'बताओ, आखिर कैसे किया जाए आशुतोष महाराज का संस्कार'
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आखिर आशुतोष महाराज का संस्कार कैसे किया जाए? ये सवाल दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से पूछा गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संस्थान को एक प्रस्ताव तैयार करके जवाब देने को कहा है।
गौरतलब है कि पंजाब के जालंधर में नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान प्रमुख जनवरी माह से समाधि में लीन है। उन्हें क्लीनिकली डेड करार दिया गया है, लेकिन संस्थान यह मानने को तैयार नहीं है।
मामले में जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एमएस चौहान की डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया है कि क्लीनिकल डेड व्यक्ति को समाधिलीन बताकर जीवित कैसे माना जा सकता है।
यह तर्क देते हुए बेंच ने कहा है कि संस्थान प्रस्ताव बनाए कि आखिर आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार किस विधि से किया जाए।
बेंच ने कहा है कि संस्थान को इस बात की मिसाल पेश करनी चाहिए कि धार्मिक मसले आपस में सुलझाए जा सकते हैं। बेंच के सवालों पर संस्थान कोई संतुष्ट जवाब नहीं दे सका।
मामले की अगली सुनवाई अब 30 नवंबर को
इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से बहस के लिए पहुंचे सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रंजीत कुमार ने बेंच के समक्ष सुझाव पेश किया कि एक उच्चस्तरीय मेडिको-लीगल कमेटी गठित कर दी जाए, लेकिन बेंच ने यह सुझाव स्वीकार नहीं किया।
उधर, बेंच ने यह भी कहा है कि अंतिम संस्कार के वक्त दलीप झा को भी रस्में देखने की अनुमति पर गौर किया जाना चाहिए। हालांकि शव प्राप्त करने के लिए दलीप झा की ओर से आशुतोष को पिता साबित करने की मंशा से डीएनए टेस्ट की मांग पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बेंच ने कहा है कि इस पर गौर किया जा सकता है।
यदि वह बेटा है तो अपने पिता की संपत्ति पर हक के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ सकता है। दलीप झा के वकील एसपी सोई ने कहा कि आशुतोष महाराज को सरकार क्लीनिकल डेड मान चुकी है। लिहाजा अंतिम संस्कार करना ही होगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने सुनवाई 30 नवंबर तक टाल दी है।