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जिला अदालत ने जेपी कंपनी को दिया 10 दिन का समय

Wed, 01 Jul 2020 12:45 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 12:45 AM IST
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District court gave 10 days to Jaypee Company
चंडीगढ़। जेपी कंपनी को गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पर स्टे देने के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। जेपी कंपनी ने जिला अदालत में आईपीसी की धारा 17 के तहत आवेदन दायर किया है। इस धारा में यदि कोई संपत्ति से संबंध रखता है तो उसे उस संपत्ति से संबंधित दस्तावेज पेश करना अनिवार्य है। आवेदन के आधार पर जिला अदालत ने जेपी कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। जेपी कंपनी के पक्ष रखने के बाद नगर निगम की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा।
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नगर निगम ने जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के स्टे ऑर्डर के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। जेपी प्लांट के अधिकारियों ने कहा कि सुनवाई के बाद जो आदेश होगा, उसके अनुसार आगे की योजना तैयार की जाएगी। नगर निगम ने सेक्टर-25 स्थित जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट का पिछले हफ्ते पजेशन लिया था। निगम ने प्लांट में अपने कर्मचारी लगाकर कचरा प्रोसेसिंग का काम भी शुरू करा दिया था। दूसरी ओर, कंपनी के अधिकारी जिला अदालत से स्टे ऑर्डर ले आए। इसमें कंपनी को एक माह का समय देने का आदेश दिया गया था। हालांकि, कंपनी के अधिकारी स्टे होने की बात कहते रहे, लेकिन निगम के अधिकारियों ने कहा कि लिखित आदेश न आने तक हम किसी भी बात पर विश्वास नहीं करेंगे। हालांकि, कंपनी के अधिकारी निगम पर अदालत की अवमानना का भी आरोप लगा रहे हैं।
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हाईकोर्ट ने निगम को ही दी प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी
नगर निगम ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि जेपी कंपनी अनुबंध के अनुरूप काम नहीं कर रही थी, इसलिए एनजीटी के निर्देशानुसार प्लांट को कब्जे में लिया गया। कब्जा लेने के बाद कंपनी को स्टे देना ठीक नहीं है। क्योंकि भविष्य में लगने वाला जुर्माना निगम को भरना है न कि कंपनी को। उसके बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम को ही प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी दी है।
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कचरा निस्तारण नहीं हुआ तो निगम को देना होगा जुर्माना
एनजीटी ने मामले में सुनवाई के बाद निर्देश दिया था कि जेपी प्लांट कचरे का निस्तारण कर सकता है तो ठीक है अन्यथा निगम इस मामले में निर्णय ले। कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो निगम को एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा। उसके बाद फरवरी माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि जेपी प्लांट को निगम टेकओवर करेगा। प्लांट के अधिकारियों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन प्लांट के अधिकारी सदन के फैसले के खिलाफ जिला अदालत चले गए थे।
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