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Chandigarh News: जले रोगियों को नया जीवन दे सकती है दान की स्किन
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चंडीगढ़। पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर स्किन डोनेशन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को स्किन डोनेशन के महत्व और यह कैसे जले हुए रोगियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, इसके बारे में शिक्षित करना था।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल पराशर ने बताया कि डोनेट की गई स्किन जले हुए रोगियों को नया जीवन दे सकती है। उन्होंने समझाया कि दान की गई त्वचा अस्थायी जैविक ड्रेसिंग (टेंपरेरी बॉयोलॉजिकल ड्रेसिंग) के रूप में कार्य करती है, जो कच्चे घावों की रक्षा करती है, तरल पदार्थ के नुकसान को कम करती है, संक्रमण को रोकती है और सर्जरी के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान करती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्किन डोनेशन के लिए जागरूकता अभी भी बहुत कम है। डॉ. पराशर ने पीजीआई की ओर से बर्न केयर, स्किन बैंकिंग और पुनर्निर्माण सर्जरी में लगातार हासिल की गई सफलताओं पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में जले हुए घावों की देखभाल में स्किन डोनेशन की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया और प्लास्टिक सर्जरी के व्यापक उद्देश्यों पर भी चर्चा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विपिन कौशल ने स्किन डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए विभाग के प्रयासों की सराहना की।
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मरीजों में आत्मविश्वास भरती है प्लास्टिक सर्जरी
पीजीआई की चीफ नर्सिंग ऑफिसर जसपाल कौर ने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और दानदाताओं को प्रेरित करने में नर्सिंग अधिकारियों की भूमिका अहम है। प्लास्टिक सर्जरी को अक्सर केवल कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं तक ही सीमित समझा जाता है जबकि यह जलने, गंभीर चोटों, जन्मजात विसंगतियों, चेहरे के पुनर्निर्माण, हाथ की सर्जरी और कैंसर जैसी चुनौतियों का समाधान करती है। यह मरीजों को न केवल उनकी पसंदीदा शारीरिक बनावट हासिल करने में मदद करती है बल्कि उन्हें गरिमा, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता भी वापस दिलाती है।
प्लास्टिक सर्जरी के प्रोफेसर और पीजीआई स्किन बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में 250 से अधिक नर्सिंग स्टाफ ने हिस्सा लिया। उन्हें स्किन बैंक की कार्यप्रणाली, दान और संरक्षण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
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प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल पराशर ने बताया कि डोनेट की गई स्किन जले हुए रोगियों को नया जीवन दे सकती है। उन्होंने समझाया कि दान की गई त्वचा अस्थायी जैविक ड्रेसिंग (टेंपरेरी बॉयोलॉजिकल ड्रेसिंग) के रूप में कार्य करती है, जो कच्चे घावों की रक्षा करती है, तरल पदार्थ के नुकसान को कम करती है, संक्रमण को रोकती है और सर्जरी के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान करती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्किन डोनेशन के लिए जागरूकता अभी भी बहुत कम है। डॉ. पराशर ने पीजीआई की ओर से बर्न केयर, स्किन बैंकिंग और पुनर्निर्माण सर्जरी में लगातार हासिल की गई सफलताओं पर भी प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम में जले हुए घावों की देखभाल में स्किन डोनेशन की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया और प्लास्टिक सर्जरी के व्यापक उद्देश्यों पर भी चर्चा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विपिन कौशल ने स्किन डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए विभाग के प्रयासों की सराहना की।
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मरीजों में आत्मविश्वास भरती है प्लास्टिक सर्जरी
पीजीआई की चीफ नर्सिंग ऑफिसर जसपाल कौर ने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और दानदाताओं को प्रेरित करने में नर्सिंग अधिकारियों की भूमिका अहम है। प्लास्टिक सर्जरी को अक्सर केवल कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं तक ही सीमित समझा जाता है जबकि यह जलने, गंभीर चोटों, जन्मजात विसंगतियों, चेहरे के पुनर्निर्माण, हाथ की सर्जरी और कैंसर जैसी चुनौतियों का समाधान करती है। यह मरीजों को न केवल उनकी पसंदीदा शारीरिक बनावट हासिल करने में मदद करती है बल्कि उन्हें गरिमा, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता भी वापस दिलाती है।
प्लास्टिक सर्जरी के प्रोफेसर और पीजीआई स्किन बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में 250 से अधिक नर्सिंग स्टाफ ने हिस्सा लिया। उन्हें स्किन बैंक की कार्यप्रणाली, दान और संरक्षण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।