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मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की कुर्सी छिनी, अब डॉ. सोहन सिंह होंगे नए प्रिंसिपल
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Sun, 14 May 2017 09:30 AM IST
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सरकारी मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
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सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस बल्ल की कुर्सी छीन कर डॉ. सोहन सिंह को दे दी गई है। डॉ. बल्ल को बीते सप्ताह विजिलेंस ने निजी प्रेक्टिस करते हुए उनके घर में स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे में कैद किया था। विजिलेंस ने इस बाबत एफआईआर तो नहीं दर्ज की थी, लेकिन सेहत मंत्रालय को विभागीय जांच के लिए चंडीगढ़ भेज दिया था। सेहत मंत्रालय ने इस मामले में कैमरे में तीन सौ रुपये लेते हुए फुटेज देख कर उन्हें हटाने में ज्यादा वक्त नही लिया। शुक्रवार देर रात डॉ. बल्ल को हटाने और डॉ. सोहन सिंह को मेडिकल कॉलेज का नया प्रिंसिपल बनाने का फरमान चंडीगढ़ से जारी कर दिया है।
डॉ. बीएस बल्ल 2016 में प्रिंसिपल बनाए गए थे। पूर्व निकाय मंत्री अनिल जोशी के खासमखास डॉ. बल्ल उनके पड़ोसी भी हैं। डॉ. बल्ल को प्रिंसिपल बनाने के लिए डीपीसी (डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी) के नियमों को दरकिनार करने की आवाज तो उठी, लेकिन दब गई। डॉ. बल्ल मेडिसन यूनिट (एक) के प्रभारी भी थे। हालांकि अभी भी वो मेडिसन यूनिट के प्रभारी बनें रहेंगे, लेकिन प्रिंसिपल पद उनसे छीन लिया गया है। नए प्रिंसिपल डॉ. सोहन सिंह रेडियोलॉजी विभाग के प्रभारी हैं। डॉ. सोहन सिंह प्रिंसिपल पद पर केवल डेढ़ महीने तक रहेंगे, क्योंकि वे 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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डॉ. बीएस बल्ल 2016 में प्रिंसिपल बनाए गए थे। पूर्व निकाय मंत्री अनिल जोशी के खासमखास डॉ. बल्ल उनके पड़ोसी भी हैं। डॉ. बल्ल को प्रिंसिपल बनाने के लिए डीपीसी (डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी) के नियमों को दरकिनार करने की आवाज तो उठी, लेकिन दब गई। डॉ. बल्ल मेडिसन यूनिट (एक) के प्रभारी भी थे। हालांकि अभी भी वो मेडिसन यूनिट के प्रभारी बनें रहेंगे, लेकिन प्रिंसिपल पद उनसे छीन लिया गया है। नए प्रिंसिपल डॉ. सोहन सिंह रेडियोलॉजी विभाग के प्रभारी हैं। डॉ. सोहन सिंह प्रिंसिपल पद पर केवल डेढ़ महीने तक रहेंगे, क्योंकि वे 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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विजिलेंस को क्यों नजर नहीं आया भ्रष्टाचार
डॉ. बीएस बल्ल की फाइल फोटो
- फोटो : file photo
डॉ. बीएस बल्ल के कार्यकाल के दौरान कई डॉक्टरों के निजी प्रेक्टिस करते स्टिंग ऑपरेशन में फंसे थे, लेकिन यह ऑपरेशन मीडिया का था ऐसे में पूर्व सरकार के कार्यकाल में इस स्टिंग ऑपरेशन को तव्वजों नहीं दी गई। पूर्व निकाय मंत्री अनिल जोशी की कुर्सी और विधायकी जाते ही डॉ. बीएस बल्ल सियासत और मेडिकल कॉलेज दोनों के निशाने पर थे। डॉ. बल्ल ने निजी प्रेक्टिस करते कैमरे में कैद होने के बाद दलील दी थी कि वो डॉक्टर हैं किसी की जान बचाना उनका धर्म है।
जबकि विजिलेंस के डीएसपी नवजोत सिंह का दावा था कि जान बचाना हर डाक्टर का धर्म है, लेकिन जान बचाने की कीमत वसूलना और वो भी सरकारी पद पर रहते हुए निजी प्रेक्टिस न करने के लिए सरकार से पैसा लेकर अगर निजी प्रेक्टिस की जा रही है तो वो गलत है। हालांकि विजिलेंस इस मामले को भ्रष्टाचार नहीं मान रही है, उसका तर्क है कि यह केवल विभाग से धोखा है।
एडवोकेट रवि बी महाजन कहते हैं कि विजिलेंस को इस मामले में भ्रष्टाचार क्यों नजर नहीं आ रहा है। जब करीब ढाई लाख रुपये वेतन ले रहे थे और साथ ही नॉन प्रेक्टिस अनाउंस भी। ऐसे में जो पैसा उन्हें मिल रहा था वो सरकार के खजाने से आता है। एक तरफ सरकार से पैसा ले रहे थे तो दूसरी तरफ सरकार के कानून तोड़ रहे थे। डॉ. बल्ल ने सरकार के नियमों की अनदेखी की और निजी प्रेक्टिस करते हुए सरकार से निजी प्रेक्टिस न करने का पैसा भी वसूला ऐसे में कानून की धाराएं कहती हैं कि यह मामला सरकार का फरमान न मानने और सरकार से धोखा करने से जुड़ा है। भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
जबकि विजिलेंस के डीएसपी नवजोत सिंह का दावा था कि जान बचाना हर डाक्टर का धर्म है, लेकिन जान बचाने की कीमत वसूलना और वो भी सरकारी पद पर रहते हुए निजी प्रेक्टिस न करने के लिए सरकार से पैसा लेकर अगर निजी प्रेक्टिस की जा रही है तो वो गलत है। हालांकि विजिलेंस इस मामले को भ्रष्टाचार नहीं मान रही है, उसका तर्क है कि यह केवल विभाग से धोखा है।
एडवोकेट रवि बी महाजन कहते हैं कि विजिलेंस को इस मामले में भ्रष्टाचार क्यों नजर नहीं आ रहा है। जब करीब ढाई लाख रुपये वेतन ले रहे थे और साथ ही नॉन प्रेक्टिस अनाउंस भी। ऐसे में जो पैसा उन्हें मिल रहा था वो सरकार के खजाने से आता है। एक तरफ सरकार से पैसा ले रहे थे तो दूसरी तरफ सरकार के कानून तोड़ रहे थे। डॉ. बल्ल ने सरकार के नियमों की अनदेखी की और निजी प्रेक्टिस करते हुए सरकार से निजी प्रेक्टिस न करने का पैसा भी वसूला ऐसे में कानून की धाराएं कहती हैं कि यह मामला सरकार का फरमान न मानने और सरकार से धोखा करने से जुड़ा है। भ्रष्टाचार का मामला बनता है।