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ड्रग कंट्रोलर को चंडीगढ़ में नहीं मिली एवेस्टिन
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Jul 2016 12:37 AM IST
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drug controller at PGI
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एवेस्टिन के जिस बैच नंबर की वाइल में गड़बड़ी मिली थी, उस बैच की एक भी वाइल चंडीगढ़ में नहीं मिली है। सोमवार को ड्रग कंट्रोलर ने पीजीआई, कुमार एंड कंपनी और एवेस्टिन के स्थानीय स्टॉकिस्ट से वायल की जानकारी हासिल की, लेकिन वायल नहीं मिली। पीजीआई के पास जो वाइल थी, उन सभी का इस्तेमाल किया जा चुका है।
अब ड्रग कंट्रोलर दवा निर्माता कंपनी से संपर्क करने की कोशिश में है। एवेस्टिन को स्विजरलैंड की कंपनी रोशे बनाती है। इसका दफ्तर मुंबई में है। ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह ने बताया कि एवेस्टीन के बैच नंबर बी7034बी02 में ही गड़बड़ी की शिकायत है। इस बैच की 100 या हजार वाइल भी हो सकती हैं, लेकिन शहर में एक भी नहीं मिली। अब वे रोशे कंपनी से स्टॉकिस्ट के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की जाएगी। स्टॉक नहीं मिलने की स्थिति में कंपनी या दवा का ठीक से रख-रखाव नहीं करने वालों के खिलाफ केस नहीं बन पाएगा।
कुमार एंड कंपनी से चार सैंपल भरे
पीजीआई में एवेस्टिन का स्टॉक नहीं मिलने पर ड्रग कंट्रोलर की टीम ने आंखों में डालने वाली चार अन्य दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। सैंपल का मकसद यह जांचना है कि कंपनी ने जहां स्टॉक रखा है, वहां की कंडीशन कैसी है? कोल्ड चैन के पैरामीटर सही तरह से फॉलो किए जा रहे हैं या नहीं।
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अगले आदेश तक एवेस्टिन पर प्रतिबंध
ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह ने साफ किया है कि अगले आदेश तक एवेस्टिन की खरीददारी पर रोक लगाई गई है। जब तक इस मामले की पड़ताल नहीं हो पाती, तब तक एवेस्टिन के इस्तेमाल पर रोक लगी रहेगी। जीएमसीएच-32 में पहले से ही एवेस्टिन के इस्तेमाल पर रोक है। जीएमसीएच-32 में ल्यूसेंटिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। ल्यूसेंटिस का एक डोज 23 हजार रुपये का मिलता है, जबकि एवेस्टिन का एक डोज 1500 रुपये का है।
दिल्ली से भी आई टीम
इस मामले में नई दिल्ली स्थित सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) की टीम भी सोमवार को चंडीगढ़ पहुंची। उन्होंने पीजीआई के प्रोटोकाल और पूरे मामले की जानकारी हासिल की। पीजीआई ने भी अपनी एक रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है। इसके अलावा चंडीगढ़ के ड्रग कंट्रोलर की टीम ने भी उनसे बातचीत की थी।
12 मरीजों को डिस्चार्ज किया
पीजीआई की ओर से जानकारी दी गई है कि 27 में से 12 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। उनकी हालत ठीक है। रोशनी भी धीरे-धीरे वापस आ रही है। बाकी पेशेंट को मंगलवार या बुधवार को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। पीजीआई ने एवेस्टिन हादसे से प्रभावित सभी मरीजों की फीस भी माफ कर दी है।
अब 23 हजार की पड़ेगी एक डोज
एवेस्टिन पर रोक लगने से आंखों के मरीज परेशान हो गए हैं। अब एवेस्टिन के बजाय ल्यूसेंटिस का डोज दिया जाएगा, इसकी एक डोज की कीमत 23 हजार रुपये है। कई मरीजों के परिजनों ने कहा कि ऐसा होने से वे बरबाद हो जाएंगे। उनके मरीज की आंखों की रोशनी चली जाएगी। उन्होंने सरकार व प्रशासन से गुजारिश की है कि वे इस मामले सोचे और उनके लिए कोई रास्ता ढूंढे, ताकि उन्हें परेशानी न उठानी पड़े।
ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह का कहना है कि हमें एक भी एवेस्टिन की वायल नहीं मिली है। अब कंपनी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक पूरी पड़ताल नहीं होती, तब तक एवेस्टिन की खरीदारी पर रोक लगी रहेगी।
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अब ड्रग कंट्रोलर दवा निर्माता कंपनी से संपर्क करने की कोशिश में है। एवेस्टिन को स्विजरलैंड की कंपनी रोशे बनाती है। इसका दफ्तर मुंबई में है। ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह ने बताया कि एवेस्टीन के बैच नंबर बी7034बी02 में ही गड़बड़ी की शिकायत है। इस बैच की 100 या हजार वाइल भी हो सकती हैं, लेकिन शहर में एक भी नहीं मिली। अब वे रोशे कंपनी से स्टॉकिस्ट के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की जाएगी। स्टॉक नहीं मिलने की स्थिति में कंपनी या दवा का ठीक से रख-रखाव नहीं करने वालों के खिलाफ केस नहीं बन पाएगा।
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कुमार एंड कंपनी से चार सैंपल भरे
पीजीआई में एवेस्टिन का स्टॉक नहीं मिलने पर ड्रग कंट्रोलर की टीम ने आंखों में डालने वाली चार अन्य दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। सैंपल का मकसद यह जांचना है कि कंपनी ने जहां स्टॉक रखा है, वहां की कंडीशन कैसी है? कोल्ड चैन के पैरामीटर सही तरह से फॉलो किए जा रहे हैं या नहीं।
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अगले आदेश तक एवेस्टिन पर प्रतिबंध
ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह ने साफ किया है कि अगले आदेश तक एवेस्टिन की खरीददारी पर रोक लगाई गई है। जब तक इस मामले की पड़ताल नहीं हो पाती, तब तक एवेस्टिन के इस्तेमाल पर रोक लगी रहेगी। जीएमसीएच-32 में पहले से ही एवेस्टिन के इस्तेमाल पर रोक है। जीएमसीएच-32 में ल्यूसेंटिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। ल्यूसेंटिस का एक डोज 23 हजार रुपये का मिलता है, जबकि एवेस्टिन का एक डोज 1500 रुपये का है।
दिल्ली से भी आई टीम
इस मामले में नई दिल्ली स्थित सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) की टीम भी सोमवार को चंडीगढ़ पहुंची। उन्होंने पीजीआई के प्रोटोकाल और पूरे मामले की जानकारी हासिल की। पीजीआई ने भी अपनी एक रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है। इसके अलावा चंडीगढ़ के ड्रग कंट्रोलर की टीम ने भी उनसे बातचीत की थी।
12 मरीजों को डिस्चार्ज किया
पीजीआई की ओर से जानकारी दी गई है कि 27 में से 12 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। उनकी हालत ठीक है। रोशनी भी धीरे-धीरे वापस आ रही है। बाकी पेशेंट को मंगलवार या बुधवार को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। पीजीआई ने एवेस्टिन हादसे से प्रभावित सभी मरीजों की फीस भी माफ कर दी है।
अब 23 हजार की पड़ेगी एक डोज
एवेस्टिन पर रोक लगने से आंखों के मरीज परेशान हो गए हैं। अब एवेस्टिन के बजाय ल्यूसेंटिस का डोज दिया जाएगा, इसकी एक डोज की कीमत 23 हजार रुपये है। कई मरीजों के परिजनों ने कहा कि ऐसा होने से वे बरबाद हो जाएंगे। उनके मरीज की आंखों की रोशनी चली जाएगी। उन्होंने सरकार व प्रशासन से गुजारिश की है कि वे इस मामले सोचे और उनके लिए कोई रास्ता ढूंढे, ताकि उन्हें परेशानी न उठानी पड़े।
ड्रग कंट्रोलर जसबीर सिंह का कहना है कि हमें एक भी एवेस्टिन की वायल नहीं मिली है। अब कंपनी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक पूरी पड़ताल नहीं होती, तब तक एवेस्टिन की खरीदारी पर रोक लगी रहेगी।