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Chandigarh News: गठिया के इलाज में दवा की खुराक बांटने से 16 सप्ताह में दिखा बेहतर असर

Mon, 12 Oct 2026 01:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:57 AM IST
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Dividing the medication dosage for arthritis treatment showed better results over 16 weeks.
गठिया की दवा लेने का तरीका बदला तो 16 सप्ताह में दिखा बेहतर असर
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पीजीआई समेत छह चिकित्सा संस्थानों में 253 मरीजों पर हुआ अध्ययन, मेथोट्रेक्सेट की खुराक के तरीके से शुरुआती उपचार के परिणामों पर पड़ा असर

विश्व गठिया दिवस पर खास
चंडीगढ़। रूमेटाइड अर्थराइटिस यानी गठिया से जूझ रहे मरीजों के लिए दवा लेने का तरीका उपचार के शुरुआती परिणामों को प्रभावित कर सकता है। पीजीआई समेत देश के छह चिकित्सा संस्थानों में 253 मरीजों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि मेथोट्रेक्सेट की साप्ताहिक खुराक सुबह और शाम दो हिस्सों में देने से 16 सप्ताह में बीमारी के लक्षणों पर बेहतर नियंत्रण देखने को मिला। हालांकि, 24 सप्ताह के मुख्य परिणाम में दोनों तरीकों में किसी एक की श्रेष्ठता साबित नहीं हुई। यह अध्ययन क्लिनिकल रूमेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में पीजीआई के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एंड रूमेटोलॉजी विभाग और आंतरिक चिकित्सा विभाग से जुड़े डॉ. संजय जैन, डॉ. चंद्र भूषण प्रसाद और डॉ. वरुण धीर समेत देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने यह जानने का प्रयास किया कि मेथोट्रेक्सेट की साप्ताहिक खुराक एक साथ लेने और उसे दो हिस्सों में बांटकर लेने से उपचार के परिणामों में क्या अंतर आता है।
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253 मरीजों पर किया गया परीक्षण

अध्ययन में सक्रिय रूमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित 253 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें 83 प्रतिशत महिलाएं थीं। मरीजों की औसत आयु 42.2 वर्ष और बीमारी की औसत अवधि 2.1 वर्ष थी। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। पहले समूह के 128 मरीजों को सप्ताह में एक बार मेथोट्रेक्सेट की कुल 25 मिलीग्राम खुराक दो हिस्सों में दी गई। इसमें 15 मिलीग्राम सुबह और 10 मिलीग्राम शाम को दिया गया। दूसरे समूह के 125 मरीजों ने सप्ताह में एक बार पूरी 25 मिलीग्राम खुराक एक ही समय पर ली। दोनों समूहों का आकलन 16 और 24 सप्ताह पर किया गया। इसमें लक्षणों में सुधार और दूसरी दवा जोड़ने की जरूरत जैसे पहलुओं की तुलना की गई।
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16 सप्ताह में उपचार की प्रतिक्रिया बेहतर

शोधकर्ताओं के अनुसार, खुराक बांटकर लेने वाले मरीजों में 16 सप्ताह पर उपचार के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया की दर अधिक रही। दोनों समूहों के बीच 12.3 प्रतिशत अंक का अंतर मिला, जो सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। इसके अलावा, इस समूह के कम मरीजों को बीमारी नियंत्रित करने के लिए उपचार में दूसरी दवा जोड़ने की जरूरत पड़ी। इस मामले में दोनों समूहों के बीच 19.5 प्रतिशत अंक का अंतर दर्ज किया गया। हालांकि, 24 सप्ताह के मुख्य परिणाम में दोनों तरीकों में किसी एक को बेहतर साबित नहीं किया जा सका।

दुष्प्रभावों की निगरानी भी जरूरी

अध्ययन में खुराक बांटकर लेने वाले समूह में लिवर एंजाइम बढ़ने और दवा सहन करने में परेशानी के मामले संख्यात्मक रूप से अधिक रहे। इसलिए उपचार के संभावित लाभ के साथ दुष्प्रभावों पर नजर रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेथोट्रेक्सेट लेते समय नियमित जांच और चिकित्सकीय निगरानी महत्वपूर्ण है। मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना दवा की खुराक, समय या उसे लेने का तरीका न बदलें।


क्या है रूमेटाइड अर्थराइटिस

रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों की अंदरूनी परत पर हमला करती है। इससे दर्द, सूजन और अकड़न होती है। सुबह उठने पर हाथ-पैरों के जोड़ों में अकड़न इसका प्रमुख लक्षण है। यह बीमारी आमतौर पर हाथों, कलाइयों और पैरों के छोटे जोड़ों को प्रभावित करती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। दवाओं और नियमित चिकित्सकीय देखभाल से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
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