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Chandigarh News: दस हजार अज्ञात शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग का अभी इंतजार, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Sun, 25 Aug 2024 04:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Aug 2024 04:54 AM IST
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DNA profiling of ten thousand unidentified bodies still awaited, High Court takes cognizance
-जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर
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-पोक्सो एक्ट के मामले में डीएनए रिपोर्ट पेश करने की याचिका में थी मांग

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पोक्सो एक्ट में डीएनए रिपाेर्ट पेश करने की मांग वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हरियाणा में 10 हजार शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग पेंडिंग होने और डीएनए रिपोर्ट पेश करने की मांग वाली बढ़ती याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने अब कुछ सवाल उठाते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया है।


पोक्सो एक्ट के मामले में फरीदाबाद निवासी युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए डीएनए रिपोर्ट पेश करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने पाया कि बड़ी संख्या में जांच एजेंसी द्वारा डीएनए नमूनों के परिणाम प्राप्त करने में उदासीन दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति का डीएनए अलग होता है और इसकी रिपोर्ट जांच एजेंसी के लिए मददगार साबित हो सकती है। आरोपी दोषी है या बेगुनाह साबित करने की वैज्ञानिक पद्धति है। एक ओर पोक्सो एक्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई हैं जबकि दूसरी ओर जांच और मुकदमे में भी देरी हो रही है। यह उदासीन दृष्टिकोण वाले अधिकारियों की असंवेदनशीलता और बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाता है। सुनवाई में फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 5 साल में अकेले फरीदाबाद में 73 मामलों में डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है और इनमें से 40 मामलों में आरोपी हिरासत में हैं। सरकार ने बताया था कि प्रदेश में 10 हजार शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग लंबित है। हाईकोर्ट ने कहा कि एजेंसी की सुस्ती आपराधिक न्याय प्रशासन तंत्र को अवरुद्ध करती है। डीएनए रिपोर्ट पेश करने में देरी से विचाराधीन कैदियों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगता है, जो कल्याणकारी लोकतांत्रिक राज्य के लिए अनुचित है। डीएनए रिपोर्ट नेगटिव हो तो आरोपी बेगुनाह साबित हो सकता है और लेकिन देरी होने से बेगुनाह को जेल में रहना पड़ता है। देरी पीड़ित के न्याय के अधिकार का हनन करती है, वह भी तब जब महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष कानून हैं।
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हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के लिए उठाए गए हैं सवाल

1. क्या डीएनए रिपोर्ट पर विशेषज्ञों और डॉक्टरों की राय वीसी से लेकर समय की बचा सकतें हैं?

2. क्या सभी हितधारक के लिए काम की समय-सीमा और प्राप्त नमूनों के उचित प्रबंधन को निर्धारित करने के लिए दिशा-निर्देश हैं?

3. क्या नमूने समय पर प्रस्तुत करने और संबंधित न्यायालयों में रिपोर्ट पेश करने जिला स्तर पर निगरानी जरूरी है?

4. क्या हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने नमूनों की सटीकता से समझौता न हो इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाई है?
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