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महापर्व की धूम: दिवाली पर गाय के गोबर से बने दीपक से महकेंगे चंडीगढ़ के घर, धनतेरस पर गौरीशंकर सेवा दल बांटेगा फ्री

Mon, 25 Oct 2021 11:10 AM IST
प्रमोद कुमार आरती, अमर उजाला, चंडीगढ़
आरती, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Mon, 25 Oct 2021 11:10 AM IST
सार

इस दिवाली चंडीगढ़ के लोगों को 75 हजार दीपक गाय के गोबर से बने बांटे जाएंगे। यह काम करेगा गौरी शंकर सेवा दल, जो सेक्टर-45 में गोशाला का संचालन करता है। इन दीयों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है। गोबर से किसी प्रकार की दुर्गंध न आए, इसलिए उसमें इत्र मिलाया जाता है। इसकी महक पूरे घर-आंगन में होती है।

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Diwali will be celebrated in Chandigarh with lamps made of cows dung
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : एएनआई

विस्तार

हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय के महत्व को हर कोई समझे, इसलिए गाय के गोबर से गौरी शंकर सेवा दल हर साल दीपक बनाकर चंडीगढ़ के लोगों में वितरित करता है। इस बार भी गोबर से बने दीपक घर को महकाएंगे। ये दीपक घर-घर पहुंचेंगे। धनतेरस पर यह दीपक बांटे जाएंगे। दल की ओर से 75 हजार दीपक बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। सेक्टर-45 स्थित गोशाला का संचालन गौरी शंकर सेवा दल कर रहा है।

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950 गायों की सेवा में 45 सेवक
यहां 950 गायें हैं। इनकी सेवा के लिए 45 सेवक लगे हैं। वे दिन-रात गायों की सेवा करते हैं। दल का उद्देश्य है कि गायों के महत्व को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने गाय के गोबर से दीपक बनाने की योजना बनाई, जो सफल रही। गोबर से किसी प्रकार की दुर्गंध न आए, इसलिए उसमें इत्र मिलाया जाता है। इसकी महक पूरे घर-आंगन में होती है।  
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कोरोना के दौरान 45 हजार दीपक बांटे गए
गौरी शंकर सेवा दल केसदस्य विनोद कुमार कहते हैं कि यह मुहिम कई वर्षों से चली आ रही है। इस कार्य को करने में आनंद की प्राप्ति होती है। पिछले साल कोरोना के समय 45 हजार दीपक बनाकर लोगों तक पहुंचाए गए। कहते हैं कि गायों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकने के लिए हमने यह कदम उठाया, ताकि लोग गायों से अधिक प्रेम करें। लोगों की ओर से दान भी दिया जाता है, जिससे गायों की सेवा की जाती है। गाय के लाभों के बारे में सबको जानना जरूरी है, इसलिए दीपक बनाने की मुहिम छेड़ी गई।


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गोबर के प्रवेश के बाद ही आती है लक्ष्मी
गौरी शंकर सेवा दल के अध्यक्ष रमेश कुमार का कहना है कि पहले के समय में घर का लेपन गोबर से होता था। इससे घर शुद्ध होता था। उसके साथ लक्ष्मी का प्रवेश होता था। इससे सुख-समृद्धि घर में आती थी। अब लेपन का काम बहुत कम हो गया है। ऐसे में गोबर से बनी सामग्री घर में पहुंचे, ताकि लक्ष्मी का वास हो, इसलिए भी दीपक घर-घर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। धनतेरस वाले दिन गोशाला आने वाले लोग दीपक लेकर जाते हैं। दो-तीन दिन तक दीपक दिए जाते हैं।

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दीपक की महक से भाग जाएंगे डेंगू के मच्छर
गोशाला संचालक के मुताबिक गाय के गोबर से बने दीपक का प्रयोग करने से कई लाभ होते हैं। इस दीपक के मिश्रण में कपूर, हवन सामग्री, पीली सरसों समेत कई चीजें मिलाई जाती हैं। दीपक जलने से वातावरण शुद्ध होता है। इसके साथ ही कीटाणु भी मिश्रण से भागेंगे। आजकल डेंगू पैर पसार रहा है। मच्छरों का प्रकोप हो रहा है। इस दीपक की लौ से होने वाली महक उन मच्छरों को दूर भगाने का काम करेगी।

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