Chandigarh News: ड्रग कंट्रोल अफसर सुनील चौधरी को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, आत्मसमर्पण का आदेश
एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी ड्रग कंट्रोल अफसर सुनील चौधरी को सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सर्वोच्च अदालत ने सुनील चौधरी को पहले आत्मसमर्पण करने और बाद में नियमित जमानत याचिका दाखिल करने को कहा है।
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अनियमितताओं का हवाला देते हुए केमिस्ट को नोटिस जारी करने और फिर कार्रवाई समाप्त करने की एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी ड्रग कंट्रोल अफसर सुनील चौधरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने और फिर नियमित जमानत याचिका दाखिल करने का सुझाव दिया है। इसके बाद उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली और सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
धनास में ग्राम संपर्क के सामने ऑर्थोपेडिक सर्जिकल दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने विजिलेंस को शिकायत दी थी और इसके बाद ट्रैप लगाया गया था। इस शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने अशोक नरूला को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते सेक्टर-20 से रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद 27 सितंबर को पुलिस स्टेशन विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था।
इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि वह धनास में ऑर्थोपेडिक सर्जिकल की दुकान चलाता है। करीब एक महीना पहले सुनील चौधरी और अशोक नरूला उसकी दुकान में आए और जांच करने लगे। शिकायतकर्ता से कहा गया कि उसकी दुकान में कई कमियां हैं। वह दुकान को सील कर देंगे। इस पर शिकायतकर्ता ने कहा कि वह कमियों को दूर कर लेगा। इसी बीच अशोक नरूला और सुनील चौधरी ने शिकायतकर्ता के पेपर पर दस्तखत ले लिए। अशोक ने कहा कि उसका काम एक लाख रुपये में हो जाएगा, दुकान भी सील नहीं होगी। शिकायतकर्ता ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद नरूला ने 80 हजार रुपये देने की बात कही।
शिकायतकर्ता के अनुसार रिश्वत की राशि न मिलने पर ड्रग कंट्रोलर ने विभाग से उसे नोटिस भिजवा दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता विजिलेंस के पास पहुंचा और शिकायत दी। विजिलेंस ने ट्रैप लगाकर अशोक नरूला को रंगे हाथ 25 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया और सुनील चौधरी व अशोक नरूला के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए उसने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली लेकिन वहां से भी याची को झटका लगा है।
हाईकोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता ड्रग इंस्पेक्टर है जो हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का महत्वपूर्ण पद है। उस पर बाजार निगरानी, नकली दवाओं का पता लगाना जैसी अहम जिम्मेदारी हैं। आम लोगों को दवाओं के बारे में जानकारी नहीं होती है और वे सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों के प्रति आशा रखते हैं कि वे अपना काम ठीक से कर रहे होंगे क्योंकि मेडिकल क्षेत्र के बेइमानों पर अंकुश लगाने के लिए ही ड्रग इंस्पेक्टरों और नियंत्रकों की नियुक्त की जाती है और इन्हें सार्वजनिक खजाने से वेतन भुगतान होता है।