फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Drugs are not better than life, Boys Told How They Came Out from Life of Drug Addiction

जिंदगी से बढ़कर नहीं नशा, मन में ठान लिया और निकल आए दलदल से... बदलाव की कहानियां

Fri, 26 Jun 2020 03:09 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 26 Jun 2020 03:09 PM IST
विज्ञापन
Drugs are not better than life, Boys Told How They Came Out from Life of Drug Addiction
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नशे की लत ने बसे-बसाए कई परिवारों को उजाड़ दिया। माना भी जाता है कि एक बार जो नशे की गिरफ्त में फंस गया, उसका बाहर निकलना काफी मुश्किल होता है। मेडिकल साइंस भी कहता है कि 100 में 80 लोग नशा छोड़ने के बाद दोबारा से इसके चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के अंदर इच्छाशक्ति हो तो उसके सामने कोई भी नशा नहीं टिकता। ऐसे ही कुछ लोगों की सक्सेस स्टोरी बताते हैं, जो नशे के शिकंजे में फंस गए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा आया, नशे को ठोकर मारकर आगे बढ़े और खुशहाल जिंदगी की नई शुरुआत की।
विज्ञापन


सिगरेट के कश से की शुरुआत, हेरोइन और चरस के नशे में डूबा
चंडीगढ़ के जितेंद्र सिंह साल 2002 में बारहवीं के छात्र थे। उस दौरान दोस्तों की संगत में आकर पहली बार सिगरेट का कश लगाया और फिर धीरे-धीरे नशे के दलदल में फंसते चले गए। हेरोइन, चरस तक का नशा आम लगने लगा। शुरुआत के दिनों में दोस्तों ने अपने पैसे से नशा खरीदकर दिया। कुछ दिनों में जब वह नशे के शिकंजे में बुरी तरह से फंस गए तो अपनी लत को पूरी करने के लिए घर में चोरियां करने लगे। हर जगह उन्हें दुत्कार व घर में पिटाई तक होने लगी।
विज्ञापन


साल 2012 परिजनों ने यह सोचकर शादी करवा दी कि शायद उनका बेटा सही राह में चल पड़े लेकिन यह कोशिश भी बेकार गई। जितेंद्र का एक बेटा हुआ। जिंदगी के 18 साल बर्बाद करने के बाद एक दिन बेटे ने कहा कि पापा प्लीज नशा को छोड़ दो। मासूम बेटे की आवाज जितेंद्र को अंदर तक झकझोर दिया। उसके बाद वह अपनी इच्छा से बरवाला के एक नशा केंद्र में पहुंचे और इलाज कराया। जब सब ठीक हो गया तो नौकरी की तलाश शुरू की। अब वे चंडीगढ़ स्थित एक सरकारी विभाग में आईटी डिपार्टमेंट में नौकरी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

नशे के शिकंजे से खुद बाहर निकले विजय

सेक्टर-41 में रहने वाले विजय (काल्पनिक नाम) ने बताया कि साल 2013 को उनकी मुलाकात चंडीगढ़ के डिस्को में एक शख्स से हुई। धीरे-धीरे दोस्ती हो गई और उसकी संगत में आकर वह नशे के आदी हो गए। नशे के चक्रव्यूह में फंसकर वे हेरोइन, चरस, गांजा, अफीम का नशा करने लगे। अपनी ख्वाहिश को पूरी करने के लिए उन्हें रोज कम से कम चार से पांच हजार रुपये की आवश्यकता पड़ती थी। शुरुआत में पैसे आसानी से मिल जाते थे, लेकिन जब घरवालों को पता चला कि पैसों को वह नशे में उड़ा रहे हैं तो परिजनों ने शिकंजा कस दिया।

घर में रोजाना लड़ाई होने लगी। एक दिन विजय के पिता ने उनको धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया। घर से बाहर निकलकर भी वह अपना शौक पूरा कर रहे थे, मगर जब एक दिन बाहर से भी कुछ नहीं मिला और लोगों ने दुत्कार दिया तो अपनी घर की याद आई। किसी ने नशा केंद्र के बारे में बताया तो खुद से सेक्टर-18 के नशा केंद्र में भर्ती हो गए। करीब 3 महीने के इलाज के बाद नशा छूट गया तो विजय के पिता ने अपना बिजनेस दोबारा से संभालने दे दिया। विजय की नई पारी अब खुशियों से भरी है।

कैप्सूल ने बर्बाद कर दी थी जिंदगी, परिवार ने निकाला नशे के दलदल से

नयागांव के रहने वाले 32 वर्षीय शुभम (काल्पनिक नाम) बताते हैं कि वह साल 2009 से चोरी छिपे नशीले कैप्सूल का सेवन करते थे। इस कैप्सूल ने उन्हें अपना इतना आदि बना दिया था कि घर में चोरी करना उनके लिए आम बात हो गई थी। वह शहर के एक इलाके से नशीली गोली खरीद कर दिन में दो से तीन बार सेवन करते थे। नशे की वजह से वह दिन भर घर में सोते रहते थे। एक दिन परिवार वालों को शक हो गया।

जांच की तो पता चला कि वह नशे की गोलियां खाते हैं। जैसे ही घरवालों को यह पता चला तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर वाले जबरदस्ती उसे पीजीआई नशा मुक्ति केंद्र ले गए और इलाज करवाया। करीब 3 महीने के इलाज के बाद सेहत में काफी सुधार आ गया। शुभम के रिश्तेदार ने बताया कि अब वह किसी बिल्डर के साथ मिलकर अच्छी खासी नौकरी कर वह अपना परिवार चला रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed