फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Crops damaged due to hailstorm with rain in Haryana

हरियाणा: बारिश के साथ ओलावृष्टि, किसानों की तबाह हुई छह माह की मेहनत, मंडियों में पड़ा 3 लाख एमटी धान भीगा

Mon, 25 Oct 2021 06:16 AM IST
bhupendra singh भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 25 Oct 2021 06:16 AM IST
सार

बारिश में भीगने से धान का दाना काला पड़ने की आशंका है। बासमती धान की फसल की अभी कटाई नहीं हुई है, खड़ी फसल को भी नुकसान का अंदेशा है। बारिश से  सरसों और आलू की बिजाई भी प्रभावित होगी। अक्तूबर माह में बारिश का टूटा 10 साल का रिकार्ड।

विज्ञापन
Crops damaged due to hailstorm with rain in Haryana
झज्जर की मंडी में बारिश में भीगता धान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में बारिश और ओला वृष्टि से किसानों की छह माह की मेहनत बर्बाद हो गई। रविवार को प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश हुई।  जबकि सोनीपत, यमुनानगर, महेंद्रगढ़ के कई गांवों में ओलावृष्टि भी हुई है। बेमौसमी बारिश और तेज हवाओं से धान, कपास और सब्जी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश से प्रदेश की मंडियों में पड़ा करीब 3 लाख मीट्रिक टन धान भीग गया, जबकि 6 लाख हेक्टेयर में लगी बासमती धान की फसल की कटाई अभी नहीं हुई है। 

विज्ञापन


बारिश के कारण सरसों और आलू की बिजाई भी प्रभावित होगी। पिछले दस साल में अक्तूबर माह में बारिश का रिकार्ड भी टूट गया है। प्रदेश में इस वर्ष अब तक अक्तूबर माह में 21.3 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
विज्ञापन


रविवार को करनाल, पानीपत, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल और यमुनानगर में लगभग 20 से 25 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। इसके अलावा पंचूकला 23.5, सोनीपत 4.5 एमएम और अन्य जिलों में भी बूंदाबादी और बारिश हुई है। इससे न सिर्फ मंडियों में आई धान की फसल बर्बाद हुई है बल्कि खतों में खड़ी पकी फसल भी तबाह हो गई है। बारिश से धान की फसल जमीन पर गिर गई है और कपास के फूल भी गिर गए हैं। बारिश से फसलों के उत्पादन पर असर पड़ेगा, साथ ही चावल और कपास के काला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


6 लाख हेक्टेयर बासमती की फसल खेतों में खड़ी
प्रदेश में इस बार कुल 14 लाख हेक्टेयर में धान की बिजाई की गई है। इनमें से 6 लाख हेक्टेयर में बासमती धान है और अभी इसकी कटाई नहीं हो पाई है जबकि 6.5 लाख हेक्टेयर रकबे में कपास की फसल लगाई गई है।  कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश से नुकसान का प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं, इससे रबी सीजन की बिजाई पर भी असर पड़ेगा। मोटे धान की कटाई  और उसकी बिक्री भी दो से तीन तक दिन प्रभावित रहेगी।

3 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में 
अब तक हरियाणा की करीब 200 मंडियों में 38.74 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। जबकि मंडियों में 41 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। अभी 3 लाख एमटी धान मंडियों में पड़ा है। सरकार का दावा है कि 79 प्रतिशत तक धान का उठान हो चुका है, हालांकि अभी भी मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। अभी तक किसानों को 4500 करोड़ से रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

अक्तूूबर माह में बारिश
वर्ष         बारिश

  • 2010      10.6
  • 2011       0
  • 2012       4
  • 2013       9.9
  • 2014      10.9
  • 2015      3.8
  • 2016      5.3
  • 2017       0
  • 2018      3
  • 2019      5.1
  • 2020      0
  • 2021     21.3

 

बारिश से फसलों को काफी नुकसान है। अक्तूबर माह में अधिक बारिश से फसलों पर असर पड़ना तय है। बासमती धान और कपास अभी खेतों में खड़ी है, उसकी कटाई पर भी असर पड़ेगा। रबी सीजन में फसलों की बिजाई पर भी असर पड़ेगा। सर्वे के बाद ही नुकसान का पता लग सकेगा। - डॉ. जगराज ढांडी, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग।



 इस मौसम में इसे अधिक बारिश माना जाएगा। अक्तूबर में इतनी बारिश नहीं होती है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से तापमान में गिरावट आई है। आगामी दिनों में मौसम साफ रहेगा। -डॉ. मनमोहन सिंह, मौसम वैज्ञानिक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed