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अनोखा इन्वेंशनः एक व्हीलचेयर, जो मरीजों को सही वार्ड तक पहुंचाएगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:17 AM IST
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व्हील चेयर
- फोटो : डेमो फोटो
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डॉक्टर्स और शोधकर्ताओं ने एक अनोखी चीज इजाद की है। एक ऐसी व्हीलचेयर और स्ट्रेचर, जो मरीजों को सही वार्ड तक पहुंचाएगी। पीजीआई में रिसर्च डे के उपलक्ष्य पर 100 से ज्यादा डाक्टर व रिसर्चर ने अपने-अपने पब्लिकेशन व इनोवेशन को प्रस्तुत किया।
इस मौके पर टेलीमेडिसिन सेंटर के सदस्यों ने जीपीआरएस गाइडेड युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर के एक मॉडल को प्रस्तुत किया। इसमें उन मरीजों को मदद मिलेगी, जिन्हें एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट रेफर किया जाता है। कई बार जब मरीज को दूसरे डिपार्टमेंट में भेजा जाता है तो वह भटक जाता है।
इससे उसकी परेशानी और बढ़ जाती है। जीपीआरएस युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर उसमें मदद करते हैं और उन्हें सही डिपार्टमेंट में पहुंचाने के लिए मदद करेंगे। इस माडल को पीजीआई के टेलीमेडिसिन सेंटर की डा. मीनू सिंह, अमित अग्रवाल, सुरेश भट्ट, सौरभ कुमार, पंकज पंत व मुनीष कुमार ने प्रस्तुत किया।
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इस मौके पर टेलीमेडिसिन सेंटर के सदस्यों ने जीपीआरएस गाइडेड युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर के एक मॉडल को प्रस्तुत किया। इसमें उन मरीजों को मदद मिलेगी, जिन्हें एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट रेफर किया जाता है। कई बार जब मरीज को दूसरे डिपार्टमेंट में भेजा जाता है तो वह भटक जाता है।
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इससे उसकी परेशानी और बढ़ जाती है। जीपीआरएस युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर उसमें मदद करते हैं और उन्हें सही डिपार्टमेंट में पहुंचाने के लिए मदद करेंगे। इस माडल को पीजीआई के टेलीमेडिसिन सेंटर की डा. मीनू सिंह, अमित अग्रवाल, सुरेश भट्ट, सौरभ कुमार, पंकज पंत व मुनीष कुमार ने प्रस्तुत किया।
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सभी ने काफी पसंद किया मॉडल को
व्हील चेयर
- फोटो : डेमो फोटो
इस मॉडल सभी लोगों ने पसंद किया। बताया गया कि पीजीआई की ओपीडी में रोजाना आठ हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। उनके साथ उनके परिजन भी होते हैं। ओपीडी के समय जितने मरीज होते हैं, उतने ही उनके परिजन भी। जब किसी भी मरीज को दूसरे डिपार्टमेंट या वार्ड में भेजा जाता है तो सही जगह पर सही समय पर पहुंचने पर कई दिक्कतें आती हैं।
डा. मीनू सिंह ने बताया कि जीपीआरएस युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर को टैबलेट के साथ अटैच किया जाएगा। उसमें पीजीआई का मैप भी होगा। इसमें सभी भाषाओं में वाइस ओवर होगा। ये टैबलेट वाइ-फाई से अटैच होंगे। जैसे ही मरीज को व्हील चेयर मिलेगी, मरीज व उसके परिजन को डायरेक्शन मिलना शुरू हो जाएगी। इसके लिए पीजीआई की ओपीडी में कुछ दिनों के लिए एक ट्रायल भी किया गया, जिसके परिणाम अच्छे आए हैं।
इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक टेक्नोलाजी पाटर्नर की खोज की जा रही है। हालांकि इसकी कास्ट काफी कम है। जैसे ही पार्टनर मिलता है तो मरीजों को काउंटर से व्हील चेयर व स्ट्रेचर मिलने लगेंगे।
- डा. मीनू सिंह, प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट पीजीआई
डा. मीनू सिंह ने बताया कि जीपीआरएस युक्त व्हीलचेयर व स्ट्रेचर को टैबलेट के साथ अटैच किया जाएगा। उसमें पीजीआई का मैप भी होगा। इसमें सभी भाषाओं में वाइस ओवर होगा। ये टैबलेट वाइ-फाई से अटैच होंगे। जैसे ही मरीज को व्हील चेयर मिलेगी, मरीज व उसके परिजन को डायरेक्शन मिलना शुरू हो जाएगी। इसके लिए पीजीआई की ओपीडी में कुछ दिनों के लिए एक ट्रायल भी किया गया, जिसके परिणाम अच्छे आए हैं।
इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक टेक्नोलाजी पाटर्नर की खोज की जा रही है। हालांकि इसकी कास्ट काफी कम है। जैसे ही पार्टनर मिलता है तो मरीजों को काउंटर से व्हील चेयर व स्ट्रेचर मिलने लगेंगे।
- डा. मीनू सिंह, प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट पीजीआई