{"_id":"60b3faf88ebc3e7fd8223da2","slug":"domestic-violence-increases-during-corona-period-dr-amira-chandigarh-news-pkl415052049","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में घरेलू हिंसा बढ़ी : डॉ. अमीरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में घरेलू हिंसा बढ़ी : डॉ. अमीरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पीयू यूसोल ने अपने स्वर्ण जयंती समारोहों की श्रृंखला में रविवार को कोविड- 19 पर लिंग-संवेदी अनुक्रिया : सर्वोत्तम कार्य पद्धतियां विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। कनाडा और इंडोनेशिया से जुड़े वक्ताओं ने अपने-अपने देशों के संदर्भ में सर्वोत्तम कार्य पद्धतियों को श्रोताओं के सामने रखा। इंडोनेशिया की एरलंगा यूनिवर्सिटी की कानून की प्रोफेसर डॉ. अमीरा परिपूर्णा ने कोरोना काल के दौरान घरेलू हिंसा में वृद्धि हुई और सामुदायिक सहयोग से कैसे उससे निपटा, इस बारे में अपनी बात रखी।
पीयू के वीसी प्रो. राज कुमार ने इस कोरोना काल में ऐसे वेबिनारों की महत्ता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह वेबिनार व ऐसे प्रासंगिक विषय विद्यार्थियों को प्रेरित-प्रोत्साहित करेंगे। माहौल में फैली निराशा को दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि आज की बदलती परिस्थितियों में डिजिटल और ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले यह वेबिनार दूर-दूर के वक्ताओं के साथ जुड़ने व उनके विचारों से लाभ उठाने में बहुत सहायक हैं। यूसोल की विभागाध्यक्ष प्रो. मधुरिमा वर्मा ने यूसोल के इतिहास का संक्षिप्त परिचय बताया।
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. अमीरा परिपूर्णा ने कोविड के इस संकट-काल में अपने देश की लिंग-संवेदी नीतियों के विषय में बताया। स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को स्पष्ट किया। कनाडा के ‘क्राउन प्रोसीक्यूटर काउंसिल सेबेस्टीन लाफ्रांस ने कहा कि घरेलू हिंसा यहां की भी समस्या है, मगर कनाडा में इस हिंसा से निपटने के लिए जो नीतियां बनाई गई हैं उनका अनुपालन एशिया की तुलना में बहुत कारगर ढंग से होता है। पीयू के कानून विभाग की प्रो. श्रुति बेदी ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीयू के वीसी प्रो. राज कुमार ने इस कोरोना काल में ऐसे वेबिनारों की महत्ता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह वेबिनार व ऐसे प्रासंगिक विषय विद्यार्थियों को प्रेरित-प्रोत्साहित करेंगे। माहौल में फैली निराशा को दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि आज की बदलती परिस्थितियों में डिजिटल और ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले यह वेबिनार दूर-दूर के वक्ताओं के साथ जुड़ने व उनके विचारों से लाभ उठाने में बहुत सहायक हैं। यूसोल की विभागाध्यक्ष प्रो. मधुरिमा वर्मा ने यूसोल के इतिहास का संक्षिप्त परिचय बताया।
विज्ञापन
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. अमीरा परिपूर्णा ने कोविड के इस संकट-काल में अपने देश की लिंग-संवेदी नीतियों के विषय में बताया। स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को स्पष्ट किया। कनाडा के ‘क्राउन प्रोसीक्यूटर काउंसिल सेबेस्टीन लाफ्रांस ने कहा कि घरेलू हिंसा यहां की भी समस्या है, मगर कनाडा में इस हिंसा से निपटने के लिए जो नीतियां बनाई गई हैं उनका अनुपालन एशिया की तुलना में बहुत कारगर ढंग से होता है। पीयू के कानून विभाग की प्रो. श्रुति बेदी ने भी विचार रखे।
विज्ञापन