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आशुतोष महाराज के संस्कार पर सस्पेंस बरकरार

Wed, 10 Dec 2014 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 10 Dec 2014 03:14 PM IST
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 Divya Jyoti Jagriti Sanstha Ashutosh Maharaj Funeral Issue

जालंधर में नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा करने वाले दिलीप झा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से पिता के दाह संस्कार का हक मांगा है।

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झा ने हाईकोर्ट की एकल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए दलील दी है कि राज्य सरकार को दाह संस्कार का हक दिया जाना गलत है, क्योंकि केवल लावारिस शवों के मामले में ही ऐसा हो सकता है। सोमवार को हाईकोर्ट में दाखिल हुई यह अपील एक-दो दिन में डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आ सकती है।
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आशुतोष महाराज के दाह संस्कार का हक मांगा

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दिलीप झा ने अपील में कहा है कि एकल बेंच ने सरकार को कमेटी बनाकर आशुतोष महाराज के शव के निपटान का हक दिया है। सरकार के पास यह हक उसी सूरत में होता है, जब शव की शिनाख्त नहीं हो और उसके वारिसों का कोई पता न चले।

झा ने अपील में दावा किया है कि आशुतोष महाराज और महेश कुमार झा एक ही व्यक्ति हैं। दिलीप ने इस संबंध में अपने मामा जीतन का शपथ पत्र दाखिल किया है।

इसके अलावा आशुतोष महाराज ने महेश कुमार झा से अपना नाम आशुतोष महाराज होने का रजिस्टर्ड डाक पत्र भी वर्ष 1999 में दलीप को भेजे जाने का हवाला दिया गया।

बेटा होने के सबूत दे चुके हैं दिलीप

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अपील में कहा गया है कि उसने आशुतोष महाराज का इकलौता बेटा होने के संबंध में स्कूल सर्टिफिकेट और अन्य सबूत दिए। इसके अलावा उसने डीएनए टेस्ट कराने की इजाजत भी मांगी।

अपील में कहा गया कि इसके बावजूद भी एकल बेंच ने आशुतोष महाराज और महेश कुमार को एक ही व्यक्ति मानने से गलत तरीके से इनकार किया है। यह भी कहा गया कि डीएनए टेस्ट कराने की अर्जी नामंजूर करना भी गलत है।

हवाला दिया गया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री एनडी तिवारी के मामले में डीएनए टेस्ट कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी को डीएनए टेस्ट कराने की छूट है।

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15 दिन तय करने को भी गलत बताया

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झा ने अपील में कहा है कि वह आशुतोष महाराज का बेटा है और उसे अंतिम रस्मों का हक दिया जाना चाहिए। शव उसके हवाले किया जाना चाहिए ताकि वह लखनौर (मधुबनी-बिहार) ले जाकर अंतिस संस्कार कर सके, क्योंकि वहीं सभी रिश्तेदार भी हैं।

दाह संस्कार के लिए 15 दिन तय करने को भी गलत ठहराया। दलील दी कि किसी फैसले के खिलाफ अपील के लिए 30 दिन होते हैं, लेकिन इस मामले में केवल 15 दिन निर्धारित करने से अपील करने का हक मारा जाएगा। अपील के लिए समय 30 दिन करने की मांग भी की गई और तब तक एकल बेंच के फैसले पर रोक लगाई जाए।

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