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Chandigarh News: पीजीआई में ठेका कर्मचारियों के भुगतान पर विवाद, 76 करोड़ के उपयोग की जांच की मांग

Tue, 17 Mar 2026 01:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:33 AM IST
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Dispute over payment of contract employees at PGI; demand for investigation into use of Rs 76 crore
चंडीगढ़। पीजीआई में ठेका कर्मचारियों के भुगतान को लेकर नया विवाद सामने आया है। पीजीआई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव अंकिता मिश्रा बुंदेला को पत्र लिखकर संस्थान में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए जारी करीब 76 करोड़ रुपये के उपयोग और भुगतान की जांच कराने की मांग की है।
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जेएसी के चेयरमैन अश्वनी कुमार मुंजाल की ओर से भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि पीजीआई प्रबंधन द्वारा मंत्रालय को दी गई कुछ जानकारी भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत है। पत्र में कहा गया है कि हाउसकीपिंग, सैनिटेशन, कैटरिंग और सुरक्षा जैसे कार्यों में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए जारी राशि का पूरा भुगतान ठेका कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा।
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पत्र के अनुसार, ठेकेदार कंपनी बीवीजी को जून-जुलाई 2024 में करीब 33.5 करोड़ रुपये और दिसंबर 2024 में 22.57 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन कर्मचारियों को पूरी राशि नहीं दी गई। आरोप है कि करीब चार करोड़ रुपये पिछले 15 महीनों से कर्मचारियों तक नहीं पहुंचे हैं। इसके अलावा 30 जनवरी 2026 को बीवीजी को 12.15 करोड़ रुपये और जारी किए गए, लेकिन इसके बाद भी कर्मचारियों का भुगतान लंबित बताया गया है। जेएसी ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी कंपनी ग्रेविटी को भी लगभग 2.90 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन कर्मचारियों को उसका भी पूरा भुगतान नहीं मिला। यूनियन का कहना है कि जून-जुलाई 2024 से अब तक 15 से 20 करोड़ रुपये तक की राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची है।
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यूनियन ने इस मामले में ठेकेदार कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ 13 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ पुलिस में आपराधिक भरोसा भंग और धन के दुरुपयोग की शिकायत भी दर्ज कराई है। जेएसी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) कार्यालय के माध्यम से ऑडिट कराने की मांग की है ताकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए जारी 76 करोड़ रुपये के उपयोग और भुगतान की सच्चाई सामने आ सके।
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