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अब गठिया पर भी हो सकेगी डॉक्टर ऑफ मेडिसिन
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Nov 2013 10:58 AM IST
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पीजीआई में अब गठिया पर डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (डीएम) की पढ़ाई होगी। पीजीआई की स्टेंडिंग कमेटी ने इसके लिए मंजूरी दे दी है।
उम्मीद है कि जुलाई 2014 से इसकी पढ़ाई भी शुरू हो जाए। इसके लिए तीन सीटों की मंजूरी दी गई है। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि पीडिएट्रिक में भी डीएम कराने का फैसला लिया गया है।
यह जनवरी में शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गठिया रोग के विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी। अब तक देश के पांच संस्थानों में ही गठिया पर डीएम की पढ़ाई कराई जाती है।
इनमें चैन्नई, हैदराबाद, लखनऊ, बंगलूरू और एक अन्य संस्थान शामिल है। एम्स में भी यह पढ़ाई नहीं कराई जाती।
गठिया के लिए डॉक्टर और विभाग नहीं
नॉर्थ इंडिया में पीजीआई को छोड़कर किसी भी संस्थान में न तो गठिया के लिए अलग से विभाग है और न डॉक्टर है। पीजीआई के अलावा लुधियाना में ही दो गठिया के विशेषज्ञ हैं।
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हिमाचल और जम्मू में एक भी नहीं है। विशेषज्ञों की कमी की वजह से लोग सीधे ऑर्थोपेडिक के पास पहुंचते हैं। यदि वे सीधे तौर पर गठिया विशेषज्ञ के पास पहुंचे तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
हड्डी रोग और गठिया में अंतर
आमतौर पर लोग हड्डी के दर्द को ही गठिया समझते हैं, लेकिन इनमें काफी अंतर है। गठिया का दर्द जोड़ों में होता है और यह इम्यून सिस्टम के बदलाव से होता है।
गठिया के रोग में इम्युन सिस्टम को ठीक करने के दवा दी जाती है। यह दोनों रोग के बीच बेसिक अंतर है। इससे हृदय, नेत्र और अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते हैं।
पीजीआई में गठिया के लिए मंगलवार व शुक्रवार को क्लीनिक चलता है। पीजीआई में गठिया के 36 हजार मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा है।
पीजीआई में होगा सीएमई
पीजीआई में 10 नवंबर को रेयूमेटोलॉजी अपडेट 2013 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 200 से अधिक डेलिगेशन आने की संभावना है। कार्यक्रम की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. शेफाली खन्ना शर्मा ने बताया कि एक बुक भी रिलीज की जाएगी।
इसमें महिला और बच्चों में होने वाली गठिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। सबसे यह डिजीज महिलाओं में होती है। बच्चों में इसकी संख्या काफी अधिक है।
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उम्मीद है कि जुलाई 2014 से इसकी पढ़ाई भी शुरू हो जाए। इसके लिए तीन सीटों की मंजूरी दी गई है। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि पीडिएट्रिक में भी डीएम कराने का फैसला लिया गया है।
यह जनवरी में शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गठिया रोग के विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी। अब तक देश के पांच संस्थानों में ही गठिया पर डीएम की पढ़ाई कराई जाती है।
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इनमें चैन्नई, हैदराबाद, लखनऊ, बंगलूरू और एक अन्य संस्थान शामिल है। एम्स में भी यह पढ़ाई नहीं कराई जाती।
गठिया के लिए डॉक्टर और विभाग नहीं
नॉर्थ इंडिया में पीजीआई को छोड़कर किसी भी संस्थान में न तो गठिया के लिए अलग से विभाग है और न डॉक्टर है। पीजीआई के अलावा लुधियाना में ही दो गठिया के विशेषज्ञ हैं।
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हिमाचल और जम्मू में एक भी नहीं है। विशेषज्ञों की कमी की वजह से लोग सीधे ऑर्थोपेडिक के पास पहुंचते हैं। यदि वे सीधे तौर पर गठिया विशेषज्ञ के पास पहुंचे तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
हड्डी रोग और गठिया में अंतर
आमतौर पर लोग हड्डी के दर्द को ही गठिया समझते हैं, लेकिन इनमें काफी अंतर है। गठिया का दर्द जोड़ों में होता है और यह इम्यून सिस्टम के बदलाव से होता है।
गठिया के रोग में इम्युन सिस्टम को ठीक करने के दवा दी जाती है। यह दोनों रोग के बीच बेसिक अंतर है। इससे हृदय, नेत्र और अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते हैं।
पीजीआई में गठिया के लिए मंगलवार व शुक्रवार को क्लीनिक चलता है। पीजीआई में गठिया के 36 हजार मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा है।
पीजीआई में होगा सीएमई
पीजीआई में 10 नवंबर को रेयूमेटोलॉजी अपडेट 2013 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 200 से अधिक डेलिगेशन आने की संभावना है। कार्यक्रम की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. शेफाली खन्ना शर्मा ने बताया कि एक बुक भी रिलीज की जाएगी।
इसमें महिला और बच्चों में होने वाली गठिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। सबसे यह डिजीज महिलाओं में होती है। बच्चों में इसकी संख्या काफी अधिक है।