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68 की उम्र में भी हुनर बरकरार, आखिर क्या है राज, बता रही हैं 'ड्रीम गर्ल'
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
Updated Mon, 12 Dec 2016 09:33 AM IST
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी
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68 साल की उम्र में भी हुनर का जादू बरकरार है, इसके पीछे आखिर ऐसा क्या राज है? इसके बारे में खुद बता रही हैं 'ड्रीम गर्ल'। दक्षिण भारत में फिल्म पांडव वनवासम् से 1961 में कैरियर की शुरुआत कर मथुरा सीट से सांसद बनने तक हेमा मालिनी ने कई बुलंदियों को छुआ है। 68 की उम्र के बाद भी उनके हुनर का जादू आज भी बरकरार है।
ये उनकी अदा, अंदाज और असर का ही नतीजा है कि अभी तक बॉलीवुड में उनके बाद दूसरी ड्रीम गर्ल का खिताब किसी को नहीं मिल सका। कुरुक्षेत्र पहुंचीं हेमा मालिनी से अमर उजाला ने खास बातचीत की। नॉर्थ जोन कल्चर सेंटर भारत सरकार के बुलावे पर हेमा मालिनी कुरुक्षेत्र में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर द्रौपदी नृत्य की प्रस्तुति करने के लिए पहुंची थीं।
यह संयोग ही था कि उनका यह नृत्य कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्थित महाभारत कालीन द्रौपदी कूप के ठीक सामने मंच पर हुआ। बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि मैं नारी वेदना को समझती हूं। द्रौपदी नृत्य में यही सार है। इसमें द्रौपदी के रूप में आधुनिक नारियों के संघर्ष, चुनौतियों और दर्द को उजागर करता है।
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ये उनकी अदा, अंदाज और असर का ही नतीजा है कि अभी तक बॉलीवुड में उनके बाद दूसरी ड्रीम गर्ल का खिताब किसी को नहीं मिल सका। कुरुक्षेत्र पहुंचीं हेमा मालिनी से अमर उजाला ने खास बातचीत की। नॉर्थ जोन कल्चर सेंटर भारत सरकार के बुलावे पर हेमा मालिनी कुरुक्षेत्र में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर द्रौपदी नृत्य की प्रस्तुति करने के लिए पहुंची थीं।
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यह संयोग ही था कि उनका यह नृत्य कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्थित महाभारत कालीन द्रौपदी कूप के ठीक सामने मंच पर हुआ। बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि मैं नारी वेदना को समझती हूं। द्रौपदी नृत्य में यही सार है। इसमें द्रौपदी के रूप में आधुनिक नारियों के संघर्ष, चुनौतियों और दर्द को उजागर करता है।
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अभिनय, नृत्य, राजनीति और समाजसेवा में अनोखा सामंजस्य
गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी
उम्र के इस पड़ाव में तमाम व्यस्तताओं के चलते देख फिल्मों में अभिनय, नृत्य और राजनीति के अलावा सामाजिक कार्यों का सामंजस्य बनाने में निपुण हेमा मालिनी ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में दिए कर्म के संदेश में विश्वास रखती हैं।
जहां कर्म करने का यही जुनून उन्हें सभी क्षेत्रों में सक्रिय रखता है, वहीं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के इस संदेश के अलावा योग उन्हें काम करने की पूरी स्फूर्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि हर कार्य के लिए अलग समय होता है।
यहां आने का अवसर मिला यह सौभाग्य
मंच पर परफॉरमेंस से पहले बातचीत में हेमा मालिनी ने इस बात पर संतोष जताया कि आज उन्हें उस पवित्र भूमि पर द्रौपदी नृत्य करने का सौभाग्य केंद्र सरकार के कारण मिला है, जिस रणभूमि में पांच हजार साल पहले नारी के अपमान का बदला लिया गया था।
हेमा मालिनी ने कहा कि भक्ति की महिमा को नकारा नहीं जा सकता। सच्चे मन से भक्ति की बदौलत ही द्रौपदी की लाज रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को खुद आना पड़ा था।
जहां कर्म करने का यही जुनून उन्हें सभी क्षेत्रों में सक्रिय रखता है, वहीं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के इस संदेश के अलावा योग उन्हें काम करने की पूरी स्फूर्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि हर कार्य के लिए अलग समय होता है।
यहां आने का अवसर मिला यह सौभाग्य
मंच पर परफॉरमेंस से पहले बातचीत में हेमा मालिनी ने इस बात पर संतोष जताया कि आज उन्हें उस पवित्र भूमि पर द्रौपदी नृत्य करने का सौभाग्य केंद्र सरकार के कारण मिला है, जिस रणभूमि में पांच हजार साल पहले नारी के अपमान का बदला लिया गया था।
हेमा मालिनी ने कहा कि भक्ति की महिमा को नकारा नहीं जा सकता। सच्चे मन से भक्ति की बदौलत ही द्रौपदी की लाज रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को खुद आना पड़ा था।