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अमृतसर डीएमयू के चालक ने नहीं की खुदकुशी, सोशल मीडिया पर थीं ऐसी चर्चाएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर
Updated Tue, 23 Oct 2018 09:04 AM IST
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रेल डिवीजन फिरोजपुर के डीआरएम विवेक कुमार ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सोशल मीडिया में एक संदेश वायरल हो रहा है। उसमें कहा गया है कि अमृतसर के जौड़ा रेलवे क्रॉसिंग फाटक पर शुक्रवार को जिस डीएमयू ट्रेन (74643) के तले कटकर 59 लोग मरे थे, उस ट्रेन के चालक अरविंद कुमार (हेड क्वार्टर जालंधर) ने सोमवार को अमृतसर के तारा वाला पुल के नीचे फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली है।
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डीआरएम ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। चालक सुरक्षित है। सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैलाई जा रही है। जिस व्यक्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है वह डीएमयू का चालक नहीं है। डीआरएम विवेक कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ट्रैक हमेशा रेलवे क्रॉसिंग फाटक से ही क्रॉस करें। रेल ट्रैक क्रॉस करना कानूनी गलत है।
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बता दें कि, जौड़ा फाटक के पास दशहरा वाले दिन हुए हादसे को लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्म है। लोगों का कहना है कि ऐसा बेवजह माहौल खराब करने के लिए किय जा रहा है। सोशल मीडिया पर उस ट्रेन के चालक द्वारा आत्महत्या करने की बात वायरल हो गई, जिससे हादसा हुआ था। जांच के बाद पता चला कि ट्रेन चालक सही सलामत है। दरअसल एक व्यक्ति का अमृतसर व तरनतरन के बीच एक पुल पर फंदे से झूलता शव मिला था। इसके बाद किसी ने बिना कोई जांच किए बिना हादसा का कारण बनी डीएमयू ट्रेन के चालक द्वारा आत्महत्या करने की बात सोशल मीडिया पर डाल दी थी।
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59 लोगों की मौत मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी से करवाने की मांग को लेकर सोमवार को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में अपील की गई है कि इस घटना के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा।
गुरुग्राम के दिनेश कुमार डाकोरिया ने एडवोकेट शशांक देओ सुधी के जरिये दायर याचिका में बताया है कि इतनी वीभत्स दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने से हर कोई इनकार कर रहा है। इस दुर्घटना में मरने वालों के परिवारों और घायलों की जिम्मेदारी भी कोई नहीं ले रहा है। स्थानीय नेता भी इस दिशा में कोई कदम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। रेल विभाग पहले ही इस घटना की जांच करवाने से ही यह कहते हुए इंकार कर चुका है कि इसमें उनकी ओर से कोई गलती नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मजिस्ट्रेट और पुलिस द्वारा इस घटना की जांच निष्पक्ष हो नहीं सकती है क्योंकि यह राज्य सरकार के अधीन हैं। ऐसे में इस घटना की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सीबीआई या एसआईटी को दी जानी चाहिए। इसके अलावा इस घटना में हुए जानमाल के नुकसान और उसके आकलन के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया जाना चाहिए। साथ ही नेताओं की जिम्मेदारी तय करने के लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने की भी अपील की गई है। याची ने कहा कि अमृतसर नगर निगम को भी आदेश दिए जाने चाहिए कि घटना के कारणों का पता लगाएं जिससे भविष्य में ऐसी घटना न हो।