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टीएफटी विंटर फेस्टिवल में हुआ नाटक ‘थोड़ा-थोड़ा गांधी’
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चंडीगढ़। थिएटर फार थिएटर ग्रुप की ओर से भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के सहयोग से आयोजित टीएफटी विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल के अंतर्गत चंडीगढ़ के सेक्टर 23 स्थित बाल भवन में नाटक ‘थोड़ा थोड़ा गांधी’ का मंचन किया गया। इसका निर्देशन प्रिवेंद्र सिंह ने किया, जबकि इसके लेखक राजेश कुमार हैं।
राजेश कुमार की कृति झोपड़पट्टी पर आधारित नाटक ‘थोड़ा थोड़ा गांधी’ उन लोगों पर है जो बड़े सुकून से अपनी जद्दोजहद भरी जिंदगी गुजार रहे होते हैं। लेकिन गांधी जयंती के अवसर पर झोपड़पट्टी की जगह पर गांधी प्रतिमा की स्थापना कर दी जाती है। यह इस वादे के साथ कि उस जमीन पर गांधी मेमोरियल सेंटर और झोपड़पट्टी वालों के लिए फ्लैट बनवाया जाएगा। लेकिन यहां पर चीजें इतनी ज्यादा सीधी हैं नहीं जितनी झोपड़पट्टी वालों को बताई जाती हैं। इस मामले में जब खुलासा होता है कि झोपड़पट्टी की जगह पर गांधी प्रतिमा की स्थापना उस इलाके के एक कद्दावर नेता, एक बिजनेसमैन और एक गुंडे की मिली साजिश होती है।
वहीं, झोपड़पट्टी वालों को उस जमीन से हटाने की और गांधी मेमोरियल सेंटर के आड़ में तीन सितारा होटल बनाने की बात मुख्यमंत्री तक पहुंचती है। उनको वहां दोबारा बसाया जाता है, लेकिन चीजें कुछ खास नहीं बदलती हैं और तब तय होता है कि कैसे उस नेता को उसी की भाषा में पाठ पढ़ाया जाए।
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इस नाटक में बसंत मिश्रा, प्रदीप शिवहरे, शिवम पांडेय, नैना सिंह, अजय कुमार, सौरव कुमार सिंह, अनुराग सिंह, आकाश राम चंद्र श्रीवास्तव, विजेंद्र गुप्ता, रिंटू रावत, उदय प्रताप सिंह, मनीषा गुप्ता, भव्या द्विवेदी, जयंत राज ने भूमिकाएं निभाईं। इस नाटक में प्रकाश परिकल्पना राहुल जयसवाल, सुजीत सिंह यादव (बंटी) ने की। संगीत परिकल्पना शुभम कुमार दूबे, मंच सज्जा सामग्री फैसल सिद्दीकी, प्रदीप कुमार, आशुतोष कुमार, रिंटू, अजय कुमार का रहा। इसमें एसोसिएट डायरेक्टर राहुल सिंह चंदेल रहे।
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राजेश कुमार की कृति झोपड़पट्टी पर आधारित नाटक ‘थोड़ा थोड़ा गांधी’ उन लोगों पर है जो बड़े सुकून से अपनी जद्दोजहद भरी जिंदगी गुजार रहे होते हैं। लेकिन गांधी जयंती के अवसर पर झोपड़पट्टी की जगह पर गांधी प्रतिमा की स्थापना कर दी जाती है। यह इस वादे के साथ कि उस जमीन पर गांधी मेमोरियल सेंटर और झोपड़पट्टी वालों के लिए फ्लैट बनवाया जाएगा। लेकिन यहां पर चीजें इतनी ज्यादा सीधी हैं नहीं जितनी झोपड़पट्टी वालों को बताई जाती हैं। इस मामले में जब खुलासा होता है कि झोपड़पट्टी की जगह पर गांधी प्रतिमा की स्थापना उस इलाके के एक कद्दावर नेता, एक बिजनेसमैन और एक गुंडे की मिली साजिश होती है।
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वहीं, झोपड़पट्टी वालों को उस जमीन से हटाने की और गांधी मेमोरियल सेंटर के आड़ में तीन सितारा होटल बनाने की बात मुख्यमंत्री तक पहुंचती है। उनको वहां दोबारा बसाया जाता है, लेकिन चीजें कुछ खास नहीं बदलती हैं और तब तय होता है कि कैसे उस नेता को उसी की भाषा में पाठ पढ़ाया जाए।
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इस नाटक में बसंत मिश्रा, प्रदीप शिवहरे, शिवम पांडेय, नैना सिंह, अजय कुमार, सौरव कुमार सिंह, अनुराग सिंह, आकाश राम चंद्र श्रीवास्तव, विजेंद्र गुप्ता, रिंटू रावत, उदय प्रताप सिंह, मनीषा गुप्ता, भव्या द्विवेदी, जयंत राज ने भूमिकाएं निभाईं। इस नाटक में प्रकाश परिकल्पना राहुल जयसवाल, सुजीत सिंह यादव (बंटी) ने की। संगीत परिकल्पना शुभम कुमार दूबे, मंच सज्जा सामग्री फैसल सिद्दीकी, प्रदीप कुमार, आशुतोष कुमार, रिंटू, अजय कुमार का रहा। इसमें एसोसिएट डायरेक्टर राहुल सिंह चंदेल रहे।