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रिश्ते नातों से अधिक मायने रखती है इंसानियत, सिखा गई ‘घुमई’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:10 AM IST
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टैगोर थिएटर में लोक गाथा
- फोटो : amar ujala
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टैगोर थिएटर में लोक गाथा पर आधारित नाटक ‘घुमई’ इंसानियत के मायने सिखा गई। टैगोर थिएटर में रविवार को नाटक घुमई का मंचन हुआ। इसमें दिखाया गया कि रिश्ते नातों से अधिक इंसानियत मायने रखती है। चंडीगढ़ संगीत व नाटक के सहयोग से इस नाटक का मंचन किया गया। जम्मू के नटरंग थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने इसे पेश किया। नाटक को लिखने से लेकर उसेे निर्देशित करने का काम बलवंत ठाकुर ने किया।
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नाटक में दिखाया गया कि नई-नवेली दुल्हन प्यास से तड़प रही है। ऐसे में एक युवक संघर्ष कर उसके लिए पानी लाता है, लेकिन पानी लाने के चक्कर में उसे अपनी जान गवांनी पड़ती है।
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नाटक की कहानी डोगरी लोक गाथा पर आधारित है। नाटक में दिखाया जाता है शादी के बाद दुल्हन की विदाई हो जाती है। रास्ते में दुल्हन को प्यास लगती है लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जैसे-जैसे पहाड़ों की चढ़ाई बढ़ने लगती है तो दुल्हन प्यास से मरने की हालत में पहुंच जाती है। यह देखकर सब डोली को रोक देते हैं और पानी का स्त्रोत ढूढ़ने लगते हैं। पानी पहाड़ी के बहुत नीचे था, परंतु वहां पर जाना बहुत ही मुश्किल था। ऐसे में एक युवक दूल्हे से पानी लाने को कहता है, दूल्हा नहीं मानता और युवक से कहता है कि अगर वह पानी लेकर आएगा तो दुल्हन उसकी हो जाएगी।
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युवक पहाड़ी के नीचे से पानी लाने के लिए मान जाता है। युवक पानी लाने में तो सफल रहता है लेकिन अपनी जान नहीं बचा पाता। क्योंकि वह बहुत संघर्ष करने के बाद ही पहाड़ी के नीचे से पानी ला पाता है। वहीं दूसरी ओर जब दुल्हन को पानी पिलाने के बाद बाराती उसे सुसराल ले जाने लगते हैं तो वह जाने से इंकार कर देती है, क्योकि अब वह उसी युवक की हो चुकी है जिसे उसके पति ने उसे देने के लिए कहा था। वह अपने आपको विधवा घोषित कर देती है।
नाटक में इन कलाकराें ने किया मंचन
कलाकारों में दूल्हे का किरदार अनिल टिक्कू , दूल्हन का किरदार गौरी ठाकुर और पानी लाने वाले युवक का किरदार विंक्रात शर्मा ने निभाया। वहीं अन्य कि रदार में सुमित शर्मा, शिवम सिंह, मीनाक्षी, राजन, सुभाष, एश्वर्या साठे, वंशिका गुप्ता समेत अन्य कलाकार शामिल रहे। नाटक में सभी गीत सूरज सिंह के रहे। म्यूजिक पर मोहम्मद यासीन रहे।