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'कोर्ट मार्शल' से बताया प्रताड़ना सही नहीं
अमर उजाला / पंचकूला
Updated Fri, 13 Dec 2013 07:08 PM IST
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समाज में छूआछूत, भेदभाव सरीखी होने वाली गिरावट को बेहद संजीदगी से पेश किया गया।
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इस गिरावट की विभीषिका से सेना का एक जवान कैसे गुजरता है और आखिर में उसे किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बदलते हालात और समाज के घटनाक्रमों पर आधारित नाटक कोर्ट मार्शल में इसे जीवंत किया गया। मौका था जैनेन्द्र्र पब्लिक स्कूल के आत्म ऑडिटोरियम में आयोजित चौथे टीएफटी ऑस्कर थियेटर फेस्टिवल का।
31 सालों से रंगमंच की सेवा के दौरान सुदेश शर्मा द्वारा निर्देशित इस नाटक का अब तक सौ से अधिक मंचन हो चुके हैं।
नाटक की कहानी में आर्मी का जवान रामचंद्र अफसरों से परेशान होकर अपने दो अधिकारियों पर गोली चला देता है। इसमें एक की मौके पर ही मौत हो जाती है, जबकि कैप्टन बीडी कपूर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।
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इसके बाद रामचंद्र का कोर्ट मार्शल होता है, लेकिन डिफेंस काउंसिल विकास राय सबके सामने सच्चाई रखते हैं तो सभी चौंक जाते हैं।
वे कोर्ट में बताते हैं कि ये अफसर रामंचद्र को प्रताड़ित करते थे। छोटी जाति का होने के कारण वे उसे जाति के संबोधन से बुलाते, जिससे वह परेशान था।
इसलिए उसने अफसरों पर गोलियां चला दीं। डिफेंस काउंसिल ने कहा कि जब तक ऊंच-नीच की बात होती रहेगी, तब तक समाज में ऐसे हादसे होते रहेंगे।
विकास राय का किरदार सुरभि कालिया ने बहुत ही सधे तरीके से निभाया। लेखक स्वदेश दीपक और निर्देशक सुदेश शर्मा ने इस नाटक के जरिये संदेश देने की कोशिश की कि चाहे कितना बड़ा संगठन हो, उसमें भी अपराध की गुंजाइश रहती है।
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थियेटर फॉर थियेटर एवं हरियाणा लोक संपर्क एवं सांस्कृतिक विभाग के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय फेस्टीवल के पहले दिन भाजपा के राष्ट्रीय नेता वीके सूद बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए।