर गईं बतखें

Duck Tragedy on Sukhna Lake Chandigarh

बतखों के पेट खाली होने की रिपोर्ट मिलने के बाद वाइल्ड लाइफ के कर्मचारी सुबह ही आइलैंड पर पहुंचे और करीब दस किलो बाजरा डाला। बाजरा डालते ही चारों ओर से बतखें क्वैक-क्वैक करते पानी से होकर टापू पर पहुंच गईं। वे इतनी भूखीं थीं कि थोड़ी देर में ही सारा बाजरा खा गईं।

अब बतखों के लिए बन रहा शेड
जालंधर लैब की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन की आंखें खुलीं। अब ठंड से बचाने के लिए लेक  स्थित आइलैंड पर बतखों के लिए शेड बनाया जा रहा है, ताकि पाला या ठंड पड़े तो वे शेड के नीचे आकर बचाव कर सकें। कई साल पहले भी आईलैंड पर शेड बना हुआ था। सोमवार सुबह वाइल्ड लाइफ के कर्मचारी पहुंचे और शेड बनाने का काम शुरू किया।

किसी की आंखें निकलीं थीं तो किसी के मांस गायब
रविवार को आईलैंड पर मरी पाई गई कुछ बतखों की आंखें गायब थी तो किसी के मांस गायब थे। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि कोई जंगली जानवर जंगल से उतरकर लेक में आ गया हो और बतखों को नुकसान पहुंचाया हो। जंगल में कई ऐसे जानवर हैं जो लेक में तैरकर आईलैंड पर पहुंच सकते हैं।

खैरवाह नहीं रहे तो ‘लावारिस’ हो गईं बतखें

Duck Tragedy on Sukhna Lake Chandigarh

बताया जा रहा है कि लेक पर बतखों के खैरवाह हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी थे, जो बतखों के खाने-पीने से लेकर सभी चीजों का खास ध्यान रखते थे। चार से पांच महीने पहले उनकी एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई। उसके बाद से बतखों का खास खयाल रखने वाला कोई नहीं है।

कोट
जालंधर लैब से आई रिपोर्ट के अनुसार बतखों के लंग्स में इंफेक्शन था और उनके पेट खाली थे। पेट खाली होने की वजह से विशेषज्ञ किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। इसलिए आगे की जांच के लिए सैंपलों को भोपाल भेजा गया है।
- डा. लवलेश कांत गुप्ता, ज्वाइंट डायरेक्टर, एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट यूटी

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