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Chandigarh News: रंगीन पैकेटों में बिक रहा नशा, सिगरेट के बाद अब निकोटीन पाउच का खतरा

Tue, 26 May 2026 02:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 02:54 AM IST
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Drugs are being sold in colorful packets; after cigarettes, now the danger of nicotine pouches
चंडीगढ़। सिगरेट और वेपिंग के बाद अब निकोटीन पाउच युवाओं के बीच तेजी से नई लत बनकर उभर रहे हैं। छोटे-छोटे रंगीन पैकेटों में मिलने वाले इन उत्पादों को स्मोक-फ्री और टोबैको-फ्री बताकर बेचा जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे युवाओं के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।पीजीआई के तंबाकू नियंत्रण विशेषज्ञ प्रो. डॉ. सोनू गोयल के अनुसार सोशल मीडिया, गेमिंग और लाइफस्टाइल कैंपेन के जरिए इन उत्पादों को फैशन एक्सेसरी की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह तेजी से निकोटीन की लत बढ़ाने वाला उत्पाद है।
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डॉ. गोयल ने बताया कि निकोटीन पाउच को होंठ और मसूड़ों के बीच रखा जाता है जहां से निकोटीन सीधे शरीर में पहुंचता है। इनमें मिंट, कॉफी, बेरी और कैंडी जैसे फ्लेवर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि ये उत्पाद बिना धुएं और बिना गंध के इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को लंबे समय तक इसकी जानकारी तक नहीं लगती।
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उन्होंने कहा कि कई कंपनियां इन्हें क्लीन और सेफ बताकर प्रचारित कर रही हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और सीडीसी जैसी एजेंसियां स्पष्ट कर चुकी हैं कि निकोटीन का कोई भी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ पाउच में निकोटीन की मात्रा सामान्य निकोटीन गम की तुलना में 10 से 50 गुना तक अधिक हो सकती है।
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सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार
रिपोर्ट के अनुसार इन उत्पादों को फिटनेस, कॉन्फिडेंस, गेमिंग और स्टाइल से जोड़कर प्रमोट किया जा रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, रंगीन पैकेजिंग और पॉकेट फ्रेंडली डिजाइन के जरिए इन्हें युवाओं के बीच कूल प्रोडक्ट की तरह पेश किया जा रहा है।
शरीर पर दिख रहे दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों के मुताबिक निकोटीन पाउच इस्तेमाल करने वालों में मुंह में जलन, अल्सर, बेचैनी, सिरदर्द, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ स्टडी में सांस लेने में दिक्कत और एंग्जायटी बढ़ने की बात भी सामने आई है।

किशोर सबसे ज्यादा खतरे में
डॉ. गोयल ने बताया कि किशोरावस्था में दिमाग का विकास जारी रहता है। ऐसे में निकोटीन का असर ध्यान, याददाश्त, व्यवहार और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों के बैग में छोटे पाउच, बार-बार मिंट या च्युइंग गम का इस्तेमाल, अचानक चिड़चिड़ापन और नींद में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें।


तंबाकू और निकोटीन की लत छोड़ने के आसान उपाय
निकोटीन छोड़ने की एक तय तारीख तय करें
सिगरेट, वेप और निकोटीन पाउच से जुड़ी चीजें घर से हटाएं
च्युइंग गम, सौंफ या पानी का इस्तेमाल कर क्रेविंग कम करें
रोजाना व्यायाम और वॉक को दिनचर्या में शामिल करें
तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें
तंबाकू सेवन करने वाले दोस्तों की संगत से दूरी बनाएं
परिवार और दोस्तों का सपोर्ट लें
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लें
राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइऩ 1800-11-2356 पर मदद लें
एमसेसेशन सेवा के लिए शून्य एक एक-दो दो नौ शून्य एक सात शून्य एक पर मिस्ड कॉल दें
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