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भाजपा को गांव में पंचायत न करने दें, यदि करें तो उन्हें वहां से भगा दें
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चंडीगढ़। किसान आंदोलन के समर्थन में शनिवार को चंडीगढ़ में महापंचायत का आयोजन किया गया। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि इस समय धर्मयुद्ध चल रहा है, जो साथ न दे, उसका बहिष्कार करें। गांव में भाजपा के लोग पंचायत करने आएं तो उन्हें भगा दें। किसान आंदोलन के दौरान जिन लोगों पर मामले दर्ज हुए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। अदालत में उनके केस का खर्च किसान मोर्चा उठाएगा। अब तक 1700 से ज्यादा किसानों को नोटिस आ चुके हैं। किसी को भी दिल्ली पुलिस के पास नहीं जाना है। यदि पूछताछ के लिए पुलिस आती है तो घेरकर वहीं बैठा लें। उसे आदर से खाना खिलाएं। इसके बाद स्थानीय प्रशासन को सूचित कर उनके हवाले कर दें। सुपुर्द करने से पहले यह आश्वासन जरूर लें कि दोबारा गांव में पुलिस न आए।
चढ़ूनी ने कहा कि यह समय जागने का है। यदि लड़ाई हार गए तो सभी आर्थिक रूप से गुलाम हो जाएंगे। किसानों की बजाए कारपोरेट घरानों की आमदनी बढ़ी है। जब किसानों को देने की बारी आती है तो कहा जाता है कि खजाना खाली है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अंबानी, अडानी और रामदेव का सामान न खरीदें। सेक्टर 25 के रैली ग्राउंड में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर, जीप कार व अन्य वाहनों पर सवार होकर पहुंचे थे। इसमें किसानों के अलावा छात्र, नौजवान, मजदूर संगठन, वकील सहित अन्य संगठनों के लोग शामिल हुए।
दिल्ली में लोग कम नहीं हैं, वहां जाकर देखो, हजारों डटे हैं
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं दिल्ली के मोर्चे में संख्या कम हो रही है। जबकि ऐसा नहीं है। यह सब आंदोलन को कमजोर करने की कवायद चल रही है। वहां जाकर देखो बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में डटे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में महापंचायत हो रही है। चढ़ूनी ने कहा कि हर गांव से 40 लोग दिल्ली जाएं। जो लोग दिल्ली मोर्चे में जाएं गांव के बाकी लोग उस परिवार की देखभाल करें।
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रुलदू सिंह को हाथ लगाकर दिखाओ
जोगिंदर सिंह उगराहां ने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि रुलदू सिंह मानसा मंच पर हैं। पुलिस उनको ढूंढ रही है। रुलदू सिंह को कोई हाथ लगाकर दिखाए। उन्होंने कहा कि 37 लोगों पर धारा 307 के तहत केस दर्ज कराए गए हैं।
माड़ा समझौता नहीं करेंगे, वादा करते हैं: रुलदू सिंह मानसा
किसान नेता रुलदू सिंह मानसा ने कहा कि माड़ा (घाटे का) समझौता नहीं करेंगे। तीनों कृषि कानूनों को वापस करना ही होगा। कमेटी बनाने का मतलब लड़ाई को ठंडे बस्ते में डालना है। लड़कर मर जाना बेहतर है। यदि जमीन नहीं बचेगी तो रोजगार भी नहीं रहेगा। रोटी भी नहीं रहेगी।
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चढ़ूनी ने कहा कि यह समय जागने का है। यदि लड़ाई हार गए तो सभी आर्थिक रूप से गुलाम हो जाएंगे। किसानों की बजाए कारपोरेट घरानों की आमदनी बढ़ी है। जब किसानों को देने की बारी आती है तो कहा जाता है कि खजाना खाली है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अंबानी, अडानी और रामदेव का सामान न खरीदें। सेक्टर 25 के रैली ग्राउंड में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर, जीप कार व अन्य वाहनों पर सवार होकर पहुंचे थे। इसमें किसानों के अलावा छात्र, नौजवान, मजदूर संगठन, वकील सहित अन्य संगठनों के लोग शामिल हुए।
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दिल्ली में लोग कम नहीं हैं, वहां जाकर देखो, हजारों डटे हैं
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं दिल्ली के मोर्चे में संख्या कम हो रही है। जबकि ऐसा नहीं है। यह सब आंदोलन को कमजोर करने की कवायद चल रही है। वहां जाकर देखो बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में डटे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में महापंचायत हो रही है। चढ़ूनी ने कहा कि हर गांव से 40 लोग दिल्ली जाएं। जो लोग दिल्ली मोर्चे में जाएं गांव के बाकी लोग उस परिवार की देखभाल करें।
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रुलदू सिंह को हाथ लगाकर दिखाओ
जोगिंदर सिंह उगराहां ने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि रुलदू सिंह मानसा मंच पर हैं। पुलिस उनको ढूंढ रही है। रुलदू सिंह को कोई हाथ लगाकर दिखाए। उन्होंने कहा कि 37 लोगों पर धारा 307 के तहत केस दर्ज कराए गए हैं।
माड़ा समझौता नहीं करेंगे, वादा करते हैं: रुलदू सिंह मानसा
किसान नेता रुलदू सिंह मानसा ने कहा कि माड़ा (घाटे का) समझौता नहीं करेंगे। तीनों कृषि कानूनों को वापस करना ही होगा। कमेटी बनाने का मतलब लड़ाई को ठंडे बस्ते में डालना है। लड़कर मर जाना बेहतर है। यदि जमीन नहीं बचेगी तो रोजगार भी नहीं रहेगा। रोटी भी नहीं रहेगी।