Haryana: विरोध के बीच ई-टेंडरिंग पर एक कदम और आगे बढ़ी सरकार, जारी किया पॉलिसी का ड्रॉफ्ट
विकास एवं पंचायत विभाग ने ड्राफ्ट जारी किया है। दस दिन तक सुझाव और आपत्तियां दे सकते हैं। ड्रॉफ्ट पर आने वाले आपत्तियों व सुझावों के समाधान के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी।
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हरियाणा सरकार पंचायतों में दो लाख रुपये से ऊपर के विकास कार्यों को लेकर ई-टेंडरिंग कराने का फैसला ले चुकी है। इसके लिए पंचायत विभाग से सभी पंचायत अधिकारियों को आदेश जारी हो चुके हैं। इधर, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने प्रदेश के चुनिंदा सरपंचों से फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार की थी और दो लाख की राशि को पांच लाख रुपये का सुझाव दिया था। अब सरकार ने ई टेंडरिंग व्यवस्था को लागू करने के लिए तैयार की गई पॉलिसी का ड्रॉफ्ट जारी कर दिया है।
ड्रॉफ्ट के मुख्य बिंदु
- ग्राम पंचायत, ब्लॉक समिति और जिला परिषदों में दो लाख रुपये तक के कार्य मैनुअली हो सकेंगे। इससे अधिक राशि के कार्यों का ई-टेंडर कराना होगा।
- 25 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की फाइलें चंडीगढ़ मुख्यालय नहीं आएंगी। स्थानीय स्तर पर एसडीओ ही दो से 25 लाख रुपये तक के कार्य मंजूर करेंगे। लेकिन, इसमें संबंधित ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की स्वीकृति अनिवार्य होगी।
- 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों की तकनीकी मंजूरी एक्सईएन के स्तर पर होगी। जिला परिषद के सीईओ इसकी मंजूरी देंगे।
- एक करोड़ से ढाई करोड़ रुपये तक के कार्यों की तकनीकी मंजूरी अधीक्षण अभियंता देंगे। इन कार्यों की मंजूरी के लिए फाइल चंडीगढ़ आएगी। विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक इसे पास करेंगे।
- ढाई करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की तकनीकी मंजूरी इंजीनियर-इन-चीफ या चीफ इंजीनियर के स्तर पर होगी और प्रशासनिक सचिव इसे पास करेंगे।
ई-टेंडरिंग पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, सरकार से मांगा जवाब
हरियाणा में विकास कार्य के लिए सरकार की ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाने के निर्णय के खिलाफ दर्जनभर से अधिक पंचायतों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार, ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के वित्तायुक्त व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इन्कार कर दिया है।
कुरुक्षेत्र समेत अन्य जिलों की पंचायतों ने हाईकोर्ट याचिका दाखिल कर बताया कि हरियाणा सरकार के 19 जनवरी को आदेश जारी कर दो लाख से अधिक के विकास कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग अपनाने का आदेश दिया है। सरकार के इस निर्णय से पंचायत का कामकाज प्रभावित होगा। पहले सरपंच अपने स्तर पर 20 लाख रुपये तक के विकास कार्य करवा सकते थे।
ई-टेंडर की प्रक्रिया लंबी है और टेंडर में ही एक साल बीत जाता है। याचिका में आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल 2015 में भी ऐसी ई-टेंडरिंग प्रणाली शुरू की गई थी। हाई कोर्ट में चुनौती देने पर उसे वापस ले लिया गया था। याचिका में सरपंचों का आरोप है कि सरकार ने हरियाणा पंचायती राज कानून 1994 में कई संशोधन कर उनके अधिकार कम कर दिए हैं।
सिरसा। ई-टेंडरिंग के विरोध में बुधवार को ज्ञापन देने जा रहे सरपंचों को पुलिस ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास से 70 मीटर की दूरी पर रोक दिया। इस पर सरपंचों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद सरपंचों ने उप मुख्यमंत्री के आवास के पास ही बेमियादी धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई।
यह आंदोलन केवल सरपंचों का नहीं रह गया है। देहात बचाने की लड़ाई में जनता एकजुट हो गई है। विधायकों के घरों के बाहर धरने लगातार जारी रहेंगे। प्रदेश सरकार अधिकारियों पर दबाव बनवा कर टेंडर लगवा रही है। हमारा संघर्ष जारी रहेगा। विधायकों को गांवों की जनता विधानसभा में भेजती है। -रणबीर गिल, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा सरपंच एसोसिएशन
बेशक सरकार ने ड्रॉफ्ट जारी कर दिया हो। अधिकारियों पर टेंडर लगवाने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। मगर, सरपंचों का विरोध जारी है। पूरे हरियाणा में ट्रेनिंग के दौरान मात्र 10 फीसद सरपंच ही पहुंच रहे हैं। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक करके जल्द ही आगामी फैसला लिया जाएगा। -चंद्रमोहन पोटलिया, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा सरपंच एसोसिएशन