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Chandigarh News: कुत्तों की नसबंदी का अभियान फिर शुरू
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हर साल 10 हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काटते हैं
- शहर में करीब 12 से 15 हजार कुत्तों की संख्या
25 फरवरी से अभियान बंद कर दिया गया था
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर में कुत्तों की नसबंदी का अभियान फिर से शुरू हो गया है। पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए नगर निगम ने रायपुरकलां में सेंटर स्थापित किया है।
चंडीगढ़ में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ने लगे हैं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो हर साल करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। इसमें कॉलोनियों से लेकर पीजीआई कैंपस के अंदर तक कुत्तों के काटने के मामले आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नसंबदी से न सिर्फ प्रजनन प्रक्रिया थमती है, बल्कि कुत्तों की हिंसक प्रवृति भी कम होती है। वह पहले की तुलना में शांत हो जाता है।
नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि प्रशासनिक कारणों से इस वर्ष 25 फरवरी से कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया था। अब यह कार्यक्रम सीधे नगर निगम की ओर से चलाया जाएगा, जिससे शहर में लावारिस कुत्तों की आबादी पर अधिक कुशल, मानवीय और व्यवस्थित नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
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उन्होंने कहा कि एबीसी कार्यक्रम लावारिस कुत्तों की आबादी को वैज्ञानिक और दयालु तरीके से प्रबंधित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आयुक्त ने जोर दिया कि सभी नसबंदी प्रक्रिया पशु जन्म नियंत्रण नियमों और पशु कल्याण दिशा निर्देशों के अनुसार सख्ती से संचालित की जाएगी, जिससे जानवरों और समुदाय दोनों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित होगी।
0172-2787200 पर भी संपर्क कर सकते हैं
नगर आयुक्त ने अनुरोध किया कि लोग अपने सेक्टर, कॉलोनियों या आसपास बिना नसबंदी वाले लावारिस कुत्तों की सूचना देकर इस महत्वपूर्ण पहल में सहयोग करें। नगर निगम के डॉग कंट्रोल सेल के साथ पहले से जारी संपर्क नंबरों से जानकारी साझा की जा सकती है। नागरिक 0172-2787200 पर भी संपर्क कर सकते हैं। लावारिस कुत्तों की नसबंदी के बारे में किसी प्रकार की मदद और सूचना के लिए 0172-6135200 पर संपर्क करें।
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- शहर में करीब 12 से 15 हजार कुत्तों की संख्या
25 फरवरी से अभियान बंद कर दिया गया था
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर में कुत्तों की नसबंदी का अभियान फिर से शुरू हो गया है। पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए नगर निगम ने रायपुरकलां में सेंटर स्थापित किया है।
चंडीगढ़ में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ने लगे हैं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो हर साल करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। इसमें कॉलोनियों से लेकर पीजीआई कैंपस के अंदर तक कुत्तों के काटने के मामले आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नसंबदी से न सिर्फ प्रजनन प्रक्रिया थमती है, बल्कि कुत्तों की हिंसक प्रवृति भी कम होती है। वह पहले की तुलना में शांत हो जाता है।
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नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि प्रशासनिक कारणों से इस वर्ष 25 फरवरी से कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया था। अब यह कार्यक्रम सीधे नगर निगम की ओर से चलाया जाएगा, जिससे शहर में लावारिस कुत्तों की आबादी पर अधिक कुशल, मानवीय और व्यवस्थित नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
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उन्होंने कहा कि एबीसी कार्यक्रम लावारिस कुत्तों की आबादी को वैज्ञानिक और दयालु तरीके से प्रबंधित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आयुक्त ने जोर दिया कि सभी नसबंदी प्रक्रिया पशु जन्म नियंत्रण नियमों और पशु कल्याण दिशा निर्देशों के अनुसार सख्ती से संचालित की जाएगी, जिससे जानवरों और समुदाय दोनों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित होगी।
0172-2787200 पर भी संपर्क कर सकते हैं
नगर आयुक्त ने अनुरोध किया कि लोग अपने सेक्टर, कॉलोनियों या आसपास बिना नसबंदी वाले लावारिस कुत्तों की सूचना देकर इस महत्वपूर्ण पहल में सहयोग करें। नगर निगम के डॉग कंट्रोल सेल के साथ पहले से जारी संपर्क नंबरों से जानकारी साझा की जा सकती है। नागरिक 0172-2787200 पर भी संपर्क कर सकते हैं। लावारिस कुत्तों की नसबंदी के बारे में किसी प्रकार की मदद और सूचना के लिए 0172-6135200 पर संपर्क करें।