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आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार पर सुनवाई 15 को

Thu, 11 Dec 2014 07:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Dec 2014 07:32 PM IST
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Divya Jyoti Jagriti Sansthan Ashutosh Maharaj Funeral Case

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज के संस्कार मामले की सुनवाई आज स्थगित हो गई है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 दिसंबर को होगी। बता दें कि आशुतोष महाराज के 15 दिसंबर तक अंतिम संस्कार किए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार को आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा करने वाले दिलीप झा ने हाईकोर्ट में अलग-अलग अपील दाखिल की थी।

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पंजाब सरकार ने संस्थान का पक्ष लेते हुए एक अर्जी दाखिल की थी, जिस पर रजिस्ट्री में ही आपत्ति लग गई। संस्थान और दिलीप झा की अपील पर मंगलवार को आपत्ति लग गई थी। बुधवार को दोनों ने संशोधन के साथ अपील दाखिल की। आपत्तियां दूर हो गई हैं। वीरवार को जस्टिस सूर्यकांत की डिवीजन बेंच अपील पर सुनवाई करेगी।
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संस्थान ने जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए दलील दी है कि बेंच ने मौलिक अधिकारों के तहत दिलीप झा की शव हासिल करने की मांग नामंजूर कर दी तो मुख्य मामला ही खारिज हो जाना चाहिए था।
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सरकार को अंतिम संस्कार का हक देना गलत है। दलील दी गई है कि शव प्राप्त करने का हक दिलीप झा ने मांगा था, लेकिन संस्थान ने ऐसी कोई मांग नहीं थी।

समाधि को अवैज्ञानिक ठहराना गलत

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संस्थान ने यह दलील भी दी है कि एकल बेंच ने समाधि को अवैज्ञानिक ठहराया है, लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर के अध्ययनों में समाधि को वैज्ञानिक तौर पर अभी तक खारिज नहीं किया गया है। समाधि को अवैज्ञानिक ठहराना गलत है।

यह भी कहा है कि अंतिम संस्कार के लिए 15 दिन का समय तय करके 30 दिन में फैसले को चुनौती देने के हक को भी नजरअंदाज कर दिया गया। दिलीप झा ने अपनी संशोधित अपील में फिर से शव हासिल करने की मांग की है।

उनका कहना है कि सरकार को अंतिम संस्कार का हक केवल लावारिस शवों के मामले में दिया जा सकता है। दिलीप का कहना है कि वह आशुतोष महाराज के बेटे हैं और आशुतोष महाराज की पहचान है। शव उसे सौंपा जाना चाहिए ताकि वह वारिस के तौर पर शव का अंतिम संस्कार कर सके।

संस्थान के बचाव में उतरी पंजाब सरकार

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सतलोक आश्रम हिसार संचालक रामपाल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई में हरियाणा सरकार ने कहा था कि यदि वारंट की पालना की तो माहौल बिगड़ सकता है। अब हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने भी ऐसा ही पक्ष रखा है।

एकल बेंच में सुनवाई के लिए सरकार ने रजिस्ट्री में एक अर्जी दायर की। कहा है कि यह धार्मिक मामला है। सरकार यदि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अंतिम संस्कार करती है तो इससे श्रद्धालुओं में आक्रोश पैदा होगा और माहौल बिगड़ सकता है।

यह मांग भी की कि अंतिम संस्कार या तो धार्मिक व्यक्तियों से कराया जाए या फिर संस्थान को ही यह हक दे दिया जाए। सरकार की इस अर्जी पर रजिस्ट्री में ही आपत्ति लग गई। इस अर्जी पर फिलहाल सुनवाई नहीं हो सकेगी।

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