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डॉक्टर का यह कारनामा चौंका देगा आपको

Mon, 15 Sep 2014 01:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 Sep 2014 01:19 PM IST
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Doctor Saved 16 Years Old Boy, which was in Coma

पश्चिमी कमान के कमांड हॉस्पिटल ने मेडिकल के इतिहास में एक नई इबारत लिख दी है। यहां के डाक्टरों ने रैबीज से पीड़ित 16 साल के बच्चे को मौत के मुंह से बचाने में कामयाबी हासिल की है। कर्नल एफएमएच अहमद ने बताया कि जब उनके पास बच्चा आया, तब वह कोमा में था।

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रैबीज कंफर्म करने के लिए उसका सैंपल बैंगलूरू स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोलाजिकल साइंस (एनआईएमएचएएनएस) में भेजा गया। जब तक उसकी रिपोर्ट आती, तब तक बच्चे का जरूरी इलाज करने में डाक्टर जुट गए।

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चार महीने के इलाज से मिली जिंदगी

Doctor Saved 16 Years Old Boy, which was in Coma

कोमा के दौरान बच्‍चा सांस ले सके, इसके लिए एक छोटा सा आपरेशन किया गया। खाने के लिए नली डाली गई। जांच में पता चला कि बच्चे का इम्यून सिस्टम काफी तेज था। इसका भी एक पाजीटिव असर पड़ा।

डाक्टर अहमद के मुताबिक, उन्होंने वह सभी काम किए, जो एक रैबीज के केस में किए जाने थे। करीब चार महीने के इलाज के बाद बच्चा कोमा से बाहर आ गया है। काफी हद तक उसमें मूवमेंट देखी गई है।

हालांकि रैबीज से उसके दिमाग में काफी गहरा असर पड़ा। उसे ठीक होने में समय लग सकता है। दो साल दिमाग डेवलप करता है, इसलिए हमे उम्मीद है कि बच्चा ठीक होगा।

चौ‌था केस, रेबीज के मरीज को बचाया गया

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डॉक्‍टर अहमद ने दावा किया कि यह देश का चौथा केस है, जिसे रैबीज होने के बाद बचाया जा सका हो। एक केस तो जरनल में पब्लिश हो चुका है, जबकि दो अन्य केस के बारे में भी पता चला है। हालांकि वे रिपोर्ट नहीं हुए हैं। उनकी तलाश की जा रही है।

यह एक टीम का प्रयास था। इसमें नर्सिंग स्टाफ, रेजिडेंट डाक्टर, सीनियर डाक्टर और पुणे स्थित आर्म्ड फोर्स मेडिकल कालेज के डाक्टरों  ने मिलकर काम किया।  उन्होंने बताया कि अक्सर सरकारी अस्पताल में रैबीज के केस को दुत्कार दिया जाता है।

उन्हें आइसोलेट कर घुट-घुट कर मरने दिया जाता है। यदि अस्पतालों में रैबीज के केस को अच्छी तरह से इलाज किया  जाए तो कई केस में पाजिटिव परिणाम देखे जा सकते हैं।

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सैंपल से पता चलेगा, बच्चा कैसे ठीक हुआ

Doctor Saved 16 Years Old Boy, which was in Coma

कमांड हॉस्पिटल के मुताबिक 25 मार्च को उसे एक स्ट्रे डाग ने काट लिया था। उसके बाद उसे एंटी रैबीज वैक्सीन के चार डोज दिए गए, लेकिन उसे बुखार आ गया और वह कोमा में चला गया।

आठ मई को बच्चे को कमांड में दाखिल कराया गया। कर्नल अहमद के मुताबिक उन्होंने बच्चे का सैंपल रख लिया है। बच्चा कैसे ठीक हुआ, इस बारे में पता नहीं चल सका है।

इसके लिए रिसर्च की जरूरत है। पता चला कि कई लोग रैबीज पर काम कर रहे हैं। यदि कोई सैंपल का इस्तेमाल करना चाहता है तो वह सैंपल ले सकता है।

हर साल 30 हजार लोग मरते हैं रैबीज से

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एक आंकड़े के मुताबिक पूरे विश्व में हर साल 60 हजार लोग रैबीज से मरते हैं, जबकि भारत में हर साल 30 हजार। यह बहुत बड़ा मौत का आंकड़ा है। पड़ोसी देशों में इस डिजीज को काफी कंट्रोल कर लिया गया है।

श्रीलंका, बांग्लादेश और थाइलैंड में रैबीज से नाम मात्र मौतें होती हैं, जबकि ये देश भारत से भी गरीब हैं। यहां पर रैबीज को रोकने के लिए काफी तेजी से काम करने की जरूरत है।

कोट

मैंने इस केस को पूरी तरह से रिवव्यू किया है। यह मेरे जीवन का पहला केस है, जिसमें रैबीज होने के बाद उसे बचा लिया हो।
डा. विवेक लाल, प्रोफेसर एंड हेड न्यूरोलाजी विभाग, पीजीआई

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